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Una News: जिले में मक्की की कटाई शुरू फसल लेकर मंडी पहुंच रहे किसान
Mon, 10 Aug 2026 12:44 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 10 Aug 2026 12:44 AM IST
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ऊना। जिले में मक्की की फसल की कटाई का काम शुरू हो गया है। कई किसान फसल को पूरी तरह पकने का इंतजार करने के बजाय गीली मक्की की कटाई कर मंडियों में पहुंचा रहे हैं। गीली मक्की के दाम बेहद कम मिलने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंडी में गीली मक्की की खरीद करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक हो रही है। किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत की तुलना में यह भाव काफी कम है। जिले के कई क्षेत्रों में किसान मक्की की कटाई कर इसे होशियारपुर मंडी में बिक्री के लिए ले जा रहे हैं। मक्की की फसल में नमी अधिक होने के कारण किसानों को सामान्य सूखी मक्की के मुकाबले काफी कम दाम मिल रहे हैं।
इसके बावजूद किसान मजबूरी में गीली मक्की मंडी पहुंचा रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण खेतों को अगली फसल के लिए तैयार करना भी है। किसानों में राजेश कुमार, देसराज, देवराज, नरोत्तम शर्मा सहित अन्य के अनुसार मक्की की कटाई का काम समय से पहले करने का एक कारण आलू की फसल की बिजाई भी है।
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किसान खेत खाली करने के लिए मक्की की कटाई कर रहे हैं, ताकि सितंबर माह की शुरुआत में समय रहते खेत तैयार कर आलू की बिजाई की जा सके। ऐसे में मक्की पूरी तरह सूखने और उसमें नमी कम होने का इंतजार करना किसानों के लिए संभव नहीं हो रहा है।
हरी और गीली मक्की की पोल्ट्री फार्मों में भी मांग रहती है। पशु एवं पक्षी आहार में मक्की का इस्तेमाल होने के कारण पोल्ट्री फार्म संचालकों की ओर से इसकी खरीद की जाती है। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि मक्की की फसल शानदार तरीके से तैयार हुआ है।
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मंडी में गीली मक्की की खरीद करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक हो रही है। किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत की तुलना में यह भाव काफी कम है। जिले के कई क्षेत्रों में किसान मक्की की कटाई कर इसे होशियारपुर मंडी में बिक्री के लिए ले जा रहे हैं। मक्की की फसल में नमी अधिक होने के कारण किसानों को सामान्य सूखी मक्की के मुकाबले काफी कम दाम मिल रहे हैं।
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इसके बावजूद किसान मजबूरी में गीली मक्की मंडी पहुंचा रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण खेतों को अगली फसल के लिए तैयार करना भी है। किसानों में राजेश कुमार, देसराज, देवराज, नरोत्तम शर्मा सहित अन्य के अनुसार मक्की की कटाई का काम समय से पहले करने का एक कारण आलू की फसल की बिजाई भी है।
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किसान खेत खाली करने के लिए मक्की की कटाई कर रहे हैं, ताकि सितंबर माह की शुरुआत में समय रहते खेत तैयार कर आलू की बिजाई की जा सके। ऐसे में मक्की पूरी तरह सूखने और उसमें नमी कम होने का इंतजार करना किसानों के लिए संभव नहीं हो रहा है।
हरी और गीली मक्की की पोल्ट्री फार्मों में भी मांग रहती है। पशु एवं पक्षी आहार में मक्की का इस्तेमाल होने के कारण पोल्ट्री फार्म संचालकों की ओर से इसकी खरीद की जाती है। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि मक्की की फसल शानदार तरीके से तैयार हुआ है।