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Sirmour News: मोगीनंद में शिक्षकों की कमी, 39 में से 19 बच्चों ने छोड़ा स्कूल
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संजय गुप्ता
कालाअंब (सिरमौर)। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मोगीनंद में विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में 11वीं और 12वीं के नॉन-मेडिकल और मेडिकल संकाय में 20 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि 19 विद्यार्थी स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूलों में दाखिला ले चुके हैं। भौतिक शास्त्र और रसायन शास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ताओं की कमी को विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
भौतिक शास्त्र के प्रवक्ता का पद लंबे समय से खाली है, जबकि रसायन शास्त्र के प्रवक्ता का पद भी करीब एक वर्ष से रिक्त है। ऐसे में विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। विद्यालय में प्रवक्ताओं के चार पद रिक्त हैं। इनमें भौतिक शास्त्र का प्रवक्ता पद मई 2026 से, रसायन शास्त्र का मई 2025 से, समाजशास्त्र का 31 मार्च 2026 से और आईपी (इंफॉर्मेटिक्स प्रैक्टिसेज) का प्रवक्ता पद वर्ष 2024 से खाली है।
विज्ञान में विद्यार्थियों के दाखिले और स्कूल छोड़ने की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। 12वीं में विज्ञान संकाय में दाखिला लेने वाले करीब 14 विद्यार्थियों में से नौ विद्यार्थी भौतिक शास्त्र और रसायन शास्त्र के प्रवक्ता पद रिक्त होने के कारण अन्य स्कूलों में चले गए। 11वीं में विज्ञान संकाय में करीब 25 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। इनमें से 10 विद्यार्थी स्कूल छोड़ चुके हैं।
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विज्ञान संकाय में 11वीं और 12वीं को मिलाकर 20 विद्यार्थी ही रह गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण कई विद्यार्थी स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीण जयपाल कुमार ने कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में आवश्यक विषयों के शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे तो अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए कैसे प्रेरित होंगे। उन्होंने सरकार से रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की है।
प्रधानाचार्य डॉ. शिभा खन्ना ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण विज्ञान संकाय के कई विद्यार्थियों ने दूसरे स्कूलों में दाखिला लिया है। स्कूल में चार पद रिक्त चल रहे हैं। इन पदों की सूची समय-समय पर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
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कालाअंब (सिरमौर)। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मोगीनंद में विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय में 11वीं और 12वीं के नॉन-मेडिकल और मेडिकल संकाय में 20 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि 19 विद्यार्थी स्कूल छोड़कर दूसरे स्कूलों में दाखिला ले चुके हैं। भौतिक शास्त्र और रसायन शास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ताओं की कमी को विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
भौतिक शास्त्र के प्रवक्ता का पद लंबे समय से खाली है, जबकि रसायन शास्त्र के प्रवक्ता का पद भी करीब एक वर्ष से रिक्त है। ऐसे में विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। विद्यालय में प्रवक्ताओं के चार पद रिक्त हैं। इनमें भौतिक शास्त्र का प्रवक्ता पद मई 2026 से, रसायन शास्त्र का मई 2025 से, समाजशास्त्र का 31 मार्च 2026 से और आईपी (इंफॉर्मेटिक्स प्रैक्टिसेज) का प्रवक्ता पद वर्ष 2024 से खाली है।
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विज्ञान में विद्यार्थियों के दाखिले और स्कूल छोड़ने की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। 12वीं में विज्ञान संकाय में दाखिला लेने वाले करीब 14 विद्यार्थियों में से नौ विद्यार्थी भौतिक शास्त्र और रसायन शास्त्र के प्रवक्ता पद रिक्त होने के कारण अन्य स्कूलों में चले गए। 11वीं में विज्ञान संकाय में करीब 25 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। इनमें से 10 विद्यार्थी स्कूल छोड़ चुके हैं।
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विज्ञान संकाय में 11वीं और 12वीं को मिलाकर 20 विद्यार्थी ही रह गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण कई विद्यार्थी स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीण जयपाल कुमार ने कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में आवश्यक विषयों के शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे तो अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए कैसे प्रेरित होंगे। उन्होंने सरकार से रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की है।
प्रधानाचार्य डॉ. शिभा खन्ना ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण विज्ञान संकाय के कई विद्यार्थियों ने दूसरे स्कूलों में दाखिला लिया है। स्कूल में चार पद रिक्त चल रहे हैं। इन पदों की सूची समय-समय पर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।