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Una News: फलों से भरने लगी किसानों की झोली
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एचपी शिवा परियोजना के तहत लगे अपने अमरूद के बगीचे में किसान अजमेर सिंह। सत्रोत: विभाग
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ऊना। जंगली जानवरों के डर, पानी की कमी और पारंपरिक खेती की सीमाओं से जूझ रहे ऊना के किसान अब आधुनिक बागवानी से नई पहचान बना रहे हैं। एचपी-शिवा परियोजना के तहत सौर फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई और उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों की मदद से खेत बागों में बदल रहे हैं।
नतीजा यह है कि किसानों की आमदनी बढ़ रही है और जिले में खेती का नया मॉडल विकसित हो रहा है। बंगाणा के बौल गांव के 65 वर्षीय किसान अजमेर सिंह ने परियोजना के तहत भूमि समतलीकरण, ड्रिप सिंचाई और तकनीकी सहयोग मिलने पर 25 कनाल में श्वेता और ललिता किस्म के अमरूद लगाए।
सफलता मिलने पर बगीचे का विस्तार कर इसे 125 कनाल बगीचा लगाया है। पिछले वर्ष उनके बगीचे से 25 क्विंटल अमरूद का उत्पादन हुआ, जिससे 1.25 लाख रुपये की आय और करीब 50 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
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वहीं, चंगर हंडोला के सुनील कुमार ने 25 कनाल में 1,725 अमरूद के पौधे लगाए हैं, जबकि उपरली बॉल के 74 वर्षीय रोशन लाल ने 25 कनाल में ताइवान पिंक किस्म के करीब 3,300 ड्रैगन फ्रूट पौधे रोपकर नई मिसाल पेश की है।
प्रथम चरण में रोप 65,575 पौधे
परियोजना दो चरणों में लागू की जा रही है। पहले चरण में 200 हेक्टेयर और दूसरे चरण में 300 हेक्टेयर में आधुनिक फल बागवानी विकसित करने का लक्ष्य है। प्रथम चरण में अब तक 149 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है, जिसमें 60 हेक्टेयर क्षेत्र में 65,575 अमरूद, मौसंबी और अनार के पौधे लगाए है। -केके भारद्वाज, उप निदेशक, बागवानी विभा
70 हजार और फलदार पौधे लगाने का लक्ष्य
विभाग ने जुलाई-अगस्त में 70 हजार और फलदार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। दूसरे चरण में ब्लूबेरी, एवोकाडो और ड्रैगन फ्रूट जैसे सुपर फ्रूट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। वर्तमान में जिले में छह हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की खेती हो रही है, जबकि एक किसान ने एक एकड़ में ब्लूबेरी की खेती शुरू की है। अब तक 358 किसान सीधे परियोजना से जुड़े है। उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि एचपी-शिवा परियोजना के तहत जिले के 13 क्लस्टरों में परियोजना का कार्य चल रहा है।
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नतीजा यह है कि किसानों की आमदनी बढ़ रही है और जिले में खेती का नया मॉडल विकसित हो रहा है। बंगाणा के बौल गांव के 65 वर्षीय किसान अजमेर सिंह ने परियोजना के तहत भूमि समतलीकरण, ड्रिप सिंचाई और तकनीकी सहयोग मिलने पर 25 कनाल में श्वेता और ललिता किस्म के अमरूद लगाए।
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सफलता मिलने पर बगीचे का विस्तार कर इसे 125 कनाल बगीचा लगाया है। पिछले वर्ष उनके बगीचे से 25 क्विंटल अमरूद का उत्पादन हुआ, जिससे 1.25 लाख रुपये की आय और करीब 50 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
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वहीं, चंगर हंडोला के सुनील कुमार ने 25 कनाल में 1,725 अमरूद के पौधे लगाए हैं, जबकि उपरली बॉल के 74 वर्षीय रोशन लाल ने 25 कनाल में ताइवान पिंक किस्म के करीब 3,300 ड्रैगन फ्रूट पौधे रोपकर नई मिसाल पेश की है।
प्रथम चरण में रोप 65,575 पौधे
परियोजना दो चरणों में लागू की जा रही है। पहले चरण में 200 हेक्टेयर और दूसरे चरण में 300 हेक्टेयर में आधुनिक फल बागवानी विकसित करने का लक्ष्य है। प्रथम चरण में अब तक 149 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है, जिसमें 60 हेक्टेयर क्षेत्र में 65,575 अमरूद, मौसंबी और अनार के पौधे लगाए है। -केके भारद्वाज, उप निदेशक, बागवानी विभा
70 हजार और फलदार पौधे लगाने का लक्ष्य
विभाग ने जुलाई-अगस्त में 70 हजार और फलदार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। दूसरे चरण में ब्लूबेरी, एवोकाडो और ड्रैगन फ्रूट जैसे सुपर फ्रूट्स को बढ़ावा दिया जाएगा। वर्तमान में जिले में छह हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट की खेती हो रही है, जबकि एक किसान ने एक एकड़ में ब्लूबेरी की खेती शुरू की है। अब तक 358 किसान सीधे परियोजना से जुड़े है। उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि एचपी-शिवा परियोजना के तहत जिले के 13 क्लस्टरों में परियोजना का कार्य चल रहा है।