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Una News: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद बने बड़ी चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 26 Mar 2026 06:30 AM IST
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ऊना। जिले के सरकारी स्कूलों में अध्यापकों के खाली पद एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी समस्या बनकर उभरे हैं। कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बेहद कम है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षा विभाग अब तक शत-प्रतिशत तैनाती सुनिश्चित करने में विफल रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले के स्कूलों में करीब 40 प्रतिशत तक अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं। ऐसे में एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं का जिम्मा संभालना पड़ रहा है, जिससे न तो पढ़ाई की गुणवत्ता बन रही और न ही छात्रों को विषयवार उचित मार्गदर्शन मिल पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां कई विषयों के शिक्षक उपलब्ध ही नहीं हैं। विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों की कमी से छात्रों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अभिभावकों में रीना देवी, कुसुम कुमार, अशोक शर्मा, सुलेखा देवी, अजय कुमार, रोहित सैनी का कहना है कि सरकारी स्कूलों की इस स्थिति के चलते उन्हें मजबूरन अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाना पड़ रहा है। उनका मानना है कि बेहतर शिक्षा के लिए अब निजी स्कूल ही एकमात्र विकल्प बनकर रह गए हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़े।
वहीं शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर रिक्त पदों को भरने के दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा। शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों के भविष्य पर भी असर पड़ेगा। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द खाली पदों को भरा जाए ताकि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधर सके और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि सभी स्कूलों में खाली पदों की भरपाई के लिए प्रयास जारी हैं। कुछ स्कूलों में पद खाली है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के साथ स्थायी इंतजाम के लिए मामला उच्च अधिकारियों के ध्यान में है।
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जानकारी के अनुसार जिले के स्कूलों में करीब 40 प्रतिशत तक अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं। ऐसे में एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं का जिम्मा संभालना पड़ रहा है, जिससे न तो पढ़ाई की गुणवत्ता बन रही और न ही छात्रों को विषयवार उचित मार्गदर्शन मिल पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां कई विषयों के शिक्षक उपलब्ध ही नहीं हैं। विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षकों की कमी से छात्रों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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अभिभावकों में रीना देवी, कुसुम कुमार, अशोक शर्मा, सुलेखा देवी, अजय कुमार, रोहित सैनी का कहना है कि सरकारी स्कूलों की इस स्थिति के चलते उन्हें मजबूरन अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाना पड़ रहा है। उनका मानना है कि बेहतर शिक्षा के लिए अब निजी स्कूल ही एकमात्र विकल्प बनकर रह गए हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़े।
वहीं शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर रिक्त पदों को भरने के दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा। शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों के भविष्य पर भी असर पड़ेगा। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द खाली पदों को भरा जाए ताकि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधर सके और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि सभी स्कूलों में खाली पदों की भरपाई के लिए प्रयास जारी हैं। कुछ स्कूलों में पद खाली है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के साथ स्थायी इंतजाम के लिए मामला उच्च अधिकारियों के ध्यान में है।