{"_id":"6a0dbbb5efc6aac6d70395a3","slug":"court-news-2-nahan-news-c-177-1-nhn1001-179125-2026-05-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: कोर्ट ने खारिज की कंपनी की अपील<bha>;<\/bha> चुकाना होगा 6,09,549 रुपये का बकाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: कोर्ट ने खारिज की कंपनी की अपील<bha>;</bha> चुकाना होगा 6,09,549 रुपये का बकाया
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अदालत
-जिला एवं सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिला एवं सत्र न्यायालय सिरमौर ने व्यापारिक लेनदेन से जुड़े एक मामले में कड़ा रुख अपनाया है। जिला न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत ने पुणे की मेसर्स सुनील ट्रेडिंग कंपनी द्वारा दायर नागरिक अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है, जिसमें कंपनी को विपक्षी फर्म का बकाया भुगतान करने का आदेश दिया गया था
यह कानूनी विवाद कालाअंब में स्थित फर्म मेसर्स ग्लोबल साइनेज एंड क्रिएटिविटी और पुणे की मेसर्स सुनील ट्रेडिंग कंपनी के बीच का है। ग्लोबल साइनेज फर्म ने साल 2013 में सुनील ट्रेडिंग कंपनी के कहने पर रेलवे के काम के लिए ‘मेंटेनेंस फ्री रिंग अर्थ सिस्टम’ और अन्य विद्युत सामग्री की सप्लाई और इंस्टॉलेशन का काम किया था। इस पूरे काम का कुल बिल 7,09,549 रुपये बना था, जिसमें से पुणे की कंपनी ने केवल 1,00,000 लाख रुपये का ही भुगतान किया और बाकी के 6,09,549 रुपये दबाकर बैठ गई।
सुनील ट्रेडिंग कंपनी ने कोर्ट में अपना बचाव करते हुए दावा किया था कि सप्लाई की गई सामग्री में से 4,59,484 रुपये का सामान खराब था और रेलवे ने उसे रिजेक्ट कर दिया था। हालांकि, कंपनी ने अपनी इस बात का कोई भी ठोस सबूत या रेलवे की रिजेक्शन रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश नहीं की। इसके विपरीत, कंपनी द्वारा सामान प्राप्ति के लिए ‘सी-फॉर्म’ जारी किए गए थे, जो यह साबित करते हैं कि सामान सही-सलामत प्राप्त हुआ था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह माना कि अपीलकर्ता भुगतान से बचने के लिए मनगढ़ंत कहानियां बना रही है। कोर्ट ने साफ किया कि व्यापारिक लेनदेन पूरी तरह वैध था और सामान की डिलीवरी की गई थी। कंपनी ने भुगतान में देरी की, इसलिए उसे मूल राशि के साथ 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी चुकाना होगा। मामले से जुड़े रेलवे अधिकारियों और अन्य प्रोफॉर्मा प्रतिवादियों के नाम पहले ही इस केस से हटाए जा चुके हैं।
विज्ञापन
Trending Videos
-जिला एवं सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिला एवं सत्र न्यायालय सिरमौर ने व्यापारिक लेनदेन से जुड़े एक मामले में कड़ा रुख अपनाया है। जिला न्यायाधीश योगेश जसवाल की अदालत ने पुणे की मेसर्स सुनील ट्रेडिंग कंपनी द्वारा दायर नागरिक अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा है, जिसमें कंपनी को विपक्षी फर्म का बकाया भुगतान करने का आदेश दिया गया था
यह कानूनी विवाद कालाअंब में स्थित फर्म मेसर्स ग्लोबल साइनेज एंड क्रिएटिविटी और पुणे की मेसर्स सुनील ट्रेडिंग कंपनी के बीच का है। ग्लोबल साइनेज फर्म ने साल 2013 में सुनील ट्रेडिंग कंपनी के कहने पर रेलवे के काम के लिए ‘मेंटेनेंस फ्री रिंग अर्थ सिस्टम’ और अन्य विद्युत सामग्री की सप्लाई और इंस्टॉलेशन का काम किया था। इस पूरे काम का कुल बिल 7,09,549 रुपये बना था, जिसमें से पुणे की कंपनी ने केवल 1,00,000 लाख रुपये का ही भुगतान किया और बाकी के 6,09,549 रुपये दबाकर बैठ गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुनील ट्रेडिंग कंपनी ने कोर्ट में अपना बचाव करते हुए दावा किया था कि सप्लाई की गई सामग्री में से 4,59,484 रुपये का सामान खराब था और रेलवे ने उसे रिजेक्ट कर दिया था। हालांकि, कंपनी ने अपनी इस बात का कोई भी ठोस सबूत या रेलवे की रिजेक्शन रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश नहीं की। इसके विपरीत, कंपनी द्वारा सामान प्राप्ति के लिए ‘सी-फॉर्म’ जारी किए गए थे, जो यह साबित करते हैं कि सामान सही-सलामत प्राप्त हुआ था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह माना कि अपीलकर्ता भुगतान से बचने के लिए मनगढ़ंत कहानियां बना रही है। कोर्ट ने साफ किया कि व्यापारिक लेनदेन पूरी तरह वैध था और सामान की डिलीवरी की गई थी। कंपनी ने भुगतान में देरी की, इसलिए उसे मूल राशि के साथ 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी चुकाना होगा। मामले से जुड़े रेलवे अधिकारियों और अन्य प्रोफॉर्मा प्रतिवादियों के नाम पहले ही इस केस से हटाए जा चुके हैं।