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Video: Preparations for bumper maize yield in Sirmaur; 100 metric tonnes of seeds across more than 17 improved varieties available
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Video: सिरमौर में मक्की की बंपर पैदावार की तैयारी, 17 से अधिक उन्नत किस्मों के 100 मीट्रिक टन बीज उपलब्ध
Ankesh Dogra
Updated Thu, 11 Jun 2026 02:03 PM IST
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खरीफ सीजन की मुख्य फसल मक्की की बुआई के लिए सिरमौर जिला पूरी तरह तैयार है। किसानों ने जहां बीजाई के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं तो वहीं विभाग ने भी मैदानी व पहाड़ी क्षेत्रों की जलवायु के अनुसार सभी आठ विकासखंडों में 17 से अधिक किस्मों का हाईब्रीड बीज उपलब्ध करवा दिया है। जिला में 100 मीट्रिक टन बीज की आपूर्ति हो गई है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में कुल 40,325 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की की खेती की जाती है, जिसके लिए लगभग 480 मीट्रिक टन बीजों की आवश्यकता रहती है। विभाग ने इस मांग को देखते हुए अब तक 100 मीट्रिक टन बीज विभिन्न विकासखंडों तक पहुंचा दिए हैं। जहां विभाग के अधिकृत बिक्री केंद्र हैं वहां उनके माध्यम से किसानों को आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा जहां बिक्री केंद्र नहीं हैं वहां 160 सीड लाइसेंस धारकों को अधिकृत किया गया है। किसानों को आर्थिक राहत देते हुए विभाग इन उन्नत बीजों पर 20 रुपये प्रति किलोग्राम की सब्सिडी मुहैया करा रहा है। खास बात यह है कि कृषि विशेषज्ञों ने भौगोलिक स्थिति के अनुसार बीजों के चयन पर विशेष जोर दिया है, जिसके तहत ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 90 से 110 दिन में पकने वाली किस्में और निचले मैदानी इलाकों के लिए 50 से 60 दिन में तैयार होने वाली उच्च उपज वाली किस्में उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें बी-52 गोल्ड, ब्यास गोल्ड, एएससी-2337, टीसीएस-3322 गोल्ड, बायो-9220, केएच-1150805, बी-52 सुपर, पीजी-2285, पीजी-2120, करण-607, साम्बा गोल्ड, सोमो-292 और केएच-2194 जैसी प्रमुख किस्में शामिल हैं। ऐसे में अच्छी पैदावार की उम्मीद है। हालांकि हल्की बारिश के बाद कुछ क्षेत्रों में बुआई का कार्य शुरू हो गया है, लेकिन कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि मक्की की मुख्य बुआई मानसून के आगमन के साथ यानी 15 जून के आसपास शुरू होगी। अभी बीज उपलब्ध हो जाने के बाद किसान बिक्री केंद्रों से बीच की खरीद कर रहे हैं। बीजाई के लिए बारिश का इंतजार किया जा रहा है। खेतों केा मक्की की फसल के लिए तैयार किया जा रहा है। जिला में सिंचाई की सुविधा कम होने से अधिकतर खेती बारिश पर ही निर्भर रहती है। खरीफ के मौसम में बारिश अच्छी मिलने से यहां फसलों की भी बेहतर पैदावार रहती है। इन फसलों में मक्की सबसे प्रमुख रहती है। मक्की की खेती के साथ-साथ जिले में प्राकृतिक खेती का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है। विभाग के अनुसार वर्तमान में लगभग 250 हेक्टेयर भूमि पर मक्की की प्राकृतिक खेती की जा रही है। विभाग की ओर से प्राकृतिक तरीके से उगाई गई मक्की को 50 रुपये प्रति किलोग्राम के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है। इससे किसानों की आजीविका में सुधार के साथ-साथ वे परंपरागत रासायनिक खेती को छोड़कर नेचुरल फार्मिंग की ओर प्रोत्साहित हो रहे हैं। उपनिदेशक कृषि विभाग सिरमौर साहब सिंह ने कहा कि जिले में किसानों को 20 रुपये प्रतिकिलोग्राम अनुदान पर मक्की का 17 से अधिक उन्नत किस्मों का बीज उपलब्ध करवाया जा रहा है। 100 मीट्रिक टन बीज की आपूर्ति हो गई है।
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