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Solan News: भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का प्रसंग सुन श्रद्धालु भाव विभोर
Sat, 11 Jul 2026 11:01 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 11 Jul 2026 11:01 PM IST
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कुनिहार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मौजूद भक्तगण। स्रोत : आयोजक
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कुनिहार में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। कुनिहार में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य प्रेम दत्त शर्मा ने भक्त प्रह्लाद और दैत्यराज हिरण्यकश्यप के प्रसंग का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है। जबकि सच्ची भक्ति विश्वास और धर्म की सदैव विजय होती है।
आचार्य ने बताया कि हिरण्यकश्यप ने स्वयं को ईश्वर से भी बड़ा मानते हुए अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्ति छोड़ने के लिए अनेक प्रकार की यातनाएं दीं। कभी उन्हें विष दिया गया। कभी हाथियों से कुचलवाने का प्रयास किया गया। तो कभी ऊंचे पर्वत से गिराया गया। लेकिन भगवान की कृपा से भक्त प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ। उन्होंने आगे कहा कि जब हिरण्यकश्यप ने क्रोध में आकर स्तंभ पर प्रहार करते हुए पूछा कि यदि तुम्हारा भगवान सर्वत्र है तो क्या वह इस स्तंभ में भी है। तब भगवान श्रीहरि नरसिंह अवतार में प्रकट हुए और संध्या बेला में चौखट पर अपने नखों से हिरण्यकश्यप का वध कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। इस अवसर पर इंद्र पाल शर्मा, अरविंद जोशी, पंकज भारद्वाज, मुकेश शर्मा डाॅ. राजीव भारद्वाज सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। कुनिहार में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य प्रेम दत्त शर्मा ने भक्त प्रह्लाद और दैत्यराज हिरण्यकश्यप के प्रसंग का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है। जबकि सच्ची भक्ति विश्वास और धर्म की सदैव विजय होती है।
आचार्य ने बताया कि हिरण्यकश्यप ने स्वयं को ईश्वर से भी बड़ा मानते हुए अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्ति छोड़ने के लिए अनेक प्रकार की यातनाएं दीं। कभी उन्हें विष दिया गया। कभी हाथियों से कुचलवाने का प्रयास किया गया। तो कभी ऊंचे पर्वत से गिराया गया। लेकिन भगवान की कृपा से भक्त प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ। उन्होंने आगे कहा कि जब हिरण्यकश्यप ने क्रोध में आकर स्तंभ पर प्रहार करते हुए पूछा कि यदि तुम्हारा भगवान सर्वत्र है तो क्या वह इस स्तंभ में भी है। तब भगवान श्रीहरि नरसिंह अवतार में प्रकट हुए और संध्या बेला में चौखट पर अपने नखों से हिरण्यकश्यप का वध कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। इस अवसर पर इंद्र पाल शर्मा, अरविंद जोशी, पंकज भारद्वाज, मुकेश शर्मा डाॅ. राजीव भारद्वाज सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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