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Sirmour News: मध्य प्रदेश के हरसूद में दिखी सिरमौर की हाटी संस्कृति की झलक
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मध्य प्रदेश के हरसूद में आदिरंग महोत्सव में प्रस्तुति देते आसरा संस्था के कलाकार। स्रोत : संस्थ
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-आसरा संस्था के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां देकर बांधा समा
-तीन दिवसीय आदिरंग महोत्सव में देश के 25 दल हुए शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की हाटी संस्कृति की झलक मध्यप्रदेश के हरसूद में आयोजित तीन दिवसीय आदिरंग महोत्सव में देखने को मिली। आसरा संस्था के लोक कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उपस्थित लोगों और कलाकारों का मनोरंजन किया।
आसरा संस्था के प्रभारी डॉ. जोगेंद्र हाब्बी ने बताया कि लोक कलाकारों ने हाटी की नाटी के अंतर्गत ठोडा नृत्य, रिहाल्टी गी, दीपक एवं परात नृत्य और रासा नृत्य जैसी विविध लोक विधाओं की सशक्त प्रस्तुति देकर सिरमौरी लोकजीवन की लय, सौंदर्य और परंपरा का जीवंत दर्शन कराया। इस महोत्सव में देशभर के पच्चीस से अधिक सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया। इन विविध प्रस्तुतियों के मध्य हाटी की नाटी अपनी विशिष्टता और सौंदर्य के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही।
पद्मश्री विद्यानंद सरैक एवं डॉ. जोगेंद्र हाब्बी के कुशल निर्देशन में इन कलाकारों ने हाटी की नाटी के अतिरिक्त सिंहटू नृत्य, भड़ाल्टू नृत्य और डगैली नाच जैसी विलुप्तप्राय लोक विधाओं पर लंबे समय तक शोध कर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिष्ठित किया है। इससे ये विधाएं पुनः जनमानस का आकर्षण बन रही हैं।
महोत्सव में आसरा संस्था के कलाकारों में गोपाल सिंह हाब्बी, लोक गायक रामलाल वर्मा एवं बिमला चौहान, बांसुरी वादक देवीराम, ढोलक वादक संदीप, करनाल एवं रणसिंगा वादक रविदत्त और लोक नर्तकों में गोपाल हाब्बी, चमन, मनमोहन, दिनेश, सरोज, अनु, आरती, रेखा, प्रिया आदि प्रतिभाशाली कलाकारों ने सहभागिता देकर अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। संवाद
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-तीन दिवसीय आदिरंग महोत्सव में देश के 25 दल हुए शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की हाटी संस्कृति की झलक मध्यप्रदेश के हरसूद में आयोजित तीन दिवसीय आदिरंग महोत्सव में देखने को मिली। आसरा संस्था के लोक कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में उपस्थित लोगों और कलाकारों का मनोरंजन किया।
आसरा संस्था के प्रभारी डॉ. जोगेंद्र हाब्बी ने बताया कि लोक कलाकारों ने हाटी की नाटी के अंतर्गत ठोडा नृत्य, रिहाल्टी गी, दीपक एवं परात नृत्य और रासा नृत्य जैसी विविध लोक विधाओं की सशक्त प्रस्तुति देकर सिरमौरी लोकजीवन की लय, सौंदर्य और परंपरा का जीवंत दर्शन कराया। इस महोत्सव में देशभर के पच्चीस से अधिक सांस्कृतिक दलों ने भाग लिया। इन विविध प्रस्तुतियों के मध्य हाटी की नाटी अपनी विशिष्टता और सौंदर्य के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही।
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पद्मश्री विद्यानंद सरैक एवं डॉ. जोगेंद्र हाब्बी के कुशल निर्देशन में इन कलाकारों ने हाटी की नाटी के अतिरिक्त सिंहटू नृत्य, भड़ाल्टू नृत्य और डगैली नाच जैसी विलुप्तप्राय लोक विधाओं पर लंबे समय तक शोध कर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिष्ठित किया है। इससे ये विधाएं पुनः जनमानस का आकर्षण बन रही हैं।
महोत्सव में आसरा संस्था के कलाकारों में गोपाल सिंह हाब्बी, लोक गायक रामलाल वर्मा एवं बिमला चौहान, बांसुरी वादक देवीराम, ढोलक वादक संदीप, करनाल एवं रणसिंगा वादक रविदत्त और लोक नर्तकों में गोपाल हाब्बी, चमन, मनमोहन, दिनेश, सरोज, अनु, आरती, रेखा, प्रिया आदि प्रतिभाशाली कलाकारों ने सहभागिता देकर अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। संवाद