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Sirmour News: ईद का दिन, आपसी प्रेम और समानता का पढ़ाता है पाठ
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कैप्टन सलीम अहम। संवाद
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ईद उल फितर.., पर्व विशेष
सचित्र-- फोटो सहित आज ही प्रकाशित करें
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। ईद उल फितर मुस्लिम भाईचारे के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। फितर का अर्थ है व्रत खोलना या पूरा करना है। यह त्योहार प्रेम और भाईचारे का भी प्रतीक है। ईद का दिन आपसी प्रेम और समानता का पाठ पढ़ाता है।
ईद-उल-फितर, जिसे अक्सर ईद या मीठी ईद कहा जाता है, इस्लामी कैलेंडर में सबसे जरूरी त्योहारों में से एक है। यह पर्व पवित्र महीने रमजान के अंत का प्रतीक है। चांद नजर आने पर सोमवार को पूरी दुनिया समेत जिला सिरमौर में भी यह पर्व धूूमधाम से मनाया जाएगा।
जानकारी के अनुसार रमजान खत्म होने के बाद चांद नजर आने के अगले दिन ईद का त्योहार मनाया जाता है। ईद-उल-फितर की शुरुआत पैगंबर मुहम्मद ने मक्का छोड़ने के बाद मदीना में की थी। पहली बार ईद-उल-फितर 624 ई. में मनाई गई थी, जो इस्लामी इतिहास में पहले रमजान के अंत का प्रतीक थी। इस त्योहार ने दो बुतपरस्त त्योहारों की जगह ली, जो इस्लाम के आगमन से पहले मदीना में मनाए जाते थे।
-- -बाक्स
1. मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के जिला प्रधान कैप्टन सलीम अहमद ने कहा कि ईद की नमाज से पहले गरीबों को जकात-उल-फितर देना दान का एक अनिवार्य काम है। इस दिन सभी जरूरतमंद लोगों की मदद की जाती है ताकि वह भी अपने घर खुशी से ईद मना सकें।
2. मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश उपाध्यक्ष शकील अहमद शेख ने कहा कि इस दिन नए वस्त्र पहनने, मीठी सैवइयां बनाने और उपहार देने की परंपरा है। यह त्योहार प्रेम और समानता का पाठ पढ़ाता है।
-- -संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। ईद उल फितर मुस्लिम भाईचारे के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। फितर का अर्थ है व्रत खोलना या पूरा करना है। यह त्योहार प्रेम और भाईचारे का भी प्रतीक है। ईद का दिन आपसी प्रेम और समानता का पाठ पढ़ाता है।
ईद-उल-फितर, जिसे अक्सर ईद या मीठी ईद कहा जाता है, इस्लामी कैलेंडर में सबसे जरूरी त्योहारों में से एक है। यह पर्व पवित्र महीने रमजान के अंत का प्रतीक है। चांद नजर आने पर सोमवार को पूरी दुनिया समेत जिला सिरमौर में भी यह पर्व धूूमधाम से मनाया जाएगा।
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जानकारी के अनुसार रमजान खत्म होने के बाद चांद नजर आने के अगले दिन ईद का त्योहार मनाया जाता है। ईद-उल-फितर की शुरुआत पैगंबर मुहम्मद ने मक्का छोड़ने के बाद मदीना में की थी। पहली बार ईद-उल-फितर 624 ई. में मनाई गई थी, जो इस्लामी इतिहास में पहले रमजान के अंत का प्रतीक थी। इस त्योहार ने दो बुतपरस्त त्योहारों की जगह ली, जो इस्लाम के आगमन से पहले मदीना में मनाए जाते थे।
1. मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के जिला प्रधान कैप्टन सलीम अहमद ने कहा कि ईद की नमाज से पहले गरीबों को जकात-उल-फितर देना दान का एक अनिवार्य काम है। इस दिन सभी जरूरतमंद लोगों की मदद की जाती है ताकि वह भी अपने घर खुशी से ईद मना सकें।
2. मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश उपाध्यक्ष शकील अहमद शेख ने कहा कि इस दिन नए वस्त्र पहनने, मीठी सैवइयां बनाने और उपहार देने की परंपरा है। यह त्योहार प्रेम और समानता का पाठ पढ़ाता है।

कैप्टन सलीम अहम। संवाद

कैप्टन सलीम अहम। संवाद