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Rampur Bushahar News: गुड़िया मां चली गई, मासूमों से छिन गया ममता का आंचल
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हर्ष फायरिंग बनी मातम की वजह, दो मासूम बच्चों के सिर से उठ गया मां का साया
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। क्षेत्र में हृदय विदारक घटना ने इलाके को शोक में डुबो दिया। खुशी के माहौल में हुई लापरवाही ने एक मां की जान ले ली। इससे उसके दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए ममता का आंचल छिन गया। मृतका का नाम भी गुड़िया था। विडंबना ये रही कि अपनी ही गुड़िया जैसे बच्चों को रोता-बिलखता छोड़ वह इस दुनिया से हमेशा के लिए चली गई।
एक धार्मिक आयोजन में हर्ष फायरिंग की गई, जो अचानक जानलेवा साबित हुई। गोली लगने से महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में गहरा शोक और आक्रोश है। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है क्या थोड़ी सी लापरवाही या क्षणिक मनोरंजन किसी की जिंदगी से बढ़कर हो सकता है? जिस खुशी के लिए यह आयोजन किया गया था, वही खुशी अब कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म बन गई है।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जिन दो मासूम बच्चों ने अपनी मां को यह कहते हुए विदा किया था कि वह जल्द लौटकर आएगी, अब वे उसी इंतजार में हैं जो कभी पूरा नहीं होगा। उनकी आंखों में आंसू और दिल में मां से मिलने की उम्मीद अब सिर्फ एक अधूरी कल्पना बनकर रह गई है। लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए चेतावनी हैं। हर्ष फायरिंग जैसी खतरनाक परंपराओं पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े। एक मां अपने बच्चों को हमेशा के लिए छोड़कर चली गई, और पीछे रह गई केवल यादें, आंसू और एक अंतहीन इंतजार।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। क्षेत्र में हृदय विदारक घटना ने इलाके को शोक में डुबो दिया। खुशी के माहौल में हुई लापरवाही ने एक मां की जान ले ली। इससे उसके दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए ममता का आंचल छिन गया। मृतका का नाम भी गुड़िया था। विडंबना ये रही कि अपनी ही गुड़िया जैसे बच्चों को रोता-बिलखता छोड़ वह इस दुनिया से हमेशा के लिए चली गई।
एक धार्मिक आयोजन में हर्ष फायरिंग की गई, जो अचानक जानलेवा साबित हुई। गोली लगने से महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
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घटना के बाद पूरे क्षेत्र में गहरा शोक और आक्रोश है। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है क्या थोड़ी सी लापरवाही या क्षणिक मनोरंजन किसी की जिंदगी से बढ़कर हो सकता है? जिस खुशी के लिए यह आयोजन किया गया था, वही खुशी अब कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म बन गई है।
सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जिन दो मासूम बच्चों ने अपनी मां को यह कहते हुए विदा किया था कि वह जल्द लौटकर आएगी, अब वे उसी इंतजार में हैं जो कभी पूरा नहीं होगा। उनकी आंखों में आंसू और दिल में मां से मिलने की उम्मीद अब सिर्फ एक अधूरी कल्पना बनकर रह गई है। लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं समाज के लिए चेतावनी हैं। हर्ष फायरिंग जैसी खतरनाक परंपराओं पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े। एक मां अपने बच्चों को हमेशा के लिए छोड़कर चली गई, और पीछे रह गई केवल यादें, आंसू और एक अंतहीन इंतजार।

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