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Rampur Bushahar News: पंचायत सचिवों पर ज्यादा बोझ से चरमराने लगी व्यवस्था
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पंचायत सचिव संगठन ने खाली पदों को भरने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। पंचायतों में कार्यरत पंचायत सचिवों पर अत्यधिक कार्यभार डालने से व्यवस्था चरमराने लगी है। प्रदेश की लगभग 3,577 पंचायतों का जिम्मा संभाल रहे करीब 2,000 पंचायत सचिव आज मल्टीटास्क कर्मचारी की भूमिका निभाने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि एक पंचायत सचिव के पास दो से तीन ग्राम पंचायतों का अतिरिक्त कार्यभार है, जो अपने आप में एक गंभीर समस्या बन चुकी है।
पंचायत सचिवों को जहां पंचायत के अभिलेखों का संधारण, विकास कार्यों की निगरानी, ग्राम सभा और विशेष बैठकों का आयोजन करना होता है, वहीं उन पर अन्य विभागों से संबंधित कार्यों का बोझ भी डाला जा रहा है। 15वें वित्त आयोग के कार्यों की बार-बार जियो टैगिंग, पीएम आवास योजना लाभार्थियों की जियो टैगिंग, बीपीएल सर्वे, ई-परिवार ई-केवाईसी, जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीकरण जैसे कार्य पंचायत सचिवों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
इसके अतिरिक्त पशुगणना का ऑनलाइन डाटा, नशा निवारण बैठकों की रिपोर्टिंग, राशन कार्ड अपडेट, एफआरए से जुड़े अभिलेख, स्वयं सहायता समूहों का गठन और क्रियान्वयन जैसे कार्य भी पंचायत सचिवों से करवाए जा रहे हैं, जो मूल रूप से अन्य विभागों की जिम्मेदारी हैं। कार्यभार इतना अधिक है कि पंचायत सचिव दिन ही नहीं बल्कि रात-रात भर जागकर काम करने को विवश हैं, फिर भी सभी कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाते।
पंचायत सचिव संगठन चौपाल के अध्यक्ष नरेंद्र पांटा ने कहा कि पंचायत सचिव आज डाटा ऑपरेटर, लिपिक, अकाउंटेंट और कई जगह चौकीदार तक की भूमिका निभा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग 90 प्रतिशत पंचायत सचिव जिला परिषद कर्मचारी हैं, जिनका भविष्य भी अनिश्चित बना हुआ है। उन्होंने मांग की कि ग्राम पंचायत स्तर पर सचिवों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए। पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास के अतिरिक्त अन्य विभागीय कार्य संबंधित विभागों से ही करवाए जाएं, ताकि पंचायत सचिव सही मायनों में सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचा सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)। पंचायतों में कार्यरत पंचायत सचिवों पर अत्यधिक कार्यभार डालने से व्यवस्था चरमराने लगी है। प्रदेश की लगभग 3,577 पंचायतों का जिम्मा संभाल रहे करीब 2,000 पंचायत सचिव आज मल्टीटास्क कर्मचारी की भूमिका निभाने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि एक पंचायत सचिव के पास दो से तीन ग्राम पंचायतों का अतिरिक्त कार्यभार है, जो अपने आप में एक गंभीर समस्या बन चुकी है।
पंचायत सचिवों को जहां पंचायत के अभिलेखों का संधारण, विकास कार्यों की निगरानी, ग्राम सभा और विशेष बैठकों का आयोजन करना होता है, वहीं उन पर अन्य विभागों से संबंधित कार्यों का बोझ भी डाला जा रहा है। 15वें वित्त आयोग के कार्यों की बार-बार जियो टैगिंग, पीएम आवास योजना लाभार्थियों की जियो टैगिंग, बीपीएल सर्वे, ई-परिवार ई-केवाईसी, जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीकरण जैसे कार्य पंचायत सचिवों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
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इसके अतिरिक्त पशुगणना का ऑनलाइन डाटा, नशा निवारण बैठकों की रिपोर्टिंग, राशन कार्ड अपडेट, एफआरए से जुड़े अभिलेख, स्वयं सहायता समूहों का गठन और क्रियान्वयन जैसे कार्य भी पंचायत सचिवों से करवाए जा रहे हैं, जो मूल रूप से अन्य विभागों की जिम्मेदारी हैं। कार्यभार इतना अधिक है कि पंचायत सचिव दिन ही नहीं बल्कि रात-रात भर जागकर काम करने को विवश हैं, फिर भी सभी कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाते।
पंचायत सचिव संगठन चौपाल के अध्यक्ष नरेंद्र पांटा ने कहा कि पंचायत सचिव आज डाटा ऑपरेटर, लिपिक, अकाउंटेंट और कई जगह चौकीदार तक की भूमिका निभा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग 90 प्रतिशत पंचायत सचिव जिला परिषद कर्मचारी हैं, जिनका भविष्य भी अनिश्चित बना हुआ है। उन्होंने मांग की कि ग्राम पंचायत स्तर पर सचिवों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए। पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास के अतिरिक्त अन्य विभागीय कार्य संबंधित विभागों से ही करवाए जाएं, ताकि पंचायत सचिव सही मायनों में सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचा सकें।