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Himachal Census 2026: मोबाइल है लेकिन घर में बिजली क्नेक्शन नहीं... स्व-गणना में सामने आए चौंकाने वाले दावे
Fri, 17 Jul 2026 10:01 AM IST
Ankesh Dogra
सोमदत्त शर्मा, सोलन।
सोमदत्त शर्मा, सोलन।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 17 Jul 2026 10:01 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में जनगणना के पहले चरण की स्व-गणना के दौरान कई लोगों ने ऑनलाइन गलत जानकारी दर्ज कर दी। कुछ परिवारों ने मोबाइल होने के बावजूद बिजली कनेक्शन नहीं होने की जानकारी दी, जबकि कुछ ने पक्के मकान के बावजूद खुले किचन का विवरण भरा। फील्ड सर्वे में इन विसंगतियों का खुलासा हुआ, जिसके बाद अधिकारी घर-घर जाकर डेटा का दोबारा सत्यापन कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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Himachal Census 2026:
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
जनगणना की स्व-गणना प्रक्रिया के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जहां लोगों ने गलत जानकारी भरकर अधिकारियों को हैरान कर दिया है। इन गलत सूचनाओं को अब दुरुस्त किया जा रहा है।
बिजली कनेक्शन का विरोधाभास: कई लोगों ने अपने घरों में मोबाइल फोन होने की जानकारी दी, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि उनके घरों में बिजली कनेक्शन नहीं है। यह विरोधाभास जांच का विषय बना हुआ है।
किचन की स्थिति: कुछ लोगों ने अपने घरों में खुले में किचन होने की जानकारी दर्ज की, जबकि मौके पर जाकर जांच करने पर पक्के मकान और सुव्यवस्थित किचन पाए गए।
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जानबूझकर या गलती: यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि ये गलत जानकारियां जानबूझकर भरी गईं या अनजाने में हुई गलतियों का परिणाम हैं। फील्ड अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गलत आंकड़े मिले हैं, जिससे जनगणना के अंतिम परिणामों की सटीकता पर सवाल उठ सकते हैं।
सुधार प्रक्रिया: इन विसंगतियों को गंभीरता से लेते हुए, अधिकारियों ने सुधार प्रक्रिया शुरू कर दी है। सुपरवाइजर और फील्ड अधिकारी अब इन जानकारियों को दोबारा सत्यापित कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दर्ज की गई सभी सूचनाएं सही और सटीक हों।
भविष्य की योजनाओं के लिए महत्व: विश्वसनीय जनगणना डेटा भविष्य की सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए, इस सुधार प्रक्रिया का उद्देश्य एक सटीक और विश्वसनीय डेटाबेस तैयार करना है।
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बिजली कनेक्शन का विरोधाभास: कई लोगों ने अपने घरों में मोबाइल फोन होने की जानकारी दी, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि उनके घरों में बिजली कनेक्शन नहीं है। यह विरोधाभास जांच का विषय बना हुआ है।
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किचन की स्थिति: कुछ लोगों ने अपने घरों में खुले में किचन होने की जानकारी दर्ज की, जबकि मौके पर जाकर जांच करने पर पक्के मकान और सुव्यवस्थित किचन पाए गए।
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जानबूझकर या गलती: यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि ये गलत जानकारियां जानबूझकर भरी गईं या अनजाने में हुई गलतियों का परिणाम हैं। फील्ड अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गलत आंकड़े मिले हैं, जिससे जनगणना के अंतिम परिणामों की सटीकता पर सवाल उठ सकते हैं।
सुधार प्रक्रिया: इन विसंगतियों को गंभीरता से लेते हुए, अधिकारियों ने सुधार प्रक्रिया शुरू कर दी है। सुपरवाइजर और फील्ड अधिकारी अब इन जानकारियों को दोबारा सत्यापित कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दर्ज की गई सभी सूचनाएं सही और सटीक हों।
भविष्य की योजनाओं के लिए महत्व: विश्वसनीय जनगणना डेटा भविष्य की सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए, इस सुधार प्रक्रिया का उद्देश्य एक सटीक और विश्वसनीय डेटाबेस तैयार करना है।
प्रगणकों का कार्य : एक जुलाई से शुरू हुई घर-घर जाकर गणना के दौरान प्रगणकों को सर्वेक्षण में कई ऐसे खुलासे हुए। 15 जुलाई तक यह घर-घर जाकर सर्वेक्षण पूरा किया गया, लेकिन अभी भी कई जगहों पर गलतियों को दुरुस्त करने का काम जारी है।
जिला जनगणना अधिकारी का बयान: सोलन के जिला जनगणना अधिकारी व संयुक्त आयुक्त नगर निगम, चेतन चौहान ने बताया कि स्व-गणना के दौरान कुछ जगहों पर लोगों ने गलत जानकारियां भर दी थीं। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो कुछ लोगों ने इसे गलती बताया। इसके अलावा भी कई जानकारियां मौके पर गलत मिलीं।
यह घटना जनगणना जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सूचनाओं की सटीकता बनाए रखने की चुनौती को उजागर करती है।
जिला जनगणना अधिकारी का बयान: सोलन के जिला जनगणना अधिकारी व संयुक्त आयुक्त नगर निगम, चेतन चौहान ने बताया कि स्व-गणना के दौरान कुछ जगहों पर लोगों ने गलत जानकारियां भर दी थीं। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो कुछ लोगों ने इसे गलती बताया। इसके अलावा भी कई जानकारियां मौके पर गलत मिलीं।
यह घटना जनगणना जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सूचनाओं की सटीकता बनाए रखने की चुनौती को उजागर करती है।