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अदालत का महत्वपूर्ण फैसला :
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सड़क दुर्घटना मामले में व्यक्ति अपने
ही दोष पर नहीं ले सकते हैं मुआवजा
- 8 मार्च को नाहन क्षेत्र में युवक की दुर्घटना में हो गई थी मौत, परिजनों ने मुआवजे की थी मांग
- ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते कहा, ऐसे मामलों में परिजन भी मुआवजे के हकदार नहीं होते
- अदालत का फैसला प्रदेश में अन्य समान मामलों में साबित होगा नजीर
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। सड़क हादसे में बेटे की मौत के बाद मुआवजे की उम्मीद लगाए माता-पिता को बड़ा झटका लगा है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने उनके दावे को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि जब मृतक खुद ही वाहन का मालिक और चालक हो, तो उसके परिवार को मुआवजा नहीं मिल सकता। कानून के अनुसार व्यक्ति (मृतक/घायल) अपने ही दोष पर मुआवजा नहीं ले सकता।
यह मामला 8 मार्च 2023 को नाहन क्षेत्र का है। होली के दिन दोपहर 3 बजे युवक हर्ष कुमार अपनी मोटरसाइकिल चला रहा था। कौलांवालाभूड़ के पास ढलान में बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने शेड से टकरा गई। हादसे में उसके सिर और शरीर में चोटें आईं। पहले नाहन मेडिकल कॉलेज, फिर पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज किया गया। इसी दौरान 10 मार्च को उसकी मौत हो गई।
इसके बाद मृतक के माता-पिता ने अदालत में याचिका दायर कर 6.5 लाख मुआवजा और आर्थिक नुकसान सहित मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे की मांग की थी, लेकिन गुड़गांव स्थित बीमा कंपनी (चोलमंडलम मेसर्स जनरल इंश्योरेंस) ने अदालत से दावा खारिज करने की मांग की। एमएसीटी ने सुनवाई के बाद पाया कि मृतक ही बाइक का मालिक और चालक था। हादसा उसकी खुद की लापरवाही से हुआ। अधिकरण के अध्यक्ष योगेश जसवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जो व्यक्ति खुद वाहन चला रहा हो और उसी की गलती से हादसा हुआ हो, उसके आश्रित मुआवजा नहीं मांग सकते। इसलिए परिजनों का मुआवजा दावा कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। अब, ट्रिब्यूनल का यह फैसला प्रदेश में अन्य समान मामलों में नजीर के रूप में साबित होगा।
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कंपनी ने विरोध करते हुए खारिज की याचिका
इंश्योरेंस कंपनी ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि दुर्घटना के समय मृतक के पास मोटरसाइकिल चलाने का वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। दुर्घटना के समय मृतक सहित तीन व्यक्ति मोटरसाइकिल पर सवार थे। साथ ही, मालिक-सह-चालक बीमा पॉलिसी में तीसरे पक्ष के रूप में शामिल नहीं था। इसी आधार पर याचिका में उल्लिखित तथ्यों को खारिज कर दिया गया।
संवाद
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ही दोष पर नहीं ले सकते हैं मुआवजा
- 8 मार्च को नाहन क्षेत्र में युवक की दुर्घटना में हो गई थी मौत, परिजनों ने मुआवजे की थी मांग
- ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते कहा, ऐसे मामलों में परिजन भी मुआवजे के हकदार नहीं होते
- अदालत का फैसला प्रदेश में अन्य समान मामलों में साबित होगा नजीर
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। सड़क हादसे में बेटे की मौत के बाद मुआवजे की उम्मीद लगाए माता-पिता को बड़ा झटका लगा है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने उनके दावे को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि जब मृतक खुद ही वाहन का मालिक और चालक हो, तो उसके परिवार को मुआवजा नहीं मिल सकता। कानून के अनुसार व्यक्ति (मृतक/घायल) अपने ही दोष पर मुआवजा नहीं ले सकता।
यह मामला 8 मार्च 2023 को नाहन क्षेत्र का है। होली के दिन दोपहर 3 बजे युवक हर्ष कुमार अपनी मोटरसाइकिल चला रहा था। कौलांवालाभूड़ के पास ढलान में बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने शेड से टकरा गई। हादसे में उसके सिर और शरीर में चोटें आईं। पहले नाहन मेडिकल कॉलेज, फिर पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज किया गया। इसी दौरान 10 मार्च को उसकी मौत हो गई।
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इसके बाद मृतक के माता-पिता ने अदालत में याचिका दायर कर 6.5 लाख मुआवजा और आर्थिक नुकसान सहित मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे की मांग की थी, लेकिन गुड़गांव स्थित बीमा कंपनी (चोलमंडलम मेसर्स जनरल इंश्योरेंस) ने अदालत से दावा खारिज करने की मांग की। एमएसीटी ने सुनवाई के बाद पाया कि मृतक ही बाइक का मालिक और चालक था। हादसा उसकी खुद की लापरवाही से हुआ। अधिकरण के अध्यक्ष योगेश जसवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जो व्यक्ति खुद वाहन चला रहा हो और उसी की गलती से हादसा हुआ हो, उसके आश्रित मुआवजा नहीं मांग सकते। इसलिए परिजनों का मुआवजा दावा कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। अब, ट्रिब्यूनल का यह फैसला प्रदेश में अन्य समान मामलों में नजीर के रूप में साबित होगा।
कंपनी ने विरोध करते हुए खारिज की याचिका
इंश्योरेंस कंपनी ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि दुर्घटना के समय मृतक के पास मोटरसाइकिल चलाने का वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। दुर्घटना के समय मृतक सहित तीन व्यक्ति मोटरसाइकिल पर सवार थे। साथ ही, मालिक-सह-चालक बीमा पॉलिसी में तीसरे पक्ष के रूप में शामिल नहीं था। इसी आधार पर याचिका में उल्लिखित तथ्यों को खारिज कर दिया गया।
संवाद