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युद्ध का दंश: बीबीएन में गहराया मजदूरों का संकट, उद्योगों में घटा उत्पादन; गैस सिलिंडरों की कमी से पलायन

सुरेंद्र शर्मा, बद्दी/सोलन। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 23 Apr 2026 11:52 AM IST
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सार

बीबीएन में श्रमिकों की भारी किल्लत का असर उद्योगों पर दिखने लगा है। उद्योगपतियों का कहना है कि हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में मशीनें बंद करने तक की स्थिति बन सकती है। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal News Labor Crisis Deepens in BBN Industrial Production Declines
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) में श्रमिकों की भारी किल्लत का असर उद्योगों पर दिखने लगा है। क्षेत्र के हजारों उद्योगों में उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है और कई इकाइयों में रोजाना का संचालन तक प्रभावित होने लगा है।

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उद्योगपतियों का कहना है कि हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में मशीनें बंद करने तक की स्थिति बन सकती है। बद्दी में लेबर चौक से लेकर गली-मोहल्लों तक मजदूरों की तलाश की जा रही है। फैक्ट्री मालिकों और ठेकेदारों के अनुसार, मजदूरों को लुभाने के लिए 8 घंटे की दिहाड़ी बढ़ाकर 800 से 900 रुपये कर दी गई है और साथ में भोजन की सुविधा भी दी जा रही है, बावजूद श्रमिक नहीं मिल रहे। 
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ठेकेदारों का कहना है कि वर्तमान में गेहूं की कटाई का सीजन होने और गैस सिलिंडर के बढ़ते दामों के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने राज्यों को लौट गए हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो उत्पादन घटकर आधा रह सकता है। बीबीएन में आ रहे इस संकट का सीधा असर हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उद्योगपतियों ने सरकार से क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने और स्थायी श्रमिक नीति बनाने की मांग की है।

कई चुनौतियों का उद्योग कर रहे हैं सामना
बीबीएन के उद्योग पहले ही कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, अब श्रमिक संकट ने स्थिति और गंभीर कर दी है। यदि श्रमिकों की वापसी और उन्हें यहां टिकाने के लिए नीति नहीं बनी, तो अगले कुछ महीनों में उत्पादन बड़े स्तर पर प्रभावित होगा। - चिरंजीवी ठाकुर, राज्याध्यक्ष फेडरेशन ऑफ इंडिया

सरकार करे योजना तैयार
छोटे और मझोले उद्योगों पर श्रमिकों के न मिलने की सबसे अधिक मार पड़ी है। उद्योगों का उत्पादन चक्र टूट चुका है। छोटे उद्योगों के पास अब और अधिक दिहाड़ी देने की गुंजाइश नहीं। सरकार को विशेष श्रमिक प्रोत्साहन योजना लानी चाहिए। ताकि उद्योगों में श्रमिक संकट न रहे। -अशोक राणा, अध्यक्ष लघु उद्योग संघ

अथर्व्यवस्था पर असर
मजदूरों की वापसी, रेंटल आवास नीति और औद्योगिक क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का सुधार अब अत्यावश्यक है। सरकार, उद्योग और श्रमिक संगठन मिलकर स्थायी नीति बनाएं, नहीं तो स्थिति बिगड़ती जाएगी। कई इकाइयों में मशीनें बंद करनी पड़ सकती हैं। इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। -संजीव शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती
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