भोजशाला: 'चालीसा पीर परिसर' में अदा हो सकेगी जुमे की नमाज; मुस्लिम समाज के साथ बैठक में प्रशासन ने दी जानकारी
भोजशाला के निकट नमाज को लेकर नया फैसला सामने आया है। बैठक में प्रशासन ने प्रतिनिधियों को सूचित किया है कि अब से हर शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच मालीवाड़ा स्थित 'चालीसा पीर परिसर' में जुमे की नमाज अदा की जा सकेगी। पढ़ें पूरी खबर
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विस्तार
भोजशाला से सटे खुले स्थान पर इस शुक्रवार को जुमे की नमाज अदा नहीं की जा सकी। इसके पीछे दो बड़े कारण सामने आए हैं—पहला, सुप्रीम कोर्ट का विस्तृत आदेश देर से अपलोड होना और दूसरा, आदेश के तुरंत बाद नमाज के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान का चयन न हो पाना। इस स्थिति में मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने-अपने मोहल्लों, कॉलोनियों और घरों पर ही जुमे की नमाज अदा की। इस बीच, प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में शहर काजी वकार सादिक सहित समाज के अन्य वरिष्ठ जन मौजूद रहे। प्रशासन ने प्रतिनिधियों को सूचित किया है कि अब से हर शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच मालीवाड़ा स्थित 'चालीसा पीर परिसर' में जुम्मे की नमाज अदा की जा सकेगी।
प्रशासन की हाई-लेवल बैठक
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन दिन पहले मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिए थे कि मुस्लिम समाज के लिए भोजशाला के पास किसी खाली वैकल्पिक स्थान पर जुमे की नमाज की व्यवस्था की जाए। शुक्रवार सुबह कोर्ट का विस्तृत आदेश हाथ में आते ही कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा की मौजूदगी में पुलिस व राजस्व विभाग के आला अधिकारियों की एक हाई-लेवल बैठक बुलाई गई।
सुरक्षा और यातायात को देखकर तय हुआ स्थान
चूंकि जुमे की नमाज में सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग शामिल होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा, सुगम आवाजाही और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने ग्राम मालीवाड़ा की सर्वे क्रमांक 664 स्थित 'चालीसा पीर दरगाह' के पास की खाली भूमि को नमाज के लिए चिह्नित किया। बैठक के बाद प्रशासन ने इस चयनित स्थान की जानकारी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक कर दी है।
हिंदू पक्ष ने सौंपा था ज्ञापन
एतिहासिक और विवादित भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के हाल में अंतरिम आदेश दिया था। इसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रशासन को भोजशाला के समीप खुले स्थान पर नमाज की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। हिंदू पक्ष ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। इस संबंध में हिंदू पक्ष के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा था। हिंदू पक्ष के प्रतिनिधि गोपाल शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने ही अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है। कोर्ट के रुख से साफ है कि भोजशाला में नमाज की अनुमति नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर के 'निकट' खुले स्थान पर नमाज़ की व्यवस्था करने की बात कही है।
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कब्रिस्तान में नमाज़ नहीं, फातिहा पढ़ी जाती है
ज्ञापन में धार्मिक मान्यताओं और नियमों का हवाला देते हुए हिंदू पक्ष ने कहा कि प्रशासन जिस नजदीकी स्थान पर नमाज़ कराने की सोच रहा है, वह वास्तव में कब्रों से घिरा हुआ है। कुरान और इस्लामिक नियमों के अनुसार भी कब्रिस्तान या कब्रों वाली जगह पर नमाज़ नहीं पढ़ी जाती, वहां केवल फातिहा पढ़ी जाती है। ऐसे में वहां नमाज़ करवाना धार्मिक दृष्टिकोण से भी उचित नहीं है।
हिंदू पक्ष ने इतिहास का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्ष 1935 में भोजशाला के पास जो नमाज़ शुरू हुई थी, उसके समाधान के रूप में वर्ष 1942 में धार के तत्कालीन राजा ने बख्तावर मार्ग पर रहमत मस्जिद बनवा दी थी। इसलिए नमाज़ के लिए उसी मस्जिद का उपयोग किया जाना चाहिए।
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हिंदू पक्ष ने कलेक्टर से मांग की थी कि शहर की शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए नमाज की व्यवस्था भोजशाला के 300 मीटर के दायरे से बाहर ही करे। फिलहाल, इस ज्ञापन के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
