CGHS मेरठ रिश्वत मामला: रईस अहमद की हाईकोर्ट में याचिका, CBI से जवाब तलब, 14 अगस्त को अगली सुनवाई
CGHS मेरठ के कथित 50 लाख रुपये रिश्वत मामले में आरोपी रईस अहमद ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में चार्जशीट और संज्ञान आदेश को चुनौती देते हुए खुद को निर्दोष बताया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI से जवाब तलब कर 14 अगस्त को अगली सुनवाई तय की है।
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केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (CGHS) मेरठ में कथित 50 लाख रुपये रिश्वत मांगने के मामले में आरोपी बनाए गए शास्त्री नगर निवासी रईस अहमद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।
25 साल से अस्पताल में अकाउंटेंट, याचिका में बताई पूरी पृष्ठभूमि
याचिका के अनुसार, रईस अहमद पिछले करीब 25 वर्षों से डॉ. आशीष जैन के संस्थानों-जेएमसी मेडिकल सिटी, हाईफील्ड स्पेशलिटी हॉस्पिटल और जैन मेडिकल स्टोर, मेरठ में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत हैं। ये सभी संस्थान CGHS के पैनल में सूचीबद्ध हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि अस्पताल के बिल और प्रशासनिक कार्यों के सिलसिले में वह डॉ. आशीष जैन के निर्देश पर CGHS अधिकारियों के संपर्क में रहते थे। उनके अधिवक्ता सुनील चौधरी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि 8 जुलाई 2025 को तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर डॉ. अजय कुमार और ऑफिस सुपरिंटेंडेंट लवलेश सोलंकी ने निरीक्षण में मिली कथित कमियों पर कार्रवाई न करने के बदले 50 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी।
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याचिका में कहा गया है कि अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. आशीष जैन के निर्देश पर डायरेक्टर ऑपरेशन विशाल कुमार और रईस अहमद कथित तौर पर पांच लाख रुपये की पहली किस्त लेकर CGHS कार्यालय पहुंचे थे। वहां कथित रूप से अगले दिन रकम लाने के लिए कहा गया। इसके बाद रईस अहमद पांच लाख रुपये का बैग लेकर घर जा रहे थे।
इसी दौरान विशाल कुमार की शिकायत पर CBI ने कार्रवाई करते हुए डॉ. अजय कुमार, लवलेश सोलंकी और रईस अहमद के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच एजेंसी ने पांच लाख रुपये की बरामदगी का उल्लेख करते हुए रईस अहमद को भी आरोपी बनाया।
याचिकाकर्ता का दावा- गलत तरीके से फंसाया गया
रईस अहमद की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि वह किसी भी कथित अवैध लेन-देन का लाभार्थी नहीं थे। उनका कहना है कि वह केवल अपने नियोक्ता के निर्देश पर विशाल कुमार के साथ बैग लेकर गए थे और उन्हें इस मामले में गलत तरीके से आरोपी बनाया गया है।
जमानत मिलने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में चार्जशीट और संज्ञान आदेश को चुनौती दी है। अधिवक्ता का तर्क है कि रईस अहमद ने न तो किसी से रिश्वत की मांग की और न ही उनके पास से रिश्वत की रकम बरामद हुई। उनका कहना है कि वह केवल निर्देशानुसार राशि लेकर गए थे।
14 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI से जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी। अदालत के अगले आदेश और CBI के जवाब पर मामले की आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।