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Sirmour News: 1.20 लाख के चेक बाउंस मामले में दोषी को भुगतनी होगी सजा
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वर्ष 2020 में आरोपी ने एक परिचित से व्यवसाय के लिए लिया था 4.20 लाख का ऋण
भुगतान के लिए दिया चेक हो गया था बाउंस,
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 1.20 लाख के चेक बाउंस के मामले में दोषी जगपाल सिंह की आपराधिक अपील खारिज कर दी। न्यायाधीश कपिल शर्मा ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सुनाए गए दोषसिद्धि एवं सजा के आदेश को सही ठहराते हुए बरकरार रखा। ट्रायल कोर्ट ने 27 सितंबर 2024 को दोषी को एक साल की कैद और पीड़ित पक्ष को 1.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
शिकायतकर्ता मोहन लाल ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2020 में आरोपी ने व्यवसाय के लिए 4.20 लाख का ऋण लिया था। भुगतान की गारंटी के तौर पर आरोपी ने दो पोस्ट-डेटेड चेक दिए। इनमें 1.20 लाख का एक चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया।
अपील में आरोपी ने तर्क दिया कि उसका शिकायतकर्ता से कोई वैध लेन-देन नहीं था तथा चेक शिकायतकर्ता के पिता को दिया गया था। साथ ही उसने दावा किया कि शिकायत समय-सीमा के भीतर दायर नहीं की गई। अदालत ने इन सभी दलीलों को साक्ष्यों के आधार पर अस्वीकार कर दिया। परिणामस्वरूप अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट की पूर्व में सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को यथावत रखते हुए अपील खारिज कर दी।
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भुगतान के लिए दिया चेक हो गया था बाउंस,
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 1.20 लाख के चेक बाउंस के मामले में दोषी जगपाल सिंह की आपराधिक अपील खारिज कर दी। न्यायाधीश कपिल शर्मा ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सुनाए गए दोषसिद्धि एवं सजा के आदेश को सही ठहराते हुए बरकरार रखा। ट्रायल कोर्ट ने 27 सितंबर 2024 को दोषी को एक साल की कैद और पीड़ित पक्ष को 1.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
शिकायतकर्ता मोहन लाल ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2020 में आरोपी ने व्यवसाय के लिए 4.20 लाख का ऋण लिया था। भुगतान की गारंटी के तौर पर आरोपी ने दो पोस्ट-डेटेड चेक दिए। इनमें 1.20 लाख का एक चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपी ने भुगतान नहीं किया।
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अपील में आरोपी ने तर्क दिया कि उसका शिकायतकर्ता से कोई वैध लेन-देन नहीं था तथा चेक शिकायतकर्ता के पिता को दिया गया था। साथ ही उसने दावा किया कि शिकायत समय-सीमा के भीतर दायर नहीं की गई। अदालत ने इन सभी दलीलों को साक्ष्यों के आधार पर अस्वीकार कर दिया। परिणामस्वरूप अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट की पूर्व में सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को यथावत रखते हुए अपील खारिज कर दी।
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