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Solan News: कुनिहार में शिव महापुराण कथा का शुभारंभ, मोक्ष का मार्ग बताया
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हर-हर गंगे कांवड़ सेवा संघ हाटकोट कर रहा आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। हर-हर गंगे कांवड़ सेवा संघ हाटकोट के तत्वावधान में राजदरबार परिसर में 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के पहले दिन आचार्य शशांक कौशल ने श्रद्धालुओं को शिव पुराण के महत्व, इसकी रचना और श्रवण की विधि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि शिव पुराण सनातन धर्म के प्रमुख महापुराणों में से एक है, जिसमें करीब 24 हजार श्लोक और सात संहिताएं हैं।
आचार्य ने बताया कि महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित शिव पुराण में भगवान शिव की महिमा, भक्ति, ज्ञान और मोक्ष का मार्ग बताया गया है। इसका श्रवण श्रद्धा, भक्ति, एकाग्रता और शुद्ध आचरण के साथ करना चाहिए। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार सात, नौ, 11, 15 या 30 दिनों में इसका पारायण कर सकते हैं। कथा श्रवण के दौरान सात्विक जीवन, संयम, सत्य और सेवा का पालन करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कथा से समझाया भक्ति का महत्व
आचार्य शशांक कौशल ने बिंदुक चंचला की कथा सुनाकर भक्ति, समर्पण और अटूट विश्वास का महत्व समझाया। उन्होंने देवराज ब्राह्मण का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के बावजूद देवराज लोभ और कुसंगति के कारण धर्म के मार्ग से भटक गया था। एक दिन वह शिव महापुराण कथा स्थल पर पहुंचा। कथा श्रवण से उसके अंतर्मन में पश्चाताप जागा और उसने भगवान शिव की शरण ले ली। श्रद्धा और विश्वास के साथ शिव पुराण का श्रवण करने पर उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। हर-हर गंगे कांवड़ सेवा संघ हाटकोट के तत्वावधान में राजदरबार परिसर में 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के पहले दिन आचार्य शशांक कौशल ने श्रद्धालुओं को शिव पुराण के महत्व, इसकी रचना और श्रवण की विधि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि शिव पुराण सनातन धर्म के प्रमुख महापुराणों में से एक है, जिसमें करीब 24 हजार श्लोक और सात संहिताएं हैं।
आचार्य ने बताया कि महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित शिव पुराण में भगवान शिव की महिमा, भक्ति, ज्ञान और मोक्ष का मार्ग बताया गया है। इसका श्रवण श्रद्धा, भक्ति, एकाग्रता और शुद्ध आचरण के साथ करना चाहिए। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार सात, नौ, 11, 15 या 30 दिनों में इसका पारायण कर सकते हैं। कथा श्रवण के दौरान सात्विक जीवन, संयम, सत्य और सेवा का पालन करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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कथा से समझाया भक्ति का महत्व
आचार्य शशांक कौशल ने बिंदुक चंचला की कथा सुनाकर भक्ति, समर्पण और अटूट विश्वास का महत्व समझाया। उन्होंने देवराज ब्राह्मण का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के बावजूद देवराज लोभ और कुसंगति के कारण धर्म के मार्ग से भटक गया था। एक दिन वह शिव महापुराण कथा स्थल पर पहुंचा। कथा श्रवण से उसके अंतर्मन में पश्चाताप जागा और उसने भगवान शिव की शरण ले ली। श्रद्धा और विश्वास के साथ शिव पुराण का श्रवण करने पर उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
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