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मिड-डे मील : दोपहर के मेन्यू में मशरूम पुलाव और सूप को जोड़ने की तैयारी
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प्रत्येक स्कूल अपने किचन गार्डन में करेगा मशरूम, दूसरे चरण में 45 क्लस्टर के 270 स्कूलों को किया गया है शामिल
खुंब निदेशालय सोलन के वैज्ञानिकों की देखरेख में किया जा रहा मशरूम का उत्पादन
ललित कश्यप
सोलन। जिले के स्कूलों में मिड-डे मील योजना में मिशन व्हाइट अंब्रेला के तहत मशरूम उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें तैयार उत्पाद का उपयोग विद्यार्थियों के लिए मशरूम पुलाव, सूप और सब्जी जैसे पौष्टिक व्यंजन बनाने में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उत्पादन को सुखाकर भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इसे एमडीएम मेन्यू में भी जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा अब जिले के क्लस्टर स्कूलों में ढिंगरी मशरूम उगाना शुरू किया गया है। इसके दूसरे चरण में कुल 45 क्लस्टर के 270 स्कूलों को शामिल किया गया है। खुंब निदेशालय सोलन के वैज्ञानिकों की देखरेख में यह उत्पादन किया जा रहा है और पहले चरण में शामिल किए गए कई स्कूलों में मशरूम की फसल तैयार भी हो चुकी है।
इसी कड़ी में कांप्लेक्स राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नंड के अधीन आने वाले सभी 12 विद्यालयों में भी ऑयस्टर मशरूम की खेती शुरू की गई है। यह पहल मिशन व्हाइट अंब्रेला के तहत संचालित की जा रही है, जिसे जिला उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा कुमारी रीता गुप्ता की ओर से विद्यालयों के किचन गार्डन को सशक्त बनाने और मिड-डे मील को ताजे एवं प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों से समृद्ध करने के उद्देश्य से आरंभ किया गया है। नंड के अधीन आने वाले सभी 12 विद्यालयों में कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक शशिपाल शर्मा की ओर से आयोजित प्रशिक्षण सत्र के उपरांत किया गया। प्रशिक्षण में शिक्षकों और विद्यार्थियों को कम लागत वाली ऑयस्टर मशरूम खेती की तकनीक, स्पॉन तैयार करना, बैग कल्चर विधि, नमी एवं तापमान नियंत्रण और फसल कटाई की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इसके माध्यम से हम मिड-डे मील में ताजी एवं प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री शामिल कर सकते हैं तथा कुपोषण जैसी समस्या के समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठा सकते हैं। संवाद
कोट
हर स्कूल अपने ग्रीन किचन गार्डन में मशरूम उत्पादन करेगा। तैयार उत्पाद का उपयोग विद्यार्थियों के लिए मशरूम पुलाव, सूप तथा सब्ज़ी जैसे पौष्टिक व्यंजन बनाने में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उत्पादन को सुखाकर भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इसके लिए सभी स्कूलों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। नंड के तहत आने वाले 12 स्कूलों ने भी मशरूम उगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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राजकुमार पराशर, जिला नोडल अधिकारी, मिड-डे मील
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ललित कश्यप
सोलन। जिले के स्कूलों में मिड-डे मील योजना में मिशन व्हाइट अंब्रेला के तहत मशरूम उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें तैयार उत्पाद का उपयोग विद्यार्थियों के लिए मशरूम पुलाव, सूप और सब्जी जैसे पौष्टिक व्यंजन बनाने में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उत्पादन को सुखाकर भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इसे एमडीएम मेन्यू में भी जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा अब जिले के क्लस्टर स्कूलों में ढिंगरी मशरूम उगाना शुरू किया गया है। इसके दूसरे चरण में कुल 45 क्लस्टर के 270 स्कूलों को शामिल किया गया है। खुंब निदेशालय सोलन के वैज्ञानिकों की देखरेख में यह उत्पादन किया जा रहा है और पहले चरण में शामिल किए गए कई स्कूलों में मशरूम की फसल तैयार भी हो चुकी है।
इसी कड़ी में कांप्लेक्स राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नंड के अधीन आने वाले सभी 12 विद्यालयों में भी ऑयस्टर मशरूम की खेती शुरू की गई है। यह पहल मिशन व्हाइट अंब्रेला के तहत संचालित की जा रही है, जिसे जिला उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा कुमारी रीता गुप्ता की ओर से विद्यालयों के किचन गार्डन को सशक्त बनाने और मिड-डे मील को ताजे एवं प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों से समृद्ध करने के उद्देश्य से आरंभ किया गया है। नंड के अधीन आने वाले सभी 12 विद्यालयों में कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक शशिपाल शर्मा की ओर से आयोजित प्रशिक्षण सत्र के उपरांत किया गया। प्रशिक्षण में शिक्षकों और विद्यार्थियों को कम लागत वाली ऑयस्टर मशरूम खेती की तकनीक, स्पॉन तैयार करना, बैग कल्चर विधि, नमी एवं तापमान नियंत्रण और फसल कटाई की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इसके माध्यम से हम मिड-डे मील में ताजी एवं प्रोटीन युक्त खाद्य सामग्री शामिल कर सकते हैं तथा कुपोषण जैसी समस्या के समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठा सकते हैं। संवाद
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हर स्कूल अपने ग्रीन किचन गार्डन में मशरूम उत्पादन करेगा। तैयार उत्पाद का उपयोग विद्यार्थियों के लिए मशरूम पुलाव, सूप तथा सब्ज़ी जैसे पौष्टिक व्यंजन बनाने में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उत्पादन को सुखाकर भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। इसके लिए सभी स्कूलों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। नंड के तहत आने वाले 12 स्कूलों ने भी मशरूम उगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
राजकुमार पराशर, जिला नोडल अधिकारी, मिड-डे मील