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Sirmour News: महिला वार्ड की मरम्मत का कार्य धीमा, मरीज हो रहे परेशान
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मेडिकल कॉलेज की महिला सर्जिकल वार्ड का अधूरा पड़ा कार्य। संवाद
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ग्राउंड रिपोर्ट
-पुरुष वार्ड में ही भर्ती की जा रहीं महिलाएं भी, स्टाफ की भी बढ़ी परेशानी
-निर्माण कार्य के चलते जगह-जगह बिखरा पड़ा है सामान, आवागमन प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में महिला सर्जिकल वार्ड की मरम्मत का कार्य धीमी गति से चलने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। महिला मरीजों को पुरुष सर्जिकल वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है। इससे एक ओर जहां मरीजों की गोपनीयता प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
36 बिस्तरों की क्षमता वाले पुरुष सर्जिकल वार्ड में क्षमता से अधिक मरीजों का उपचार किया जा रहा है। एक ही वार्ड में पुरुष और महिला मरीजों के भर्ती होने से अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन में करीब 2.50 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत फीमेल सर्जिकल वार्ड, स्टोर और ओपीडी क्षेत्रों में सफेदी, बिजली फिटिंग, छत की सीलिंग सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं।
पहले यह कार्य ऑक्सीजन पाइप शिफ्टिंग के चलते बीच में रुका था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने दोबारा काम शुरू कर दिया है, लेकिन रफ्तार काफी धीमी है। विभाग इसका कारण विद्युत उपकरण समय पर शिफ्ट न होना बता रहा है। उधर, अस्पताल परिसर में चल रहे निर्माण कार्य के चलते जगह-जगह भवन सामग्री बिखरी पड़ी है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दवाइयों के भंडार और उससे जुड़े स्थानों पर भी असर पड़ रहा है और व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज नाहन में रोजाना 1000 से 1200 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि सर्जिकल ओपीडी में 120 से 150 मरीजों की जांच हो रही है। जिले के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच स्वास्थ्य सेवाएं देना चुनौती बनता जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता आलोक जनवेजा ने बताया कि भवन का मरम्मत कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि उपकरणों के शिफ्ट न होने के चलते कई बार कार्य प्रभावित रहता है। जल्द ही इसे पूरा करवा लिया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेणु चौहान ने बताया कि जगह की कमी के चलते विद्युत उपकरण व अन्य स्थानों को शिफ्ट करने में परेशानी रहती है। सामान को शिफ्ट और भंडारण करने में काफी सतर्कता बरतनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि एक-दूसरी जगह शिफ्ट कर कार्य के लिए जगह बनाई जा रही है। संवाद
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-पुरुष वार्ड में ही भर्ती की जा रहीं महिलाएं भी, स्टाफ की भी बढ़ी परेशानी
-निर्माण कार्य के चलते जगह-जगह बिखरा पड़ा है सामान, आवागमन प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में महिला सर्जिकल वार्ड की मरम्मत का कार्य धीमी गति से चलने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। महिला मरीजों को पुरुष सर्जिकल वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है। इससे एक ओर जहां मरीजों की गोपनीयता प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
36 बिस्तरों की क्षमता वाले पुरुष सर्जिकल वार्ड में क्षमता से अधिक मरीजों का उपचार किया जा रहा है। एक ही वार्ड में पुरुष और महिला मरीजों के भर्ती होने से अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन में करीब 2.50 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत फीमेल सर्जिकल वार्ड, स्टोर और ओपीडी क्षेत्रों में सफेदी, बिजली फिटिंग, छत की सीलिंग सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं।
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पहले यह कार्य ऑक्सीजन पाइप शिफ्टिंग के चलते बीच में रुका था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने दोबारा काम शुरू कर दिया है, लेकिन रफ्तार काफी धीमी है। विभाग इसका कारण विद्युत उपकरण समय पर शिफ्ट न होना बता रहा है। उधर, अस्पताल परिसर में चल रहे निर्माण कार्य के चलते जगह-जगह भवन सामग्री बिखरी पड़ी है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दवाइयों के भंडार और उससे जुड़े स्थानों पर भी असर पड़ रहा है और व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज नाहन में रोजाना 1000 से 1200 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि सर्जिकल ओपीडी में 120 से 150 मरीजों की जांच हो रही है। जिले के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच स्वास्थ्य सेवाएं देना चुनौती बनता जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता आलोक जनवेजा ने बताया कि भवन का मरम्मत कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि उपकरणों के शिफ्ट न होने के चलते कई बार कार्य प्रभावित रहता है। जल्द ही इसे पूरा करवा लिया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेणु चौहान ने बताया कि जगह की कमी के चलते विद्युत उपकरण व अन्य स्थानों को शिफ्ट करने में परेशानी रहती है। सामान को शिफ्ट और भंडारण करने में काफी सतर्कता बरतनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि एक-दूसरी जगह शिफ्ट कर कार्य के लिए जगह बनाई जा रही है। संवाद

मेडिकल कॉलेज की महिला सर्जिकल वार्ड का अधूरा पड़ा कार्य। संवाद