{"_id":"69c422b2759e3e04610f9585","slug":"farmers-are-eyeing-the-weather-for-a-bumper-mango-harvest-una-news-c-93-1-ssml1048-185943-2026-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: आम की बंपर पैदावार की उम्मीद मौसम पर टिकी किसानों की नजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: आम की बंपर पैदावार की उम्मीद मौसम पर टिकी किसानों की नजर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 26 Mar 2026 06:29 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
ऊना। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में इस बार आम की फसल को लेकर उत्साह का माहौल है। हरोली, गगरेट, अंब, चिंतपूर्णी और बंगाणा इलाकों में आम के पेड़ों पर इस बार शानदार बौर देखने को मिला, जिससे बागवानों को बेहतर पैदावार की उम्मीद जगी है। किसान अब अनुकूल मौसम की कामना कर रहे हैं ताकि फसल पूरी तरह तैयार होकर अच्छा उत्पादन दे सके।
जानकारी के अनुसार जिले में अधिकांश पेड़ देसी किस्म के हैं और यहां हर साल करीब 12000 मीट्रिक टन तक कच्चे आम का उत्पादन होता है।
हालांकि मौसम की मार कई बार किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर देती है। बीते वर्ष भी फसल अच्छी थी लेकिन तेज हवाओं और बारिश के कारण उत्पादन घटकर करीब 10000 मीट्रिक टन रह गया था।
विशेषज्ञों के अनुसार आम की फसल के लिए बारिश लाभदायक मानी जाती है क्योंकि इससे फलों की वृद्धि तेज होती है लेकिन बारिश के साथ चलने वाली तेज हवाएं नुकसानदायक साबित होती हैं। पिछले वर्षों में तेज हवाओं के कारण बड़ी संख्या में छोटे फल पेड़ों से गिर गए, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
इस वर्ष अप्रैल माह में आम के पेड़ फूलों से लदे नजर आए जिससे बंपर उत्पादन की उम्मीद और मजबूत हुई। हालांकि मई के मध्य से जून तक खराब मौसम और तेज हवाएं अकसर नुकसान पहुंचाती हैं।
कई स्थानों पर पेड़ तक गिर गए जिससे बागवानों को झटका लगा है। इसके बावजूद जिन क्षेत्रों में हवाओं का असर कम रहा, वहां पेड़ों पर अभी भी अच्छी मात्रा में फल मौजूद हैं। ध्यान रहे कि ऊना जिले के कच्चे आम की मांग विशेष रूप से अचार उद्योग में काफी अधिक है। एक सप्ताह के भीतर आम की तुड़ाई शुरू होने की संभावना है।
इसके बाद आम की खेप पंजाब के अमृतसर, कोटकपूरा, मोगा और लुधियाना की मंडियों में भेजी जाएगी, जहां से इसे अचार फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता है। मंडी में आम की खरीद बोली के आधार पर होती है और इसके दाम तय नहीं होते। आमतौर पर कच्चे आम के दाम पांच से लेकर 30 रुपये प्रति किलो तक मिलते हैं। ऐसे में इस बार अच्छी पैदावार होने पर किसानों को बेहतर आमदनी की भी उम्मीद है।
Trending Videos
जानकारी के अनुसार जिले में अधिकांश पेड़ देसी किस्म के हैं और यहां हर साल करीब 12000 मीट्रिक टन तक कच्चे आम का उत्पादन होता है।
हालांकि मौसम की मार कई बार किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर देती है। बीते वर्ष भी फसल अच्छी थी लेकिन तेज हवाओं और बारिश के कारण उत्पादन घटकर करीब 10000 मीट्रिक टन रह गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
विशेषज्ञों के अनुसार आम की फसल के लिए बारिश लाभदायक मानी जाती है क्योंकि इससे फलों की वृद्धि तेज होती है लेकिन बारिश के साथ चलने वाली तेज हवाएं नुकसानदायक साबित होती हैं। पिछले वर्षों में तेज हवाओं के कारण बड़ी संख्या में छोटे फल पेड़ों से गिर गए, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
इस वर्ष अप्रैल माह में आम के पेड़ फूलों से लदे नजर आए जिससे बंपर उत्पादन की उम्मीद और मजबूत हुई। हालांकि मई के मध्य से जून तक खराब मौसम और तेज हवाएं अकसर नुकसान पहुंचाती हैं।
कई स्थानों पर पेड़ तक गिर गए जिससे बागवानों को झटका लगा है। इसके बावजूद जिन क्षेत्रों में हवाओं का असर कम रहा, वहां पेड़ों पर अभी भी अच्छी मात्रा में फल मौजूद हैं। ध्यान रहे कि ऊना जिले के कच्चे आम की मांग विशेष रूप से अचार उद्योग में काफी अधिक है। एक सप्ताह के भीतर आम की तुड़ाई शुरू होने की संभावना है।
इसके बाद आम की खेप पंजाब के अमृतसर, कोटकपूरा, मोगा और लुधियाना की मंडियों में भेजी जाएगी, जहां से इसे अचार फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता है। मंडी में आम की खरीद बोली के आधार पर होती है और इसके दाम तय नहीं होते। आमतौर पर कच्चे आम के दाम पांच से लेकर 30 रुपये प्रति किलो तक मिलते हैं। ऐसे में इस बार अच्छी पैदावार होने पर किसानों को बेहतर आमदनी की भी उम्मीद है।