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Una News: ज्ञान भारतम् पोर्टल पर अपलोड होंगी दुर्लभ पांडुलिपियां
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:42 AM IST
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ऊना। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देश की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत के संरक्षण के लिए ज्ञान भारतम् पोर्टल की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से देश भर में बिखरी हुई प्राचीन पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। पांडुलिपियों को डिजिटल करने के इस राष्ट्रव्यापी अभियान को गति देने के लिए संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न जिलों के डीआरपी के बीच एक उच्च स्तरीय ऑनलाइन बैठक संपन्न हुई।
इस अभियान का उद्देश्य भारत के विशाल ज्ञान भंडार को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उसे वैश्विक स्तर पर सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियां हमारे पूर्वजों के ज्ञान, विज्ञान, दर्शन और कला की अमूल्य धरोहर है, जिनके संरक्षण के लिए डिजिटलाइजेशन करना अत्यंत आवश्यक है।
ऑनलाइन बैठक में विशेषज्ञों द्वारा पोर्टल पर पांडुलिपियों को अपलोड करने की विस्तृत प्रक्रिया समझाई। इसमें पांडुलिपि के प्रकार भाषा, कालखंड और उसकी वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी दर्ज करनी होगी। यह कार्य मिशन मोड पर किया जा रहा है ताकि एक व्यापक और व्यवस्थित राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार किया जा सके।
इस दिशा में डॉ. किशोरी लाल शर्मा प्रवक्ता राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ऊना ने पांडुलिपि सर्वेक्षण का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है, वह घर-घर, मंदिरों में, पुस्तकालयों एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर प्राचीन पांडुलिपियों की खोज कर रहे हैं और उससे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित की जा रही है।
डॉ. किशोरी लाल शर्मा ने आम नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, पुस्तकालयों और पांडुलिपियों के स्वामियों से इस राष्ट्रीय महायज्ञ में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। यह पहल न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित करेगी बल्कि आने वाली पीढि़यों के लिए ज्ञान का अमूल्य खजाना भी संजोकर रखेगी।
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इस अभियान का उद्देश्य भारत के विशाल ज्ञान भंडार को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उसे वैश्विक स्तर पर सुलभ बनाना है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियां हमारे पूर्वजों के ज्ञान, विज्ञान, दर्शन और कला की अमूल्य धरोहर है, जिनके संरक्षण के लिए डिजिटलाइजेशन करना अत्यंत आवश्यक है।
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ऑनलाइन बैठक में विशेषज्ञों द्वारा पोर्टल पर पांडुलिपियों को अपलोड करने की विस्तृत प्रक्रिया समझाई। इसमें पांडुलिपि के प्रकार भाषा, कालखंड और उसकी वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी दर्ज करनी होगी। यह कार्य मिशन मोड पर किया जा रहा है ताकि एक व्यापक और व्यवस्थित राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार किया जा सके।
इस दिशा में डॉ. किशोरी लाल शर्मा प्रवक्ता राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ऊना ने पांडुलिपि सर्वेक्षण का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है, वह घर-घर, मंदिरों में, पुस्तकालयों एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर प्राचीन पांडुलिपियों की खोज कर रहे हैं और उससे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित की जा रही है।
डॉ. किशोरी लाल शर्मा ने आम नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, पुस्तकालयों और पांडुलिपियों के स्वामियों से इस राष्ट्रीय महायज्ञ में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। यह पहल न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित करेगी बल्कि आने वाली पीढि़यों के लिए ज्ञान का अमूल्य खजाना भी संजोकर रखेगी।