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Solan News: तुड़ी के पांच सौ रुपये तक बढ़े दाम
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700 से बढ़कर 1200 रुपये क्विंटल पहुंचा भाव
मशीनों से गेहूं कटाई के कारण घटा उत्पादन, पशुपालक चारे के विकल्प तलाशने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। पशुपालकों के सामने चारे का संकट गहराने लगा है। तुड़ी के दाम में अचानक भारी उछाल आया है। कुछ समय पहले 700 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही तुड़ी अब 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। आमतौर पर तुड़ी के दाम में इस तरह की बढ़ोतरी मार्च-अप्रैल के दौरान देखने को मिलती है, लेकिन इस बार करीब छह माह पहले ही इसके दाम बढ़ने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।
तुड़ी के दाम बढ़ने का प्रमुख कारण पंजाब में गेहूं की कटाई के तौर-तरीकों में आया बदलाव माना जा रहा है। गेहूं की कटाई के लिए अब मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। पहले मजदूरों से गेहूं की कटाई होने से पर्याप्त मात्रा में तुड़ी उपलब्ध होती थी, लेकिन मशीनों से कटाई के कारण तुड़ी का उत्पादन काफी कम हो गया है। इससे बाजार में इसकी उपलब्धता घटने के साथ दाम बढ़ गए हैं।
दभोटा के किसान सुरमुख सिंह ने बताया कि पहले गेहूं की कटाई मजदूरों से होती थी, जिससे खेतों से पर्याप्त तुड़ी मिल जाती थी। अब मशीनों से कटाई होने के कारण तुड़ी की उपलब्धता कम हो गई है। खेड़ा के किसान अवतार सिंह ने बताया कि कुछ किसान तुड़ी का भंडारण भी कर लेते हैं। बाद में फरवरी-मार्च के दौरान मांग बढ़ने पर इसे ऊंचे दाम पर बेचा जाता है। इससे बाजार में तुड़ी की कमी और दाम में बढ़ोतरी होती है। पशुपालकों का कहना है कि यदि तुड़ी की कीमत इसी तरह बढ़ती रही तो दूध उत्पादन की लागत भी बढ़ सकती है।
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हरे चारे का सहारा
तुड़ी महंगी होने के बाद पशुपालक अब चारे के दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। कई पशुपालक खड्डों के किनारे उगने वाली घास और अन्य वनस्पतियों को काटकर हरे चारे के साथ पशुओं को खिला रहे हैं। हालांकि, इससे पशुओं के लिए सालभर चारे की जरूरत पूरी करना मुश्किल बना हुआ है।
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मशीनों से गेहूं कटाई के कारण घटा उत्पादन, पशुपालक चारे के विकल्प तलाशने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। पशुपालकों के सामने चारे का संकट गहराने लगा है। तुड़ी के दाम में अचानक भारी उछाल आया है। कुछ समय पहले 700 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही तुड़ी अब 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। आमतौर पर तुड़ी के दाम में इस तरह की बढ़ोतरी मार्च-अप्रैल के दौरान देखने को मिलती है, लेकिन इस बार करीब छह माह पहले ही इसके दाम बढ़ने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।
तुड़ी के दाम बढ़ने का प्रमुख कारण पंजाब में गेहूं की कटाई के तौर-तरीकों में आया बदलाव माना जा रहा है। गेहूं की कटाई के लिए अब मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। पहले मजदूरों से गेहूं की कटाई होने से पर्याप्त मात्रा में तुड़ी उपलब्ध होती थी, लेकिन मशीनों से कटाई के कारण तुड़ी का उत्पादन काफी कम हो गया है। इससे बाजार में इसकी उपलब्धता घटने के साथ दाम बढ़ गए हैं।
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दभोटा के किसान सुरमुख सिंह ने बताया कि पहले गेहूं की कटाई मजदूरों से होती थी, जिससे खेतों से पर्याप्त तुड़ी मिल जाती थी। अब मशीनों से कटाई होने के कारण तुड़ी की उपलब्धता कम हो गई है। खेड़ा के किसान अवतार सिंह ने बताया कि कुछ किसान तुड़ी का भंडारण भी कर लेते हैं। बाद में फरवरी-मार्च के दौरान मांग बढ़ने पर इसे ऊंचे दाम पर बेचा जाता है। इससे बाजार में तुड़ी की कमी और दाम में बढ़ोतरी होती है। पशुपालकों का कहना है कि यदि तुड़ी की कीमत इसी तरह बढ़ती रही तो दूध उत्पादन की लागत भी बढ़ सकती है।
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हरे चारे का सहारा
तुड़ी महंगी होने के बाद पशुपालक अब चारे के दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। कई पशुपालक खड्डों के किनारे उगने वाली घास और अन्य वनस्पतियों को काटकर हरे चारे के साथ पशुओं को खिला रहे हैं। हालांकि, इससे पशुओं के लिए सालभर चारे की जरूरत पूरी करना मुश्किल बना हुआ है।