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Meerut: धरना स्थल पर किसानों से मिले एडीएम प्रशासन, किसानों ने रखी कई मांग
मेरठ। खरखौदा में 19 माह से लगातार धरने पर बैठे किसानों से फिर मिले एडीएम प्रशासन, किसानों ने बाजार मूल्य से चार गुना जमीन का मूल्य व 10 प्रतिशत भूखंड सहित कई मांग रखी। किसानों ने प्रशासन द्वारा सभी मांगों की मंजूरी के बाद ही अपनी कृषि भूमि देने की सहमति जताई है। वहीं एडीएम प्रशासन ने किसानों को सभी मांगों को जायज ठहराते हुए अधिकारियों से जल्द वार्ता कर समस्या के निस्तारण का आश्वासन दिया है। करीब डेढ़ माह पूर्व गंगा एक्सप्रेसवे का संचालन हो चुका है। औद्योगिक कॉरिडोर के पहले फेस में सड़क निर्माण का कार्य सहित कंपनियों ने भी अपनी नीव रखनी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश आने के बाद यूपीडा ने मेरठ प्रशासन से जल्द से जल्द दूसरे फेस के लिए 294 हेक्टेयर कृषि भूमि उन्हें सौंपने की मांग की थी। पहले नौ मई को एडीएम प्रशासन स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे थे तथा किसानों से वार्ता की थी। जिसमें एडीएम ने किसानों के सामने बाजार मूल्य की बात रखी थी। जिसमें किसानों ने वार्ता करने के बाद जिलाधिकारी को अपनी मनसा जताई। बुधवार को को एडीएम प्रशासन सत्य प्रकाश, एडीएमएलए, एसडीएम सदर दीपक माथुर सहित कई अधिकारी फिर से धरना स्थल पर पहुंचे तथा किसानों से वार्ता की। जिसमें किसानों ने अधिकारियों से दो टूक कहा कि औद्योगिक गलियारे के लिए किसान अपनी भूमि देने का विचार कर सकते हैं, लेकिन पहले प्रशासन को उनकी मांगे माननी होंगी। जिसमें किसानों ने बताया कि गांव छतरी खड़खड़ी गोविंदपुरी की कृषि भूमिका बाजार मूल 4880 रुपए प्रति वर्ग मीटर है, जिसका उन्होंने अपने मांग पत्र में बैनामा भी संलग्न किया है। भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 26 के तहत बाजार मूल्य बैनामों के आधार पर क्रय मूल निर्धारण किया जाए। नियम में यह भी है कि सर्किल रेट या बाजार मूल दोनों में से जो भी अधिक हो उसी को आधार मानकर मूल्य की गणना हो। 3 अप्रैल 2025 को यह भी व्यवस्था की गई थी कि सरकार द्वारा भूमि का क्रय मूल्य बाजार मूल्य के उच्चतम मूल्य पर पंजीकृत बैनामों के आधार पर किया जाए तथा बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा घोषित हो। गांव छतरी, खड़खड़ी व गोविंदपुरी तीनों का मुआवजा समान हो। किसानों की दूसरे चरण के लिए प्रकाश में आई कुल कृषि भूमि का 10 प्रतिशत भूखंड किसानों को दिया जाए। कृषि भूमि जाने के बाद किसानों की आय का कोई साधन नहीं होगा, जिसके लिए किसानों को या उसके परिवार के एक सदस्य को उद्योगों में एक नौकरी का लिखित आश्वासन मिले। किसानों ने प्रशासन से चेतावनी दी है कि किसानों ने प्रशासन को केवल अपना मांग पत्र सौंपा है, अभी प्रशासन इस जमीन देने की सहमति न समझे। सभी मांगे पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। उधर एडीएम प्रशासन में किसानों की सभी मांगों को जायज ठहराया तथा अधिकारियों से इस मांग पत्र पर विचार विमर्श कर जल्द से जल्द समस्या का निस्तारण करने का भी आश्वासन दिया है।
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