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Solan News: रटने की बजाय खेल-खेल में सीखेंगे बच्चे
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अल्फा पद्धति से बदलेगा पढ़ाई का अंदाज, कमजोर बच्चों पर भी नजर
9 वर्ष तक के सभी बच्चों का मजबूत होगा आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान
गुणवत्ता शिक्षा विभाग ने सभी ब्लॉक अधिकारियों से मांगी कमजोर बच्चों की सूची
हर सप्ताह स्कूल प्रबंधकों को सौंपनी एफएलएन से संबंधित बच्चों की पूरी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों में रटने की आदत खत्म करने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। सरकारी स्कूलों में नौ वर्ष तक की आयु के प्रत्येक विद्यार्थी को आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) में दक्ष बनाने के लिए अल्फा पद्धति को अपनाया जा रहा है। इस पद्धति के तहत बच्चों को खेल-खेल और मनोरंजक गतिविधियों से भाषा और गणित की बुनियादी अवधारणाएं समझाई जाएंगी। वहीं, पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देते हुए शिक्षकों को रोजाना एक घंटे की अतिरिक्त कक्षा लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों से शैक्षणिक रूप से कमजोर बच्चों की सूची भी मांगी है। जिला स्तरीय टास्क फोर्स की निगरानी में अल्फा पद्धति को पूरे जिले में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। जिले और खंड स्तर पर शिक्षकों को इस पद्धति के संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।
रटने के बजाय गतिविधियों से सीखेंगे बच्चे
उप जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक सोलन राजकुमार पराशर ने बताया कि अल्फा पद्धति ऐसी अभिनव शिक्षण प्रक्रिया है, जिसमें बच्चों पर मानसिक दबाव डाले बिना खेल और मनोरंजक गतिविधियों से भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताएं विकसित की जाती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य स्कूलों में रटने की परिपाटी को खत्म कर गतिविधि आधारित शिक्षण का वातावरण तैयार करना है। योजना के प्रभाव का आकलन करने के लिए नियमित मूल्यांकन और फीडबैक व्यवस्था भी लागू रहेगी।
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कमजोर बच्चों पर विशेष फोकस
पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के लिए रोजाना एक घंटे की अतिरिक्त कक्षा लगाने का प्रावधान किया है। इस अभियान के तहत होने वाली गतिविधियों और पढ़ाई में पिछड़ रहे बच्चों की सूची खंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध करवानी होगी। स्कूल प्रबंधकों को हर सप्ताह एफएलएन से संबंधित प्रगति रिपोर्ट भी जमा करवानी होगी। इस संबंध में हाल ही में टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई थी।
-डॉ. राजेंद्र वर्मा, शिक्षा उप निदेशक, गुणवत्ता शिक्षा
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9 वर्ष तक के सभी बच्चों का मजबूत होगा आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान
गुणवत्ता शिक्षा विभाग ने सभी ब्लॉक अधिकारियों से मांगी कमजोर बच्चों की सूची
हर सप्ताह स्कूल प्रबंधकों को सौंपनी एफएलएन से संबंधित बच्चों की पूरी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और निपुण भारत मिशन के तहत बच्चों में रटने की आदत खत्म करने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। सरकारी स्कूलों में नौ वर्ष तक की आयु के प्रत्येक विद्यार्थी को आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) में दक्ष बनाने के लिए अल्फा पद्धति को अपनाया जा रहा है। इस पद्धति के तहत बच्चों को खेल-खेल और मनोरंजक गतिविधियों से भाषा और गणित की बुनियादी अवधारणाएं समझाई जाएंगी। वहीं, पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देते हुए शिक्षकों को रोजाना एक घंटे की अतिरिक्त कक्षा लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों से शैक्षणिक रूप से कमजोर बच्चों की सूची भी मांगी है। जिला स्तरीय टास्क फोर्स की निगरानी में अल्फा पद्धति को पूरे जिले में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। जिले और खंड स्तर पर शिक्षकों को इस पद्धति के संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।
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रटने के बजाय गतिविधियों से सीखेंगे बच्चे
उप जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक सोलन राजकुमार पराशर ने बताया कि अल्फा पद्धति ऐसी अभिनव शिक्षण प्रक्रिया है, जिसमें बच्चों पर मानसिक दबाव डाले बिना खेल और मनोरंजक गतिविधियों से भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताएं विकसित की जाती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य स्कूलों में रटने की परिपाटी को खत्म कर गतिविधि आधारित शिक्षण का वातावरण तैयार करना है। योजना के प्रभाव का आकलन करने के लिए नियमित मूल्यांकन और फीडबैक व्यवस्था भी लागू रहेगी।
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कमजोर बच्चों पर विशेष फोकस
पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के लिए रोजाना एक घंटे की अतिरिक्त कक्षा लगाने का प्रावधान किया है। इस अभियान के तहत होने वाली गतिविधियों और पढ़ाई में पिछड़ रहे बच्चों की सूची खंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध करवानी होगी। स्कूल प्रबंधकों को हर सप्ताह एफएलएन से संबंधित प्रगति रिपोर्ट भी जमा करवानी होगी। इस संबंध में हाल ही में टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई थी।
-डॉ. राजेंद्र वर्मा, शिक्षा उप निदेशक, गुणवत्ता शिक्षा