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Rampur Bushahar News: नाबालिग बेटे वाली महिला मजबूर होने पर ही छोड़ती है ससुराल, पति दे पोषण भत्ता

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2026 11:21 PM IST
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नाबालिग बेटे वाली महिला ससुराल तब तक नहीं छोड़ेगी जब तक उसे मजबूर न किया जाए
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. परिवार न्यायालय ने भरण पोषण भत्ते की याचिका का निपटारा करते हुए दिया आदेश
पति को पत्नी को हर माह भरण पोषण भत्ता देने का आदेश

संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। यह सामान्य समझ है कि नाबालिग बेटे वाली महिला अपना ससुराल तब तक नहीं छोड़ती है, जब तक उसे ऐसा करने के लिए मजबूर न किया गया हो। वह मजबूर होने पर ही सुसराल छोड़ती है। यह टिप्पणी रामपुर स्थित प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय किन्नौर ने भरण पोषण भत्ता देने से संबंधित एक याचिका का निपटारा करते हुए की। अदालत ने पति को उसकी पत्नी को भरण पोषण भत्ता देने का आदेश दिया है। याचिका के अनुसार याचिकाकर्ता महिला की शादी साल 2021 में किन्नौर में हुई। विवाह से एक पुत्र हुआ। विवाह के कुछ समय बाद पति के व्यवहार में बदलाव आ गया। उसने छोटी-छोटी बातों पर पत्नी को परेशान करना शुरू कर दिया और उससे झगड़ा करने लगा। याचिकाकर्ता के ससुराल वाले भी उसके साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे। आगे बताया कि प्रतिवादी पूरी तरह से स्वस्थ और हष्ट-पुष्ट है। वह पेशे से ड्राइवर है। वह प्रति माह 40 हजार रुपये कमाता है, इसलिए प्रार्थना की जाती है कि प्रतिवादी को 15 हजार रुपये प्रति माह भरण-पोषण के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया जाए। पति ने जवाब दाखिल करके इस याचिका का विरोध और खंडन किया। साथ ही बताया कि मई 2023 को पत्नी ने अपने नाबालिग बेटे को भी भगवान भरोसे छोड़ दिया। वर्तमान में बेटे की देखभाल पति कर रहा है, इसलिए याचिका को खारिज कर दिया जाए। अदालत ने टिप्पणी की है कि यह सामान्य समझ की बात है कि एक महिला, जिसका एक नाबालिग बेटा है, अपना ससुराल तब तक नहीं छोड़ेगी, जब तक उसे ऐसा करने के लिए मजबूर न किया जाए। भारतीय समाज में लड़कियों को बहुत पुराने समय से यह सिखाया जाता रहा है कि विवाह के बाद उन्हें अपने पति के घर में ही बसना होता है। यह भी एक स्वीकार्य तथ्य है कि प्रतिवादी यानी पति का इलाज चल रहा है। हलफनामे के अनुसार, उसके पास कोई जमीन-जायदाद नहीं है। वह लगभग तीन साल के नाबालिग बच्चे की देखभाल प्रतिवादी ही कर रहा है। ऐसे हालात में न्याय के हित में यह उचित होगा कि प्रतिवादी यानी पति को हर महीने 1500 रुपये का भरण-पोषण भत्ता देने का आदेश दिया जाए।
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