राजनीति: मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट, सपा में टिकट के कई दावेदार, आदिल चौधरी से योगेश वर्मा तक किसे मिलेगा मौका?
मेरठ दक्षिण सीट पर सपा में टिकट के लिए कई नेताओं ने ठोकी दावेदारी। आदिल चौधरी, कर्मवीर सिंह गुमी, डॉ. किशन पाल गुर्जर समेत कई नाम चर्चा में। जातीय समीकरण, संगठन में स्वीकार्यता और गठबंधन की रणनीति टिकट तय करने में निभाएगी अहम भूमिका।
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मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट हमेशा से ही एक हॉट सीट और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का केंद्र रही है। समाजवादी पार्टी के लिए यह सीट जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही पेचीदा भी। हालात यह हैं कि मेरठ जिले की सातों विधानसभा सीटों में से सबसे ज्यादा टिकट के दावेदार इसी सीट पर अपनी हुंकार भर रहे हैं।
लखनऊ की दौड़ लगा रहे हैं। ऐसे में पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस घमासान के बीच बेड़ा पार कैसे होगा और पार्टी किस चेहरे पर दांव खेलेगी।इस सीट पर सपा से टिकट चाहने वालों की लंबी फेहरिस्त है। यहां स्थानीय नेताओं से लेकर पार्टी के पुराने और वफादार सिपहसालार तक अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं।
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हालांकि पिछली बार उन्होंने भाजपा के सोमेंद्र तोमर को कड़ी टक्कर दी थी। वह महज 7942 वोटों से हारे थे। उन्हें 1,21,725 वोट मिले थे। इनके अलावा सपा जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी, डॉ. किशन पाल गुर्जर, मुखिया गुर्जर और जितेंद्र गुर्जर के नाम शामिल हैं।
अगर पूर्व विधायक योगेश वर्मा का हस्तिनापुर से टिकट नहीं होता है तो वह भी इस सीट के मजबूत दावेदार हैं। वहीं, कांग्रेस से सपा का गठबंधन तय माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस भी इस सीट पर टिकट के लिए जोर लगा सकती है। हाल ही में सेंट्रल मार्केट में पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना देखे गए थे। उन्हें इसी परिपेक्ष्य में जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दावेदारों की संख्या ज्यादा होना पार्टी की जमीनी पकड़ को तो मजबूत दिखाता है लेकिन यह अंतर्कलह और गुटबाजी का खतरा भी पैदा करता है। अगर समय रहते डैमेज कंट्रोल नहीं किया गया तो टिकट बंटने के बाद असंतोष खुलकर सामने आ सकता है। इसका सीधा नुकसान चुनावी मैदान में उठाना पड़ सकता है।
इस सीट पर सपा की राह आसान बिल्कुल नहीं है। दावेदारों की भरमार पार्टी के लिए एक तरफ वरदान है कि उसके पास विकल्पों की कमी नहीं है, तो दूसरी तरफ अभिशाप भी बन सकती है यदि भितरघात हुआ। सपा नेतृत्व को टिकट वितरण में अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी।
कौन मार सकता है बाजी और क्यों
सपा के इस सियासी समर में बाजी कौन मारेगा, इसे लेकर पार्टी गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है। जानकारों का मानना है कि इस बार बाजी वही मारेगा जो कई पैमानों पर खरा उतरेगा। जैसे- मजबूत जातीय समीकरण। इस सीट पर मुस्लिम और दलित मतदाताओं के साथ-साथ अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) का समीकरण चुनावी हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
जो उम्मीदवार सभी वर्गों को साधने में सक्षम होगा, उसका पलड़ा भारी रहेगा। ऐसे में आदिल चौधरी और योगेश वर्मा का दावा मजबूत लग रहा है। टिकट के लिए संगठन की स्वीकार्यता भी जरूरी है। जो चेहरा विवादों से दूर रहा हो सबसे ज्यादा होगी, हाईकमान उस पर भरोसा जता सकता है।