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Solan News: एससीएसटी कॉर्पोरेशन को केंद्र से नहीं मिल पा रहा पैसा, चार योजनाएं बंद
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स्टेट बिलो गारंटी पूरी होने के कारण नहीं मिल रहा पैसा
चार योजनाओं में 600 से 700 पात्रों को दिया जाता है ऋण
सरकार को गारंटी 29 से बढ़ा कर 75 करोड़ करने का भेजा प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति निगम ने केंद्र से पैसा न मिलने के कारण चार योजनाओं में लोगों को ऋण देना बंद कर दिया है। इसका कारण निगम की स्टेट बिलो गारंटी पूरी होना बताया जा रहा है। गारंटी पूरी होने के कारण अब निगम को केंद्र की ओर से दिया जाने वाला पैसा बंद कर दिया गया है। निगम को पहले राज्य सरकार से गारंटी को बढ़ाना होगा, उसके बाद ही केंद्र से निगम पैसा ले सकेगा।
निगम की ओर से बंद की गई चारों योजनाएं अनुसूचित जाति के लोगों के लिए बनाई गई हैं। निगम को अनुसूचित जाति के लोगों को ऋण देने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी) की ओर से पैसा मिलता है, लेकिन गारंटी पूरी होने के कारण निगम को पैसा नहीं मिल रहा। निगम की ओर से हर साल इन चार योजनाओं में 600 से 700 लोगों को ऋण दिया जाता था। निगम को राज्य सरकार की ओर से केंद्र से 29 करोड़ रुपये तक पैसे लेने की गारंटी दी गई थी, जो अब पूरी हो गई है। निगम ने केंद्र से पूरे 29 करोड़ रुपये लेकर लोगों को ऋण के रूप में दे दिया है। अब गारंटी बढ़ने के बाद ही निगम दोबारा केंद्र से पैसे ले सकता है। इसके लिए निगम ने राज्य सरकार को गारंटी को 29 करोड़ रुपये से बढ़ा कर 75 करोड़ रुपये तक करने के लिए प्रस्ताव भेजा है। गारंटी मिलने के बाद ही योजनाएं दोबारा से शुरू हो सकेगी।
इनसेट
निगम देता था 50 लाख तक का ऋण
निगम की ओर से बंद पड़ी योजनाओं में लोगों को शिक्षा और स्वरोजगार के लिए 50 लाख रुपये तक का ऋण कम ब्याज दर पर दिया जाता था। वहीं इसमें ऋण लेने के लिए वार्षिक आय भी 5 लाख रुपये तक रखी गई है। ऐसे में अधिकतर लोगों को आसानी से इसमें ऋण की सुविधा मिल जाती थी। वहीं अब पैसा न होने के कारण योजनाएं बंद पड़ी है।
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प्रस्ताव मंजूरी का इंतजार
निगम की ओर से अनुसूचित जाति के लोगों के लिए चलाई गई चारों योजनाएं पैसा न मिलने के कारण बंद पड़ी हैं। निगम की योजनाओं में स्टेट बिलो गारंटी पूरी हो चुकी है। निगम ने गारंटी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का इंतजार है, उसके बाद निगम दोबारा से योजनाएं शुरू कर देगा। - विपिन कुमार, जिला प्रबंधक, एससीएसटी कॉर्पोरेशन
चार योजनाओं में 600 से 700 पात्रों को दिया जाता है ऋण
सरकार को गारंटी 29 से बढ़ा कर 75 करोड़ करने का भेजा प्रस्ताव
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति निगम ने केंद्र से पैसा न मिलने के कारण चार योजनाओं में लोगों को ऋण देना बंद कर दिया है। इसका कारण निगम की स्टेट बिलो गारंटी पूरी होना बताया जा रहा है। गारंटी पूरी होने के कारण अब निगम को केंद्र की ओर से दिया जाने वाला पैसा बंद कर दिया गया है। निगम को पहले राज्य सरकार से गारंटी को बढ़ाना होगा, उसके बाद ही केंद्र से निगम पैसा ले सकेगा।
निगम की ओर से बंद की गई चारों योजनाएं अनुसूचित जाति के लोगों के लिए बनाई गई हैं। निगम को अनुसूचित जाति के लोगों को ऋण देने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी) की ओर से पैसा मिलता है, लेकिन गारंटी पूरी होने के कारण निगम को पैसा नहीं मिल रहा। निगम की ओर से हर साल इन चार योजनाओं में 600 से 700 लोगों को ऋण दिया जाता था। निगम को राज्य सरकार की ओर से केंद्र से 29 करोड़ रुपये तक पैसे लेने की गारंटी दी गई थी, जो अब पूरी हो गई है। निगम ने केंद्र से पूरे 29 करोड़ रुपये लेकर लोगों को ऋण के रूप में दे दिया है। अब गारंटी बढ़ने के बाद ही निगम दोबारा केंद्र से पैसे ले सकता है। इसके लिए निगम ने राज्य सरकार को गारंटी को 29 करोड़ रुपये से बढ़ा कर 75 करोड़ रुपये तक करने के लिए प्रस्ताव भेजा है। गारंटी मिलने के बाद ही योजनाएं दोबारा से शुरू हो सकेगी।
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निगम देता था 50 लाख तक का ऋण
निगम की ओर से बंद पड़ी योजनाओं में लोगों को शिक्षा और स्वरोजगार के लिए 50 लाख रुपये तक का ऋण कम ब्याज दर पर दिया जाता था। वहीं इसमें ऋण लेने के लिए वार्षिक आय भी 5 लाख रुपये तक रखी गई है। ऐसे में अधिकतर लोगों को आसानी से इसमें ऋण की सुविधा मिल जाती थी। वहीं अब पैसा न होने के कारण योजनाएं बंद पड़ी है।
प्रस्ताव मंजूरी का इंतजार
निगम की ओर से अनुसूचित जाति के लोगों के लिए चलाई गई चारों योजनाएं पैसा न मिलने के कारण बंद पड़ी हैं। निगम की योजनाओं में स्टेट बिलो गारंटी पूरी हो चुकी है। निगम ने गारंटी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का इंतजार है, उसके बाद निगम दोबारा से योजनाएं शुरू कर देगा। - विपिन कुमार, जिला प्रबंधक, एससीएसटी कॉर्पोरेशन