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Sirmour News: सिरमौर जिले में बारिश से नकदी फसलों को मिली संजीवनी
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जिला की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार पर हिमपात। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
सराहां/रोनहाट/पांवटा/सतौन(सिरमौर)। क्षेत्र में लंबे समय से पड़ रहे सूखे के बाद हुई व्यापक वर्षा ने किसानों और बागवानों के मुरझाए चेहरों पर रौनक लौटा दी है। पिछले दो महीनों से बारिश न होने के कारण पच्छाद समेत अन्य क्षेत्र की अधिकतर फसलें सूखने की कगार पर थीं, लेकिन इस वर्षा ने नकदी फसलों और फलों के बगीचों के लिए संजीवनी का काम किया है। यही नहीं, क्षेत्र में बारिश के बाद पारा लुढ़कने से गर्मी से भी लोगों को निजात मिली है। लोगों ने फिर से गर्म वस्त्र निकाल लिए हैं।
बारिश से क्षेत्र में लगाई गई लहसुन, मटर, गोभी, तोड़िया और गेहूं की फसल को भारी लाभ पहुंचा है। इसके अलावा प्याज की खेती कर रहे किसानों ने भी राहत की सांस ली है। किसान भूपेंद्र सिंह भंडारी, राजेश कुमार, नरेश कुमार और भीम सिंह ने बताया कि बारिश न होने से फसलें बर्बाद हो रही थीं, लेकिन अब पैदावार अच्छी होने की उम्मीद जगी है।
खेती के साथ-साथ बागवानी क्षेत्र में सेब, अनार, आड़ू, प्लम और खुमानी की फसल को भी इस वर्षा से काफी फायदा हुआ है। बारिश केवल फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि पेयजल आपूर्ति के लिए भी राहत लेकर आई है। क्षेत्र की उठाऊ और गिरावटी पेयजल योजनाओं के जल स्रोतों का स्तर गिरना शुरू हो गया था, जो अब इस बारिश के बाद फिर से रिचार्ज होंगे।
कृषि विषयवाद विशेषज्ञ एचएल आजाद ने बताया कि यह वर्षा फसलों और बगीचों के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद फसलों में लगने वाली विभिन्न बीमारियों और कीटों का प्रकोप भी कम होगा, जिससे किसानों को कीटनाशकों पर कम खर्च करना पड़ेगा।
-- -- संवाद
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सराहां/रोनहाट/पांवटा/सतौन(सिरमौर)। क्षेत्र में लंबे समय से पड़ रहे सूखे के बाद हुई व्यापक वर्षा ने किसानों और बागवानों के मुरझाए चेहरों पर रौनक लौटा दी है। पिछले दो महीनों से बारिश न होने के कारण पच्छाद समेत अन्य क्षेत्र की अधिकतर फसलें सूखने की कगार पर थीं, लेकिन इस वर्षा ने नकदी फसलों और फलों के बगीचों के लिए संजीवनी का काम किया है। यही नहीं, क्षेत्र में बारिश के बाद पारा लुढ़कने से गर्मी से भी लोगों को निजात मिली है। लोगों ने फिर से गर्म वस्त्र निकाल लिए हैं।
बारिश से क्षेत्र में लगाई गई लहसुन, मटर, गोभी, तोड़िया और गेहूं की फसल को भारी लाभ पहुंचा है। इसके अलावा प्याज की खेती कर रहे किसानों ने भी राहत की सांस ली है। किसान भूपेंद्र सिंह भंडारी, राजेश कुमार, नरेश कुमार और भीम सिंह ने बताया कि बारिश न होने से फसलें बर्बाद हो रही थीं, लेकिन अब पैदावार अच्छी होने की उम्मीद जगी है।
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खेती के साथ-साथ बागवानी क्षेत्र में सेब, अनार, आड़ू, प्लम और खुमानी की फसल को भी इस वर्षा से काफी फायदा हुआ है। बारिश केवल फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि पेयजल आपूर्ति के लिए भी राहत लेकर आई है। क्षेत्र की उठाऊ और गिरावटी पेयजल योजनाओं के जल स्रोतों का स्तर गिरना शुरू हो गया था, जो अब इस बारिश के बाद फिर से रिचार्ज होंगे।
कृषि विषयवाद विशेषज्ञ एचएल आजाद ने बताया कि यह वर्षा फसलों और बगीचों के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद फसलों में लगने वाली विभिन्न बीमारियों और कीटों का प्रकोप भी कम होगा, जिससे किसानों को कीटनाशकों पर कम खर्च करना पड़ेगा।