{"_id":"6a296f993f43a930f001cf09","slug":"court-news-7-nahan-news-c-177-1-nhn1017-180669-2026-06-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: अदालत 7","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: अदालत 7
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बाइक-पिकअप टक्कर मामले में आरोपी बरी
नाहन। करीब दस वर्ष पुराने सड़क हादसे के मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी नारायण सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी की कथित लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
यह मामला 31 मई 2016 को पच्छाद थाना में दर्ज हुआ है। धरयार के पास एक मोटरसाइकिल और सब्जियों से लदे पिकअप वाहन की टक्कर हो गई थी। पुलिस ने इस घटना के बाद आरोपी नारायण सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 337 और 338 तथा एमवी एक्ट की धारा 181 और 196 के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 10 गवाह पेश किए, लेकिन कई गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए या घटना के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। अदालत ने फैसले में कहा कि केवल दुर्घटना होना या आरोपी का वाहन चला रहा होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सिद्ध होना जरूरी है कि हादसा उसकी आपराधिक लापरवाही या तेज एवं असावधान ड्राइविंग के कारण हुआ।
विज्ञापन
न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋतु सिन्हा ने यह भी पाया कि आरोपी के विरुद्ध बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और बिना बीमा वाहन चलाने के आरोप भी साबित नहीं हो सके। परिणामस्वरूप न्यायालय ने उसे सभी आरोपों से दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
संवाद
नाहन। करीब दस वर्ष पुराने सड़क हादसे के मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी नारायण सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी की कथित लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाने के आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
यह मामला 31 मई 2016 को पच्छाद थाना में दर्ज हुआ है। धरयार के पास एक मोटरसाइकिल और सब्जियों से लदे पिकअप वाहन की टक्कर हो गई थी। पुलिस ने इस घटना के बाद आरोपी नारायण सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 337 और 338 तथा एमवी एक्ट की धारा 181 और 196 के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 10 गवाह पेश किए, लेकिन कई गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए या घटना के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। अदालत ने फैसले में कहा कि केवल दुर्घटना होना या आरोपी का वाहन चला रहा होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सिद्ध होना जरूरी है कि हादसा उसकी आपराधिक लापरवाही या तेज एवं असावधान ड्राइविंग के कारण हुआ।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋतु सिन्हा ने यह भी पाया कि आरोपी के विरुद्ध बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और बिना बीमा वाहन चलाने के आरोप भी साबित नहीं हो सके। परिणामस्वरूप न्यायालय ने उसे सभी आरोपों से दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।
संवाद