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Una News: गैर सिंचित इलाकों में कई दिनों से बारिश के इंतजार में किसान
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ऊना। जिले में वीरवार सुबह आसमान में बादल छाए रहने से लोगों को बारिश की उम्मीद जगी लेकिन दोपहर होते-होते बादल छंट गए और तेज धूप निकल आई। बारिश न होने से खासकर गैर सिंचित क्षेत्रों के किसान मायूस नजर आए। कई दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को मौसम की बेरुखी के कारण फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता सताने लगी है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो गेहूं की फसल पर गंभीर असर पड़ सकता है। जिले में इस समय गेहूं की फसल दाना पड़ रहा और इस समय नमी की आवश्यकता होती है। बारिश न होने के कारण फसल झुलसने लगी, जिससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार जिला ऊना में इस समय करीब 35 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल तैयार हो रही है। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। ऐसे में समय पर बारिश न होने से गैर सिंचित इलाकों के किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने महंगे बीज और खाद डालकर फसल तैयार की है लेकिन बारिश न होने से उनकी मेहनत और लागत पर पानी फिरने का खतरा मंडरा रहा है।
वहीं जिले में इन दिनों अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सिंचाई की सुविधा वाले किसान किसी तरह ट्यूबवेल और अन्य साधनों से फसल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा नहीं है वहां के किसान पूरी तरह आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। किसानों में अमित कुमार, तिलकराज, रामपाल, तरसेम लाल, प्रेम चंद सहित अन्य ने सरकार और कृषि विभाग से मांग की है कि यदि मौसम की स्थिति ऐसी ही बनी रहती है तो प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए उचित कदम उठाए जाएं ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि फसलों के लिए इस समय बारिश बेहद जरूरी है। इसके बिना फसलें काफी प्रभावित होंगी। बिन बारिश गैर सिंचित इलाकों में फसल का उत्पादन गिरना तय है। इससे बचने का बारिश एकमात्र विकल्प है।
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जानकारी के अनुसार जिला ऊना में इस समय करीब 35 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल तैयार हो रही है। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। ऐसे में समय पर बारिश न होने से गैर सिंचित इलाकों के किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने महंगे बीज और खाद डालकर फसल तैयार की है लेकिन बारिश न होने से उनकी मेहनत और लागत पर पानी फिरने का खतरा मंडरा रहा है।
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वहीं जिले में इन दिनों अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सिंचाई की सुविधा वाले किसान किसी तरह ट्यूबवेल और अन्य साधनों से फसल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा नहीं है वहां के किसान पूरी तरह आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। किसानों में अमित कुमार, तिलकराज, रामपाल, तरसेम लाल, प्रेम चंद सहित अन्य ने सरकार और कृषि विभाग से मांग की है कि यदि मौसम की स्थिति ऐसी ही बनी रहती है तो प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए उचित कदम उठाए जाएं ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि फसलों के लिए इस समय बारिश बेहद जरूरी है। इसके बिना फसलें काफी प्रभावित होंगी। बिन बारिश गैर सिंचित इलाकों में फसल का उत्पादन गिरना तय है। इससे बचने का बारिश एकमात्र विकल्प है।