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Sirmour News: अदालत
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पति को संपत्ति बेचने पर रोक, पत्नी और
दो बच्चों को गुजारा भत्ता देने का आदेश
- परिवार न्यायालय ने फैसले में पति की संपत्ति पर चार्ज बनाने के भी दिए निर्देश, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होगा आदेश
- कोर्ट ने पत्नी और बच्चों का हक वैध माना, हर माह 10,000 देने के आदेश
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम के एक अहम फैसले में परिवार न्यायालय ने आदेश दिया कि जब तक गुजारा भत्ता की राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक पति अपनी जमीन को बेच, गिरवी या किसी अन्य को हस्तांतरित नहीं कर सकेगा। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि इस राशि की सुरक्षा के लिए पति की जमीन पर चार्ज (भार) भी बनाया जाएगा और बिना बकाया चुकाए वह संपत्ति बेच नहीं सकेगा। हालांकि, जरूरत पड़ने पर महिला कानून के तहत जमीन पर बने चार्ज को लागू कर सकती है।
मामले में प्रियंका ने मनवीर के खिलाफ गुजारा भत्ता की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पति ने न तो लिखित जवाब दाखिल किया और न ही पत्नी के आरोपों का खंडन किया। गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने माना कि पत्नी और बच्चों का गुजारा भत्ता पाने का अधिकार वैध है।
अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कपिल शर्मा ने पति को आदेश दिया कि वह पत्नी और उसके दो नाबालिग बच्चों को संयुक्त रूप से 10,000 प्रति माह गुजारा (भरण-पोषण) भत्ता दे। यह राशि आदेश की तारीख से लागू होगी।
अदालत ने संबंधित जमीन पर गुजारा भत्ता का चार्ज दर्ज करने के लिए आदेश की प्रति राजस्व प्राधिकरण को भेजने के भी निर्देश दिए हैं। यह फैसला महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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यह है पूरा मामला
याचिका में बताया गया कि वर्ष 2015 में हिंदू रीति-रिवाज से शादी के बाद पति ने दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। आरोप है कि पति शराब और नशीले पदार्थों का आदी है और उसने 6 अक्तूबर 2022 को पत्नी और दोनों बच्चों को घर से निकाल दिया। इसके बाद से महिला अपने मायके में रह रही है और पति ने किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं दी। महिला ने अदालत को बताया कि उसके पास आय का कोई स्रोत नहीं है, जबकि पति के पास जमीन, किराये की दुकानों और अन्य साधनों से अच्छी आय है।
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दो बच्चों को गुजारा भत्ता देने का आदेश
- परिवार न्यायालय ने फैसले में पति की संपत्ति पर चार्ज बनाने के भी दिए निर्देश, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होगा आदेश
- कोर्ट ने पत्नी और बच्चों का हक वैध माना, हर माह 10,000 देने के आदेश
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम के एक अहम फैसले में परिवार न्यायालय ने आदेश दिया कि जब तक गुजारा भत्ता की राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक पति अपनी जमीन को बेच, गिरवी या किसी अन्य को हस्तांतरित नहीं कर सकेगा। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि इस राशि की सुरक्षा के लिए पति की जमीन पर चार्ज (भार) भी बनाया जाएगा और बिना बकाया चुकाए वह संपत्ति बेच नहीं सकेगा। हालांकि, जरूरत पड़ने पर महिला कानून के तहत जमीन पर बने चार्ज को लागू कर सकती है।
मामले में प्रियंका ने मनवीर के खिलाफ गुजारा भत्ता की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पति ने न तो लिखित जवाब दाखिल किया और न ही पत्नी के आरोपों का खंडन किया। गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने माना कि पत्नी और बच्चों का गुजारा भत्ता पाने का अधिकार वैध है।
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अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कपिल शर्मा ने पति को आदेश दिया कि वह पत्नी और उसके दो नाबालिग बच्चों को संयुक्त रूप से 10,000 प्रति माह गुजारा (भरण-पोषण) भत्ता दे। यह राशि आदेश की तारीख से लागू होगी।
अदालत ने संबंधित जमीन पर गुजारा भत्ता का चार्ज दर्ज करने के लिए आदेश की प्रति राजस्व प्राधिकरण को भेजने के भी निर्देश दिए हैं। यह फैसला महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह है पूरा मामला
याचिका में बताया गया कि वर्ष 2015 में हिंदू रीति-रिवाज से शादी के बाद पति ने दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। आरोप है कि पति शराब और नशीले पदार्थों का आदी है और उसने 6 अक्तूबर 2022 को पत्नी और दोनों बच्चों को घर से निकाल दिया। इसके बाद से महिला अपने मायके में रह रही है और पति ने किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं दी। महिला ने अदालत को बताया कि उसके पास आय का कोई स्रोत नहीं है, जबकि पति के पास जमीन, किराये की दुकानों और अन्य साधनों से अच्छी आय है।