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Una News: डॉ. राजकुमार ने गुजरात विश्वविद्यालय में पढ़ा शोध पत्र
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एक भारत, श्रेष्ठ भारत पर रखे अपने विचार
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा के गांव कैहलमी से संबंध रखने वाले डॉ. राजकुमार ने हाल ही में सरदार पटेल विश्वविद्यालय, वल्लभ विद्यानगर (आनंद), गुजरात में इतिहास विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने एक भारत श्रेष्ठ भारत के दूर दृष्टा सरदार वल्लभभाई पटेल विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। शोध में डॉ. राजकुमार ने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने 562 रियासतों का भारतीय संघ में विलय कर देश के राष्ट्रीय एकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि सरदार पटेल ने केवल एक भारत की नींव नहीं रखी, बल्कि श्रेष्ठ और आत्मनिर्भर भारत की दूरदर्शी संकल्पना की अमूल्य विरासत भी देश को प्रदान की।
सेमिनार के दौरान डॉ. राजकुमार की सरदार पटेल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निरंजन पटेल से भी भेंट हुई। इसके अलावा डॉ. राजकुमार ने विभागाध्यक्ष प्रो. बसंत पटेल, सह आचार्य डॉ. दलीप चौधरी, आचार्य डॉ. हेमंत दवे, अतिथि आचार्य पूजा और आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। वर्तमान में डॉ. राजकुमार हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में इतिहास विभाग में सहायक आचार्य के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। इतिहास विषय पर उनकी तीन संपादित पुस्तकें और दर्जनों शोध आलेख राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
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थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा के गांव कैहलमी से संबंध रखने वाले डॉ. राजकुमार ने हाल ही में सरदार पटेल विश्वविद्यालय, वल्लभ विद्यानगर (आनंद), गुजरात में इतिहास विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने एक भारत श्रेष्ठ भारत के दूर दृष्टा सरदार वल्लभभाई पटेल विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। शोध में डॉ. राजकुमार ने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने 562 रियासतों का भारतीय संघ में विलय कर देश के राष्ट्रीय एकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि सरदार पटेल ने केवल एक भारत की नींव नहीं रखी, बल्कि श्रेष्ठ और आत्मनिर्भर भारत की दूरदर्शी संकल्पना की अमूल्य विरासत भी देश को प्रदान की।
सेमिनार के दौरान डॉ. राजकुमार की सरदार पटेल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निरंजन पटेल से भी भेंट हुई। इसके अलावा डॉ. राजकुमार ने विभागाध्यक्ष प्रो. बसंत पटेल, सह आचार्य डॉ. दलीप चौधरी, आचार्य डॉ. हेमंत दवे, अतिथि आचार्य पूजा और आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। वर्तमान में डॉ. राजकुमार हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में इतिहास विभाग में सहायक आचार्य के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। इतिहास विषय पर उनकी तीन संपादित पुस्तकें और दर्जनों शोध आलेख राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
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