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Solan News: जिले में 22 रूट बंद, 26 प्रभावित, गांवों के लोग झेल रहे परेशानी
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स्कूली बच्चों, नौकरी पेशा लोगों को रोजाना पैदल करना पड़ रहा सफर
जिले में बीएस 6 बसों के आने के बाद 35 से ज्यादा बसें हो चुकी हैं कंडम
नई बसों के रूट आवंटन में लगेगा समय
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 22 रूट पूरी तरह बंद हैं, जबकि 26 रूट प्रभावित हैं। इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ रहा है। कई गांवों में स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों, महिलाओं और बुजुर्गों को रोजमर्रा के काम के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है या निजी वाहनों और टैक्सियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ग्रामीण रूटों पर बस सेवा प्रभावित होने के बाद लोगों को अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में भी परेशानी हो रही है। कई स्थानों पर बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है। इससे ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित होने के साथ उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
बीएस-6 बसों के बाद बढ़ी समस्या
जिले में बीएस-6 बसों के आने के बाद पुरानी बसों को चरणबद्ध तरीके से बेड़े से हटाया गया। अब तक करीब 35 से अधिक बसें कंडम घोषित की जा चुकी हैं। उनकी नीलामी भी हो गई है। बसों के बेड़े से बाहर होने के बाद ग्रामीण रूटों पर परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है।
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हालांकि नई बसों की खरीद प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिले को नई बसें मिल भी गई हैं, लेकिन इनके रूट तय करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इसी कारण बंद और प्रभावित ग्रामीण रूटों पर बस सेवा बहाल होने का इंतजार बना हुआ है।
ग्रामीण जीवन पर पड़ा असर
बंद बस रूटों का सीधा असर ग्रामीण जीवन पर पड़ रहा है। स्कूली बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है। वहीं बुजुर्गों और महिलाओं के लिए लंबी दूरी पैदल तय करना अधिक कठिन हो गया है। ग्रामीणों को अस्पताल, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
नई बसें आईं, रूट तय होने का इंतजार
जिले में करीब 35 नई बसें मिलने के बावजूद इनके रूट आवंटन को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। रूट निर्धारण और परमिट से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही बसों को संबंधित रूटों पर चलाया जा सकेगा। इसी प्रक्रिया के कारण ग्रामीण रूटों पर बसों की वापसी में देरी हो रही है।
नई बसें आ चुकी हैं। जल्द ही उनके रूट तय किए जाएंगे। वर्तमान में सोलन और परवाणू डिपो के कुल नौ रूट बंद हैं।
-प्रदीप कुमार, आरएम सोलन एवं परवाणू
नालागढ़ डिपो के 13 रूट बंद हैं, जबकि 26 रूट प्रभावित हैं। डिपो को 15 नई बसें मिली हैं। जल्द ही इनके रूट निर्धारित कर बसों का संचालन शुरू किया जाएगा।
-विवेक अग्निहोत्री, आरएम नालागढ़
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जिले में बीएस 6 बसों के आने के बाद 35 से ज्यादा बसें हो चुकी हैं कंडम
नई बसों के रूट आवंटन में लगेगा समय
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 22 रूट पूरी तरह बंद हैं, जबकि 26 रूट प्रभावित हैं। इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ रहा है। कई गांवों में स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों, महिलाओं और बुजुर्गों को रोजमर्रा के काम के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है या निजी वाहनों और टैक्सियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ग्रामीण रूटों पर बस सेवा प्रभावित होने के बाद लोगों को अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में भी परेशानी हो रही है। कई स्थानों पर बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है। इससे ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित होने के साथ उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
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बीएस-6 बसों के बाद बढ़ी समस्या
जिले में बीएस-6 बसों के आने के बाद पुरानी बसों को चरणबद्ध तरीके से बेड़े से हटाया गया। अब तक करीब 35 से अधिक बसें कंडम घोषित की जा चुकी हैं। उनकी नीलामी भी हो गई है। बसों के बेड़े से बाहर होने के बाद ग्रामीण रूटों पर परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है।
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हालांकि नई बसों की खरीद प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिले को नई बसें मिल भी गई हैं, लेकिन इनके रूट तय करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इसी कारण बंद और प्रभावित ग्रामीण रूटों पर बस सेवा बहाल होने का इंतजार बना हुआ है।
ग्रामीण जीवन पर पड़ा असर
बंद बस रूटों का सीधा असर ग्रामीण जीवन पर पड़ रहा है। स्कूली बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है। वहीं बुजुर्गों और महिलाओं के लिए लंबी दूरी पैदल तय करना अधिक कठिन हो गया है। ग्रामीणों को अस्पताल, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
नई बसें आईं, रूट तय होने का इंतजार
जिले में करीब 35 नई बसें मिलने के बावजूद इनके रूट आवंटन को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। रूट निर्धारण और परमिट से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही बसों को संबंधित रूटों पर चलाया जा सकेगा। इसी प्रक्रिया के कारण ग्रामीण रूटों पर बसों की वापसी में देरी हो रही है।
नई बसें आ चुकी हैं। जल्द ही उनके रूट तय किए जाएंगे। वर्तमान में सोलन और परवाणू डिपो के कुल नौ रूट बंद हैं।
-प्रदीप कुमार, आरएम सोलन एवं परवाणू
नालागढ़ डिपो के 13 रूट बंद हैं, जबकि 26 रूट प्रभावित हैं। डिपो को 15 नई बसें मिली हैं। जल्द ही इनके रूट निर्धारित कर बसों का संचालन शुरू किया जाएगा।
-विवेक अग्निहोत्री, आरएम नालागढ़