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Una News: मृगस्नान के दिनों में खेतों की तैयारी में जुटे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 09 Jun 2026 12:21 AM IST
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बडूही (ऊना)। क्षेत्र में बरसात की फसलों की बुवाई को लेकर किसानों ने खेतों की तैयारियां तेज कर दी हैं। जून माह की प्रचंड गर्मी के बीच किसान अपने खेतों में हल चलाकर भूमि को तैयार करने में जुटे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों सुबह और शाम खेतों में किसानों की चहल-पहल देखने को मिल रही है।
ग्रामीण बुजुर्ग शादी लाल, तरसेम चंद, बीरबल सिंह, गुरदेव चंद, रुलिया राम के अनुसार 6 जून से 22 जून तक चलने वाले 16 दिनों में मृगस्नान होंगे, लोक मान्यताओं और पारंपरिक कृषि ज्ञान के अनुसार ये दिन खेती-बाड़ी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
बुजुर्ग बताते हैं कि देसी माह के अनुसार बैसाख के अंतिम आठ दिन और ज्येष्ठ माह के शुरुआती आठ दिन मिलाकर मृगस्नान का समय बनता है। इस अवधि में सामान्यतः तेज धूप और अधिक गर्मी पड़ती है।
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बुजुर्ग किसानों का कहना है कि मृगस्नान के दौरान खेतों में हल जोतना सबसे लाभकारी माना जाता है। तेज धूप के कारण खेतों में मौजूद विभिन्न प्रकार की खरपतवार, घास-फूस तथा फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अनेक कीट और उनके अंडे नष्ट हो जाते हैं।
किसान संदीप ठाकुर, श्याम सुन्दर, किरपाल सिंह, निर्मल सिंह आदि का कहना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों के दौर में भी पारंपरिक कृषि ज्ञान का अपना महत्व है। बरसात की फसलों जैसे मक्की, धान, दालें और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पहले किसान मृगस्नान के दिनों का विशेष ध्यान रखते हैं।
ग्रामीण बुजुर्ग शादी लाल, तरसेम चंद, बीरबल सिंह, गुरदेव चंद, रुलिया राम के अनुसार 6 जून से 22 जून तक चलने वाले 16 दिनों में मृगस्नान होंगे, लोक मान्यताओं और पारंपरिक कृषि ज्ञान के अनुसार ये दिन खेती-बाड़ी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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बुजुर्ग बताते हैं कि देसी माह के अनुसार बैसाख के अंतिम आठ दिन और ज्येष्ठ माह के शुरुआती आठ दिन मिलाकर मृगस्नान का समय बनता है। इस अवधि में सामान्यतः तेज धूप और अधिक गर्मी पड़ती है।
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किसान संदीप ठाकुर, श्याम सुन्दर, किरपाल सिंह, निर्मल सिंह आदि का कहना है कि आधुनिक कृषि तकनीकों के दौर में भी पारंपरिक कृषि ज्ञान का अपना महत्व है। बरसात की फसलों जैसे मक्की, धान, दालें और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पहले किसान मृगस्नान के दिनों का विशेष ध्यान रखते हैं।