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हिमाचल: 200 साल पुरानी नेवदा रस्म बंद, महासू मंदिर में ली शपथ, दहेज के लेनदेन पर भी रहेगा पूर्ण प्रतिबंध
संवाद न्यूज एजेंसी, कफोटा/शिलाई (सिरमौर)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 30 Mar 2026 12:40 PM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में गवाली पंचायत के पशमी और घासन गांव के ग्रामीणों ने 200 साल पुरानी नेवदा रस्म बंद कर दिया है। पहले गिरिपार क्षेत्र में शादियां पारंपरिक रूप से एक सप्ताह तक चलती थीं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। पढ़ें पूरी खबर...
सिरमौर में 200 साल पुरानी नेवदा रस्म बंद।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले का ट्रांसगिरी (गिरिपार) क्षेत्र अब आधुनिकता की राह पर है। दशकों पुरानी खर्चीली रस्मों को त्याग कर समाज नई मिसाल पेश कर रहा है। ताजा मामले में गवाली पंचायत के पशमी और घासन गांव के ग्रामीणों ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 200 साल पुरानी नेवदा रस्म को पूरी तरह बंद कर दिया है।
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रविवार को ढिमेदार बारू राम चौहान के नेतृत्व में महासू मंदिर में एकत्रित हुए ग्रामीणों ने इस फैसले पर मुहर लगाई और अपने आराध्य देव की कसम खाकर इसे लागू करने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि जो भी परिवार इस सामाजिक फैसले का उल्लंघन करेगा, उसका हुक्का-पानी बंद कर दिया जाएगा। उल्लंघन करने वाले पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा।
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पूरे गांव में मुनादी करवाकर लोगों को इस नए नियम से अवगत करा दिया गया है। पहले गिरिपार क्षेत्र में शादियां पारंपरिक रूप से एक सप्ताह तक चलती थीं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। अब यह समारोह केवल एक दिन के रिसेप्शन तक सीमित रहेगा। पहले शादी में 5 रुपये का नेवदा सुनिश्चित था, जिसे बंद कर अब शगुन की व्यवस्था शुरू की गई है।
अब बारात में केवल 10 गाडि़यां और अधिकतम 50 बराती ही शामिल हो सकेंगे। अब शादी में सोने-चांदी के गहनों का प्रदर्शन कम होगा और दहेज के लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। शादी से पहले लकड़ी काटने की धाम को बंद कर दिया गया है। रोटियारी और कामगारों को दिया जाने वाला अलग से बकरा भोज भी अब नहीं होगा। हालांकि, मामा के स्वागत में बकरे का भोज पूर्ववत जारी रहेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ती महंगाई के कारण पुरानी रस्मों को निभाना कठिन हो रहा था। पशमी गांव से पहले कांडो च्योग पंचायत ने भी इस दिशा में पहल की थी। इस बैठक में ढिमेदार बारू राम चौहान, खजान सिंह चौहान, नरेंद्र चौहान, प्रकाश चौहान और नरेश चौहान सहित क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
अब बारात में केवल 10 गाडि़यां और अधिकतम 50 बराती ही शामिल हो सकेंगे। अब शादी में सोने-चांदी के गहनों का प्रदर्शन कम होगा और दहेज के लेन-देन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। शादी से पहले लकड़ी काटने की धाम को बंद कर दिया गया है। रोटियारी और कामगारों को दिया जाने वाला अलग से बकरा भोज भी अब नहीं होगा। हालांकि, मामा के स्वागत में बकरे का भोज पूर्ववत जारी रहेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ती महंगाई के कारण पुरानी रस्मों को निभाना कठिन हो रहा था। पशमी गांव से पहले कांडो च्योग पंचायत ने भी इस दिशा में पहल की थी। इस बैठक में ढिमेदार बारू राम चौहान, खजान सिंह चौहान, नरेंद्र चौहान, प्रकाश चौहान और नरेश चौहान सहित क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।