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Sirmour News: 243 साल पुराने स्कूल के दरवाजे खुले तो दाखिले के लिए पहुंचने लगी बेटियां
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शमशेर स्कूल नाहन में 11वीं कक्षा में दाखिला लेने वाली पहली छात्रा के साथ स्कूल स्टॉफ। संवाद
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सचित्र--
स्कूल के नाम से हटा छात्र.., धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है दाखिला प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिले की सबसे पुरानी शमशेर राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नाहन में सोमवार को 11वीं कक्षा में पहली छात्रा ने दाखिला लिया। दाखिले के लिए स्कूल पहुंची छात्रा वंशिका ठाकुर का स्कूल प्रबंधन ने जोरदार स्वागत किया। इससे पूर्व छठी कक्षा में भी आराधना नाम की लड़की ने दाखिला लिया था।
बता दें कि 243 साल पुरानी इस पाठशाला में एक अप्रैल 2026 से सह-शिक्षा (को-एजुकेशन) शुरू हुई है। सन् 1783 में खुले इस स्कूल के नाम से छात्र शब्द भी हटा दिया गया है। अब तक यहां केवल छात्रों को ही प्रवेश मिलता था। इस शिक्षा सत्र से लड़कियों के लिए भी इस स्कूल के दरवाजे खोल दिए गए हैं।
इससे पूर्व तीन दिन पहले छठी कक्षा में भी आराधना नाम की लड़की ने दाखिला लिया था। हालांकि 90 के दशक तक इस स्कूल में विज्ञान और कॉमर्स संकाय की जमा एक व जमा दो की कक्षाएं संचालित होती थीं, जिनमें छात्राओं को भी प्रवेश दिया जाता था, क्योंकि उस समय कन्या स्कूल में ये संकाय उपलब्ध नहीं थे। बाद में जब कन्या स्कूल में इन कक्षाओं की शुरुआत हो गई, तो यहां छात्राओं के दाखिले बंद कर दिए गए थे।
अब एक बार फिर से यहां लड़कियों को प्रवेश मिलना शुरू हो गया है। हालांकि स्कूल में दाखिला प्रक्रिया अभी सुस्त गति से चल रही है। अब तक स्कूल में करीब 65 बच्चों ने दाखिला लिया है।
इसकी मुख्य वजह यह है कि शिक्षा सत्र खत्म होने के बाद विद्यार्थी पहाड़ी क्षेत्रों में बने अपने घर चले जाते हैं, जो 15 अप्रैल तक वापस आकर दाखिला प्रक्रिया को पूरी करते हैं। कार्यवाहक प्रधानाचार्य रजनी शर्मा ने बताया कि स्कूल में लड़कियां भी दाखिले के लिए आ रही हैं। इस बार विद्यार्थियों की संख्या 550 से 600 के बीच पहुंचने की उम्मीद है।
-- -- संवाद
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स्कूल के नाम से हटा छात्र.., धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है दाखिला प्रक्रिया
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जिले की सबसे पुरानी शमशेर राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नाहन में सोमवार को 11वीं कक्षा में पहली छात्रा ने दाखिला लिया। दाखिले के लिए स्कूल पहुंची छात्रा वंशिका ठाकुर का स्कूल प्रबंधन ने जोरदार स्वागत किया। इससे पूर्व छठी कक्षा में भी आराधना नाम की लड़की ने दाखिला लिया था।
बता दें कि 243 साल पुरानी इस पाठशाला में एक अप्रैल 2026 से सह-शिक्षा (को-एजुकेशन) शुरू हुई है। सन् 1783 में खुले इस स्कूल के नाम से छात्र शब्द भी हटा दिया गया है। अब तक यहां केवल छात्रों को ही प्रवेश मिलता था। इस शिक्षा सत्र से लड़कियों के लिए भी इस स्कूल के दरवाजे खोल दिए गए हैं।
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इससे पूर्व तीन दिन पहले छठी कक्षा में भी आराधना नाम की लड़की ने दाखिला लिया था। हालांकि 90 के दशक तक इस स्कूल में विज्ञान और कॉमर्स संकाय की जमा एक व जमा दो की कक्षाएं संचालित होती थीं, जिनमें छात्राओं को भी प्रवेश दिया जाता था, क्योंकि उस समय कन्या स्कूल में ये संकाय उपलब्ध नहीं थे। बाद में जब कन्या स्कूल में इन कक्षाओं की शुरुआत हो गई, तो यहां छात्राओं के दाखिले बंद कर दिए गए थे।
अब एक बार फिर से यहां लड़कियों को प्रवेश मिलना शुरू हो गया है। हालांकि स्कूल में दाखिला प्रक्रिया अभी सुस्त गति से चल रही है। अब तक स्कूल में करीब 65 बच्चों ने दाखिला लिया है।
इसकी मुख्य वजह यह है कि शिक्षा सत्र खत्म होने के बाद विद्यार्थी पहाड़ी क्षेत्रों में बने अपने घर चले जाते हैं, जो 15 अप्रैल तक वापस आकर दाखिला प्रक्रिया को पूरी करते हैं। कार्यवाहक प्रधानाचार्य रजनी शर्मा ने बताया कि स्कूल में लड़कियां भी दाखिले के लिए आ रही हैं। इस बार विद्यार्थियों की संख्या 550 से 600 के बीच पहुंचने की उम्मीद है।