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मेडिकल कॉलेज का हॉल : अल्ट्रासाउंड के लिए हो रहा लंबा इंतजार
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मेडिकल कॉलेज में स्थापित अल्ट्रासाउंड पंजीकरण केंद्र। संवाद
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-अस्पताल में केवल आपातकालीन और भर्ती मरीजों को मिल रही सुविधा
-स्टाफ की कमी बनी परेशानी, स्वीकृत सात में पांच पद चल रहे रिक्त
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में अल्ट्रासाउंड सेवाएं विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण प्रभावित हो गई हैं। स्थिति यह है कि सामान्य मरीजों को समय पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में फिलहाल केवल आपातकालीन और भर्ती मरीजों के अल्ट्रासाउंड को प्राथमिकता दी जा रही है। अन्य मरीजों को लंबे इंतजार के बाद भी जांच नहीं मिल रही। मजबूरन उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां महंगे दाम चुकाकर जांच करवानी पड़ रही है।
अस्पताल में रेडियोलॉजी विभाग के सात स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से पांच पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। एसोसिएट प्रोफेसर का एक पद और सीनियर रेजिडेंट के सभी चार पद खाली हैं। वर्तमान में विभाग की पूरी जिम्मेदारी केवल एक प्रोफेसर और एक असिस्टेंट प्रोफेसर के कंधों पर है। यही दोनों चिकित्सक भर्ती मरीजों, आपातकालीन सेवाओं, रात्रि ड्यूटी, कोर्ट संबंधी मामलों तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों का दायित्व भी संभाल रहे हैं।
स्थिति और गंभीर इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि विभाग में कार्यरत प्रोफेसर भी जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं। यदि समय रहते रिक्त पद नहीं भरे गए तो अल्ट्रासाउंड सेवाएं और अधिक प्रभावित हो सकती हैं। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब 1200 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें मेडिसिन और स्त्री एवं प्रसूति रोग (गायनी) विभाग में बड़ी संख्या में मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच की आवश्यकता होती है। चिकित्सक जांच के लिए लिख रहे हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण सामान्य मरीजों को समय पर जांच नहीं मिल पा रही। ऐसे में कई मरीज निजी केंद्रों में हजारों रुपये खर्च करने को विवश हैं।
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अस्पताल प्रबंधन की ओर से कई बार सरकार और स्वास्थ्य विभाग को रिक्त पदों के बारे में अवगत कराया जा चुका है। बावजूद इसके अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड जैसी आवश्यक जांच समय पर नहीं होने से उन्हें आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य संगीता ढिल्लों ने बताया कि रेडियोलॉजी विभाग में रिक्त पदों की सूची हाल ही में सरकार को भेजी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इन पदों पर नियुक्तियां होने से अल्ट्रासाउंड सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगी। संवाद
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-स्टाफ की कमी बनी परेशानी, स्वीकृत सात में पांच पद चल रहे रिक्त
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में अल्ट्रासाउंड सेवाएं विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण प्रभावित हो गई हैं। स्थिति यह है कि सामान्य मरीजों को समय पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में फिलहाल केवल आपातकालीन और भर्ती मरीजों के अल्ट्रासाउंड को प्राथमिकता दी जा रही है। अन्य मरीजों को लंबे इंतजार के बाद भी जांच नहीं मिल रही। मजबूरन उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां महंगे दाम चुकाकर जांच करवानी पड़ रही है।
अस्पताल में रेडियोलॉजी विभाग के सात स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से पांच पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। एसोसिएट प्रोफेसर का एक पद और सीनियर रेजिडेंट के सभी चार पद खाली हैं। वर्तमान में विभाग की पूरी जिम्मेदारी केवल एक प्रोफेसर और एक असिस्टेंट प्रोफेसर के कंधों पर है। यही दोनों चिकित्सक भर्ती मरीजों, आपातकालीन सेवाओं, रात्रि ड्यूटी, कोर्ट संबंधी मामलों तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों का दायित्व भी संभाल रहे हैं।
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स्थिति और गंभीर इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि विभाग में कार्यरत प्रोफेसर भी जल्द सेवानिवृत्त होने वाले हैं। यदि समय रहते रिक्त पद नहीं भरे गए तो अल्ट्रासाउंड सेवाएं और अधिक प्रभावित हो सकती हैं। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब 1200 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें मेडिसिन और स्त्री एवं प्रसूति रोग (गायनी) विभाग में बड़ी संख्या में मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच की आवश्यकता होती है। चिकित्सक जांच के लिए लिख रहे हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण सामान्य मरीजों को समय पर जांच नहीं मिल पा रही। ऐसे में कई मरीज निजी केंद्रों में हजारों रुपये खर्च करने को विवश हैं।
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अस्पताल प्रबंधन की ओर से कई बार सरकार और स्वास्थ्य विभाग को रिक्त पदों के बारे में अवगत कराया जा चुका है। बावजूद इसके अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड जैसी आवश्यक जांच समय पर नहीं होने से उन्हें आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य संगीता ढिल्लों ने बताया कि रेडियोलॉजी विभाग में रिक्त पदों की सूची हाल ही में सरकार को भेजी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इन पदों पर नियुक्तियां होने से अल्ट्रासाउंड सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकेंगी। संवाद