{"_id":"6a3be44afbab0efbf206822e","slug":"court-news-2-nahan-news-c-177-1-nhn1001-181787-2026-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: पत्नी और सौतेली बेटी को अंतरिम गुजारा भत्ता, पति को हर माह 5 हजार रुपये देने के आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: पत्नी और सौतेली बेटी को अंतरिम गुजारा भत्ता, पति को हर माह 5 हजार रुपये देने के आदेश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अदालत
- फैमिली कोर्ट नाहन का फैसला, पत्नी और बेटी ने 30 हजार रुपये मासिक भत्ते की उठाई थी मांग
- पति ने शादी से किया इन्कार, बोला : मां की देखभाल के लिए घरेलू सहायक के तौर पर करती थी काम
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। फैमिली कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में महिला और उसकी नाबालिग बेटी के पक्ष में अंतरिम गुजारा भत्ता मंजूर किया है। अदालत ने कांगड़ा के तहसील खुंडियां निवासी एक व्यक्ति को अपनी कथित पत्नी को 3,000 रुपये तथा उसकी बेटी को 2,000 रुपये प्रतिमाह देने के निर्देश दिए हैं।
महिला ने अदालत में दायर याचिका में दावा किया था कि वर्ष 2013 में उसकी शादी हुई थी। आरोप लगाया गया कि पति शराब पीने का आदी है और उसने मारपीट करने के बाद वर्ष 2015 में उसे छोड़ दिया। महिला ने कहा कि उसके पास आय का कोई साधन नहीं है, जबकि पति चालक और कारोबारी होने के कारण अच्छी कमाई करता है।
वहीं, प्रतिवादी ने अदालत में विवाह होने से ही इन्कार कर दिया। उसका कहना था कि महिला केवल उसकी बीमार मां की देखभाल के लिए घरेलू सहायक के रूप में काम करती थी और दोनों के बीच कभी वैवाहिक संबंध नहीं रहे। उसने स्वयं को दिहाड़ी मजदूर बताते हुए सीमित आय होने का दावा किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विवाह के अस्तित्व को लेकर दोनों पक्षों के दावे परस्पर विरोधी हैं और इस विषय में विस्तृत साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान होगा।
विज्ञापन
हालांकि, अंतरिम चरण में महिला और बच्ची को पूरी तरह असहाय नहीं छोड़ा जा सकता। फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश योगेश जसवाल ने आदेश दिया कि मुख्य याचिका के अंतिम निपटारे तक महिला को 3,000 रुपये तथा बेटी को 2,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम गुजारा भत्ता दिया जाए। राशि प्रत्येक माह की 10 तारीख तक जमा करनी होगी।
- फैमिली कोर्ट नाहन का फैसला, पत्नी और बेटी ने 30 हजार रुपये मासिक भत्ते की उठाई थी मांग
- पति ने शादी से किया इन्कार, बोला : मां की देखभाल के लिए घरेलू सहायक के तौर पर करती थी काम
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। फैमिली कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में महिला और उसकी नाबालिग बेटी के पक्ष में अंतरिम गुजारा भत्ता मंजूर किया है। अदालत ने कांगड़ा के तहसील खुंडियां निवासी एक व्यक्ति को अपनी कथित पत्नी को 3,000 रुपये तथा उसकी बेटी को 2,000 रुपये प्रतिमाह देने के निर्देश दिए हैं।
महिला ने अदालत में दायर याचिका में दावा किया था कि वर्ष 2013 में उसकी शादी हुई थी। आरोप लगाया गया कि पति शराब पीने का आदी है और उसने मारपीट करने के बाद वर्ष 2015 में उसे छोड़ दिया। महिला ने कहा कि उसके पास आय का कोई साधन नहीं है, जबकि पति चालक और कारोबारी होने के कारण अच्छी कमाई करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वहीं, प्रतिवादी ने अदालत में विवाह होने से ही इन्कार कर दिया। उसका कहना था कि महिला केवल उसकी बीमार मां की देखभाल के लिए घरेलू सहायक के रूप में काम करती थी और दोनों के बीच कभी वैवाहिक संबंध नहीं रहे। उसने स्वयं को दिहाड़ी मजदूर बताते हुए सीमित आय होने का दावा किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विवाह के अस्तित्व को लेकर दोनों पक्षों के दावे परस्पर विरोधी हैं और इस विषय में विस्तृत साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान होगा।
हालांकि, अंतरिम चरण में महिला और बच्ची को पूरी तरह असहाय नहीं छोड़ा जा सकता। फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश योगेश जसवाल ने आदेश दिया कि मुख्य याचिका के अंतिम निपटारे तक महिला को 3,000 रुपये तथा बेटी को 2,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम गुजारा भत्ता दिया जाए। राशि प्रत्येक माह की 10 तारीख तक जमा करनी होगी।