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Una News: अंबोटा की निशू ने प्राकृतिक शहद उत्पादन से बनाई अलग पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 13 Mar 2026 06:48 AM IST
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निशु कुमारी शहद की पैकिंग के साथ ।संवाद
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नारी (ऊना)। जिला ऊना के अंबोटा गांव की निशू सूद प्राकृतिक शहद उत्पादन के क्षेत्र में सफलता की नई मिसाल बनकर उभरी हैं। मुख्यमंत्री मधु विकास योजना के तहत मधुमक्खी पालन से उन्होंने न केवल आर्थिक रूप से स्वावलंबन हासिल किया है बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार के लिए प्रेरित किया है। वर्तमान में वह सालाना करीब 30 लाख रुपये का कारोबार कर रही हैं और खर्च निकालने के बाद लगभग 10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रही हैं।
निशू सूद ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और पीएनबी आरसेटी से प्रशिक्षण प्राप्त कर तीन वर्ष पहले मात्र एक लाख रुपये की पूंजी से इस कार्य की शुरुआत की थी। शुरुआती वर्ष में उन्हें करीब 48 हजार रुपये की आय हुई लेकिन आत्मविश्वास, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत के दम पर उन्होंने अपने कार्य का दायरा बढ़ाया। आज उनके पास लगभग 400 मधुमक्खी बॉक्स हैं, जिनसे सालाना करीब 10 हजार किलोग्राम शहद का उत्पादन होता है। उन्होंने बताया कि अपने उत्पाद को बेहतर पैकेजिंग के साथ ‘पहाड़ी शहद’ ब्रांड के नाम से बाजार में उतारा गया है। इसके अलावा मोम उत्पादन से भी उन्हें अतिरिक्त आय हो रही है। अपने कार्य के विस्तार के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत बैंक से लगभग 10 लाख रुपये का ऋण भी लिया है।
निशू सूद का कहना है कि शहद की गुणवत्ता और विविधता बनाए रखने के लिए मधुमक्खियों को अलग-अलग मौसम में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान तक ले जाया जाता है, जिससे विभिन्न प्रकार के फूलों का रस मिलने से शहद की गुणवत्ता बेहतर होती है। उन्होंने बताया कि मल्टी फ्लोर, ब्लैक डायमंड, सरसों के फूलों से तैयार शहद और केसर हनी जैसी कई किस्में तैयार की जा रही हैं। सभी उत्पाद भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के मानकों के अनुसार प्रमाणित हैं और इनकी कीमत गुणवत्ता के आधार पर 500 से 1200 रुपये प्रति किलोग्राम तक है।
20 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर किया आत्मनिर्भर
निशू सूद अब तक करीब 20 महिलाओं और युवाओं को मधुमक्खी पालन का निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनने की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि शहद की गुणवत्ता बनाए रखना और अधिक से अधिक महिलाओं को इस क्षेत्र से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि इस कार्य में उनके बेटे अनुभव और पति का पूरा सहयोग मिल रहा है। बेटे ने भी नई तकनीकों के माध्यम से मधुमक्खी पालन में दक्षता हासिल कर उनके काम को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। निशू सूद को इस क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। उनका कहना है कि वह चाहती हैं कि क्षेत्र की अधिक से अधिक महिलाएं इस कार्य से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें और प्राकृतिक शहद की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए बाजार में अपनी पहचान स्थापित करें।
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निशू सूद ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और पीएनबी आरसेटी से प्रशिक्षण प्राप्त कर तीन वर्ष पहले मात्र एक लाख रुपये की पूंजी से इस कार्य की शुरुआत की थी। शुरुआती वर्ष में उन्हें करीब 48 हजार रुपये की आय हुई लेकिन आत्मविश्वास, दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत के दम पर उन्होंने अपने कार्य का दायरा बढ़ाया। आज उनके पास लगभग 400 मधुमक्खी बॉक्स हैं, जिनसे सालाना करीब 10 हजार किलोग्राम शहद का उत्पादन होता है। उन्होंने बताया कि अपने उत्पाद को बेहतर पैकेजिंग के साथ ‘पहाड़ी शहद’ ब्रांड के नाम से बाजार में उतारा गया है। इसके अलावा मोम उत्पादन से भी उन्हें अतिरिक्त आय हो रही है। अपने कार्य के विस्तार के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत बैंक से लगभग 10 लाख रुपये का ऋण भी लिया है।
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निशू सूद का कहना है कि शहद की गुणवत्ता और विविधता बनाए रखने के लिए मधुमक्खियों को अलग-अलग मौसम में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान तक ले जाया जाता है, जिससे विभिन्न प्रकार के फूलों का रस मिलने से शहद की गुणवत्ता बेहतर होती है। उन्होंने बताया कि मल्टी फ्लोर, ब्लैक डायमंड, सरसों के फूलों से तैयार शहद और केसर हनी जैसी कई किस्में तैयार की जा रही हैं। सभी उत्पाद भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के मानकों के अनुसार प्रमाणित हैं और इनकी कीमत गुणवत्ता के आधार पर 500 से 1200 रुपये प्रति किलोग्राम तक है।
20 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर किया आत्मनिर्भर
निशू सूद अब तक करीब 20 महिलाओं और युवाओं को मधुमक्खी पालन का निशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनने की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि शहद की गुणवत्ता बनाए रखना और अधिक से अधिक महिलाओं को इस क्षेत्र से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि इस कार्य में उनके बेटे अनुभव और पति का पूरा सहयोग मिल रहा है। बेटे ने भी नई तकनीकों के माध्यम से मधुमक्खी पालन में दक्षता हासिल कर उनके काम को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। निशू सूद को इस क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। उनका कहना है कि वह चाहती हैं कि क्षेत्र की अधिक से अधिक महिलाएं इस कार्य से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें और प्राकृतिक शहद की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए बाजार में अपनी पहचान स्थापित करें।