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Sirmour News: 8 साल बाद फैसला, पीएफ घोटाले में सबूतों के अभाव में कारोबारी बरी
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2018 का थाना कालाअंब थाना का मामला, कंपनी पर जून 2015 से जून 2018 तक 2,77,668 रुपये की राशि रोकने के लगे थे आरोप
वेतन से पीएफ काटा, लेकिन उसे जमा नहीं किया, कोर्ट में आरोपी की सीधी भूमिका साबित नहीं हो सकी
मामले को साबित करने के लिए 8 गवाह किए पेश, गवाही में विरोधाभास आए सामने
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) में कथित गड़बड़ी के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने आरोपी नरेंद्र कुमार गुलाटी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
यह मामला वर्ष 2018 में थाना कालाअंब में दर्ज हुआ था। आरोप था कि कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की राशि काटी, लेकिन उसे समय पर जमा नहीं किया। जांच के अनुसार एक कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की रकम काटी गई, लेकिन उसे नियमानुसार समय पर जमा नहीं किया गया। आरोप था कि जून 2015 से जून 2018 तक करीब 2,77,668 रुपये की राशि रोकी गई। कर्मचारी की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की।
अदालत में अभियोजन पक्ष ने 8 गवाह पेश किए। कर्मचारी ने भी बयान दिया, लेकिन क्रॉस एग्जामिनेशन में कई बातें स्पष्ट नहीं हो सकीं। गवाहों ने यह भी माना कि कंपनी का काम अन्य कर्मचारियों की ओर से संभाला जा रहा था। अदालत ने फैसले में कहा कि यह साबित नहीं हो पाया कि आरोपी ही कंपनी के कामकाज का सीधा जिम्मेदार था। पीएफ राशि जमा न होने में अन्य कर्मचारियों की भूमिका सामने आई। आरोपी के खिलाफ पर्याप्त ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात) के आरोप से बरी कर दिया।
पहले कंपनी मजदूर अभिलाषा की सूचना पर कंपनी अधिकारी देवी रूप की शिकायत पर पुलिस ने 7 अगस्त 2018 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की। हालांकि, बाद में यह राशि और जुर्माना/ब्याज जमा कर दिया गया था। अदालत में साल 2019 को चार्जशीट दाखिल की गई। इसके बाद साल 2022 में सुनवाई शुरू हुई। करीब 8 साल तक चले इस मामले में आखिरकार अदालत ने आरोपी को राहत दे दी।
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वेतन से पीएफ काटा, लेकिन उसे जमा नहीं किया, कोर्ट में आरोपी की सीधी भूमिका साबित नहीं हो सकी
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) में कथित गड़बड़ी के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने आरोपी नरेंद्र कुमार गुलाटी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
यह मामला वर्ष 2018 में थाना कालाअंब में दर्ज हुआ था। आरोप था कि कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की राशि काटी, लेकिन उसे समय पर जमा नहीं किया। जांच के अनुसार एक कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की रकम काटी गई, लेकिन उसे नियमानुसार समय पर जमा नहीं किया गया। आरोप था कि जून 2015 से जून 2018 तक करीब 2,77,668 रुपये की राशि रोकी गई। कर्मचारी की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की।
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अदालत में अभियोजन पक्ष ने 8 गवाह पेश किए। कर्मचारी ने भी बयान दिया, लेकिन क्रॉस एग्जामिनेशन में कई बातें स्पष्ट नहीं हो सकीं। गवाहों ने यह भी माना कि कंपनी का काम अन्य कर्मचारियों की ओर से संभाला जा रहा था। अदालत ने फैसले में कहा कि यह साबित नहीं हो पाया कि आरोपी ही कंपनी के कामकाज का सीधा जिम्मेदार था। पीएफ राशि जमा न होने में अन्य कर्मचारियों की भूमिका सामने आई। आरोपी के खिलाफ पर्याप्त ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को आईपीसी की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात) के आरोप से बरी कर दिया।
पहले कंपनी मजदूर अभिलाषा की सूचना पर कंपनी अधिकारी देवी रूप की शिकायत पर पुलिस ने 7 अगस्त 2018 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की। हालांकि, बाद में यह राशि और जुर्माना/ब्याज जमा कर दिया गया था। अदालत में साल 2019 को चार्जशीट दाखिल की गई। इसके बाद साल 2022 में सुनवाई शुरू हुई। करीब 8 साल तक चले इस मामले में आखिरकार अदालत ने आरोपी को राहत दे दी।
