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शिक्षा से मिलती है सफलता, दीक्षा से होती है शिव की प्राप्ति : चैतन्य
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सुरला में शिव कथा में आरती करते श्रद्धालु। संवाद
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आज के कार्यक्रम की खबर
-शिव-सती प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, पंडाल में छलके आंसू
-भीषण गर्मी के बावजूद शिव महापुराण कथा में उमड़ रही भारी भीड़
संवाद न्यूज़ एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सुरला के प्राचीन ब्रह्मा जी मंदिर परिसर में आयोजित शिव महापुराण कथा में बुधवार को कथा व्यास आचार्य साक्षी चैतन्य ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश दिया। उन्होंने शिक्षा और दीक्षा के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति की बुद्धि को विकसित कर सांसारिक सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है, जबकि दीक्षा हृदय को शुद्ध कर शिव की प्राप्ति का माध्यम बनती है।
कथा के दौरान आचार्य साक्षी चैतन्य ने संध्या के चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि त्रिकाल संध्या का नियमित पालन व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल की संध्या के विशेष महत्व एवं फल के बारे में भी श्रद्धालुओं को बताया। कथा के मार्मिक प्रसंग में जब शिव-सती चरित्र का वर्णन हुआ और सती के देह त्याग की घटना का भावपूर्ण चित्रण किया गया, तो पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे। कथा के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
भीषण गर्मी के बावजूद शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आयोजकों की ओर से प्रतिदिन भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।
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-शिव-सती प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, पंडाल में छलके आंसू
-भीषण गर्मी के बावजूद शिव महापुराण कथा में उमड़ रही भारी भीड़
संवाद न्यूज़ एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। सुरला के प्राचीन ब्रह्मा जी मंदिर परिसर में आयोजित शिव महापुराण कथा में बुधवार को कथा व्यास आचार्य साक्षी चैतन्य ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश दिया। उन्होंने शिक्षा और दीक्षा के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति की बुद्धि को विकसित कर सांसारिक सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है, जबकि दीक्षा हृदय को शुद्ध कर शिव की प्राप्ति का माध्यम बनती है।
कथा के दौरान आचार्य साक्षी चैतन्य ने संध्या के चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि त्रिकाल संध्या का नियमित पालन व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल की संध्या के विशेष महत्व एवं फल के बारे में भी श्रद्धालुओं को बताया। कथा के मार्मिक प्रसंग में जब शिव-सती चरित्र का वर्णन हुआ और सती के देह त्याग की घटना का भावपूर्ण चित्रण किया गया, तो पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे। कथा के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
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भीषण गर्मी के बावजूद शिव महापुराण कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आयोजकों की ओर से प्रतिदिन भंडारे का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।