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भोजशाला: जुम्मे की नमाज के लिए मुस्लिम पक्ष को नहीं मिली जगह; हिंदू पक्ष ने कहा- 300 मीटर के बाहर मिले अनुमति

Fri, 17 Jul 2026 02:33 PM IST
धार ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार Published by: धार ब्यूरो Updated Fri, 17 Jul 2026 02:33 PM IST
सार

धार में माहौल गर्म है क्योंकि मुस्लिम पक्ष को जुम्मे  की नमाज के लिए भोजशाला परिसर के पास जगह नहीं मिली है। मुस्लिम पक्ष ने इस मसले को लेकर कलेक्टर से मुलाकात की है। वहीं, हिंदू पक्ष ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि नमाज़ की व्यवस्था भोजशाला परिसर से 300 मीटर के दायरे के बाहर की जाए। पढ़ें पूरी खबर

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Dispute escalates over the designated area for Namaz at Bhojshala;
हिंदू पक्ष ने सौंपा ज्ञापन तो मुस्लिम पक्ष ने भी कलेक्टर से मुलाकात की। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धार में माहौल गर्म है क्योंकि मुस्लिम पक्ष को जुम्मे की नमाज के लिए भोजशाला परिसर के पास जगह नहीं मिली है। पक्ष ने इस मसले को लेकर कलेक्टर से मुलाकात की है। वहीं, हिंदू पक्ष ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि नमाज की व्यवस्था भोजशाला परिसर से 300 मीटर के दायरे के बाहर की जाए।

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एतिहासिक और विवादित भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के हाल में अंतरिम आदेश दिया था। इसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रशासन को भोजशाला के समीप खुले स्थान पर नमाज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। अब हिंदू पक्ष ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। इस संबंध में हिंदू पक्ष के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।

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हिंदू पक्ष के प्रतिनिधि गोपाल शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने ही अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है। कोर्ट के रुख से साफ है कि भोजशाला में नमाज की अनुमति नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर के 'निकट' खुले स्थान पर नमाज़ की व्यवस्था करने की बात कही है।

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियमों के अनुसार, भोजशाला का 100 मीटर का क्षेत्र संरक्षित और 200 से 300 मीटर का क्षेत्र आरक्षित है। ऐसे में कुल 300 मीटर के इस पूरे परिसर के बाहर ही नमाज़ की व्यवस्था की जानी चाहिए।

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कब्रिस्तान में नमाज़ नहीं, फातिहा पढ़ी जाती है
ज्ञापन में धार्मिक मान्यताओं और नियमों का हवाला देते हुए हिंदू पक्ष ने कहा कि प्रशासन जिस नजदीकी स्थान पर नमाज़ कराने की सोच रहा है, वह वास्तव में कब्रों से घिरा हुआ है। कुरान और इस्लामिक नियमों के अनुसार भी कब्रिस्तान या कब्रों वाली जगह पर नमाज़ नहीं पढ़ी जाती, वहां केवल फातिहा पढ़ी जाती है। ऐसे में वहां नमाज़ करवाना धार्मिक दृष्टिकोण से भी उचित नहीं है।

हिंदू पक्ष ने इतिहास का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्ष 1935 में भोजशाला के पास जो नमाज़ शुरू हुई थी, उसके समाधान के रूप में वर्ष 1942 में धार के तत्कालीन राजा ने बख्तावर मार्ग पर रहमत मस्जिद बनवा दी थी। इसलिए नमाज़ के लिए उसी मस्जिद का उपयोग किया जाना चाहिए।

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हिंदू पक्ष ने कलेक्टर से मांग की है कि शहर की शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए नमाज की व्यवस्था भोजशाला के 300 मीटर के दायरे से बाहर ही करे। फिलहाल, इस ज्ञापन के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
 

 

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