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Solan News: जिले के 9 अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीनें, सिर्फ दो चल रहीं
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रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते धूल फांक रहीं
लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी संस्थानों में जाना मजबूरी
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन और अर्की में ही लोगों को मिल रही है सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
साेलन। जिले भर के 9 अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लाखों रुपये की लागत से अल्ट्रासाउंड मशीनें तो स्थापित की गई हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। स्थिति यह है कि इन 9 केंद्रों में से केवल दो में ही जैसे-तैसे काम चल रहा है, जबकि सात मशीनें सिर्फ धूल फांकने को मजबूर हैं।
पूरे जिले में केवल दो अस्पतालों क्षेत्रीय अस्पताल सोलन और अर्की अस्पताल में नियमित रेडियोलॉजिस्ट तैनात हैं। बाकी पांच अस्पतालों में प्रशिक्षण पर आए डॉक्टरों के सहारे बीच-बीच में अल्ट्रासाउंड मशीनों का संचालन किया जा रहा है। अर्की अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट को दूसरे अस्पतालों में भी जाकर अपनी सेवाएं देनी पड़ रही हैं।
विशेषज्ञों की कमी का सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों की जेब पर पड़ रहा है। जिन अस्पतालों में मशीनें बंद हैं या जहां प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते, वहां के मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मजबूरन निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें 500 से 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा दूरदराज के इलाकों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करते हुए एक से दूसरे अस्पताल भटकना पड़ रहा है।
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पुरानी मशीनों के भरोसे सिस्टम, रोजाना सिर्फ 25-30 टेस्ट
समस्या यहीं खत्म नहीं होती। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में लगी अल्ट्रासाउंड मशीनें काफी पुरानी हो चुकी हैं। तकनीकी रूप से पुरानी होने के कारण ये मशीनें एक दिन में केवल 25 से 30 मरीजों के ही टेस्ट कर पाती हैं। ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले दर्जनों मरीजों को बिना टेस्ट कराए ही वापस लौटना पड़ता है या फिर मजबूरी में निजी लैब जाना पड़ता है।
इन स्वास्थ्य केंद्रों में लगी हैं मशीनें
स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के अलावा नागरिक अस्पताल कुनिहार, अर्की, चायल, नालागढ़ और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सायरी, बद्दी व धर्मपुर में अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं। विभाग की योजना अन्य कई अस्पतालों में भी मशीनें लगाने की थी, लेकिन मौजूदा स्टाफ की कमी को देखते हुए फिलहाल इन योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
जिलेभर के 9 अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीनें मौजूद हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते कुछ जगहों पर काम प्रभावित है। विभाग नई मशीनें खरीदना चाहता है, लेकिन जब तक विशेषज्ञ नहीं होंगे, वे भी धूल ही फांकेंगी। हमने इस गंभीर समस्या को सरकार के समक्ष मजबूती से रखा है। उम्मीद है कि जल्द ही जिले को नए रेडियोलॉजिस्ट मिलेंगे, ताकि जनता को राहत मिल सके।
डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग सोलन
लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी संस्थानों में जाना मजबूरी
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन और अर्की में ही लोगों को मिल रही है सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
साेलन। जिले भर के 9 अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लाखों रुपये की लागत से अल्ट्रासाउंड मशीनें तो स्थापित की गई हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। स्थिति यह है कि इन 9 केंद्रों में से केवल दो में ही जैसे-तैसे काम चल रहा है, जबकि सात मशीनें सिर्फ धूल फांकने को मजबूर हैं।
पूरे जिले में केवल दो अस्पतालों क्षेत्रीय अस्पताल सोलन और अर्की अस्पताल में नियमित रेडियोलॉजिस्ट तैनात हैं। बाकी पांच अस्पतालों में प्रशिक्षण पर आए डॉक्टरों के सहारे बीच-बीच में अल्ट्रासाउंड मशीनों का संचालन किया जा रहा है। अर्की अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट को दूसरे अस्पतालों में भी जाकर अपनी सेवाएं देनी पड़ रही हैं।
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विशेषज्ञों की कमी का सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों की जेब पर पड़ रहा है। जिन अस्पतालों में मशीनें बंद हैं या जहां प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते, वहां के मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मजबूरन निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें 500 से 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा दूरदराज के इलाकों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करते हुए एक से दूसरे अस्पताल भटकना पड़ रहा है।
पुरानी मशीनों के भरोसे सिस्टम, रोजाना सिर्फ 25-30 टेस्ट
समस्या यहीं खत्म नहीं होती। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में लगी अल्ट्रासाउंड मशीनें काफी पुरानी हो चुकी हैं। तकनीकी रूप से पुरानी होने के कारण ये मशीनें एक दिन में केवल 25 से 30 मरीजों के ही टेस्ट कर पाती हैं। ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले दर्जनों मरीजों को बिना टेस्ट कराए ही वापस लौटना पड़ता है या फिर मजबूरी में निजी लैब जाना पड़ता है।
इन स्वास्थ्य केंद्रों में लगी हैं मशीनें
स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के अलावा नागरिक अस्पताल कुनिहार, अर्की, चायल, नालागढ़ और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सायरी, बद्दी व धर्मपुर में अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं। विभाग की योजना अन्य कई अस्पतालों में भी मशीनें लगाने की थी, लेकिन मौजूदा स्टाफ की कमी को देखते हुए फिलहाल इन योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
जिलेभर के 9 अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीनें मौजूद हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते कुछ जगहों पर काम प्रभावित है। विभाग नई मशीनें खरीदना चाहता है, लेकिन जब तक विशेषज्ञ नहीं होंगे, वे भी धूल ही फांकेंगी। हमने इस गंभीर समस्या को सरकार के समक्ष मजबूती से रखा है। उम्मीद है कि जल्द ही जिले को नए रेडियोलॉजिस्ट मिलेंगे, ताकि जनता को राहत मिल सके।
डॉ. अजय पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग सोलन