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हिमाचल में टीजीटी वर्ग हो रहा ठगी का शिकार : कुलदीप चंदेल
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सरकार की ओर से करीब दो हजार शिक्षक पद किए समाप्त
कुलदीप चंदेल को सर्वसहमति से चुना गया सर्व टीजीटी कैडर महासंघ जिला ऊना का प्रधान
बोले, टीजीटी के लिए सरकार पंजाब की तर्ज पर नए वेतनमान की शर्तों को करे लागू
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। सर्व टीजीटी महासंघ के नवनियुक्त जिला प्रधान कुलदीप चंदेल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में टीजीटी वर्ग ठगी का शिकार होकर रह गया है। पहले शिक्षक वर्ग आर्ट्स, मेडिकल और नॉन-मेडिकल कैडर में विभाजित था, लेकिन अब सभी कैडर एकजुट हो चुके हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (बाल) ऊना में आयोजित जिलास्तरीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 16 हजार शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि सरकार की ओर से करीब दो हजार शिक्षक पद समाप्त कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का अब तक का कार्यकाल संतोषजनक रहा है, लेकिन कमियां हर सरकार में रहती हैं, चाहे प्रदेश में कोई भी सरकार सत्ता में हो।
चंदेल ने मांग की कि अनुबंध प्रथा को अन्य राज्यों की तर्ज पर पूरी तरह समाप्त किया जाए। लगभग 10 हजार शिक्षकों को कैडर के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
सर्व टीजीटी महासंघ के इस जिला अधिवेशन में करीब 100 अध्यापकों ने भाग लिया। अधिवेशन में कुलदीप चंदेल को जिला प्रधान चुना गया। वहीं, राजन रनौत को महासचिव, विनय कटोच को वरिष्ठ उप प्रधान, नेहा को सह सचिव, सोमनाथ को कोषाध्यक्ष, अश्वनी सैनी को मीडिया सचिव, मनोज शर्मा को ऑडिटर तथा कमल चंदेल को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिला कार्यकारिणी के साथ-साथ खंड अंब, गगरेट, बंगाणा और हरोली की कार्यकारिणियों का भी गठन किया गया।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि टीजीटी वर्ग की वेतन विसंगतियों को शीघ्र दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पंजाब की तर्ज पर 1 जनवरी 2016 से नए वेतनमान की शर्तों को लागू करते हुए टीजीटी का मूल वेतन 45,400 रुपये निर्धारित किया जाए।
इसके अतिरिक्त स्थानांतरण के लिए सरकार की ओर से तय 30 किलोमीटर की दूरी सीमा को घटाकर 15 से 20 किलोमीटर किया जाए। अनुबंध कर्मचारियों को वर्ष में पहले की तरह दो बार नियमित किया जाए तथा अनुबंध अवधि की सेवाओं को वरिष्ठता और पेंशन लाभों में जोड़ा जाए। 4-9-14 एसीपी की पुनः बहाली की जाए। सीबीएसई स्कूलों के लिए चयनित किए जा रहे अध्यापकों के कैडर को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। वर्तमान स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के भीतर उत्पन्न हो रहे इस भ्रम को सरकार की ओर से जल्द दूर किया जाए। साथ ही डीम्ड रेगुलर जीटीजी की पदोन्नति सूची शीघ्र जारी की जाए।
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बोले, टीजीटी के लिए सरकार पंजाब की तर्ज पर नए वेतनमान की शर्तों को करे लागू
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। सर्व टीजीटी महासंघ के नवनियुक्त जिला प्रधान कुलदीप चंदेल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में टीजीटी वर्ग ठगी का शिकार होकर रह गया है। पहले शिक्षक वर्ग आर्ट्स, मेडिकल और नॉन-मेडिकल कैडर में विभाजित था, लेकिन अब सभी कैडर एकजुट हो चुके हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (बाल) ऊना में आयोजित जिलास्तरीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 16 हजार शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि सरकार की ओर से करीब दो हजार शिक्षक पद समाप्त कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का अब तक का कार्यकाल संतोषजनक रहा है, लेकिन कमियां हर सरकार में रहती हैं, चाहे प्रदेश में कोई भी सरकार सत्ता में हो।
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चंदेल ने मांग की कि अनुबंध प्रथा को अन्य राज्यों की तर्ज पर पूरी तरह समाप्त किया जाए। लगभग 10 हजार शिक्षकों को कैडर के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
सर्व टीजीटी महासंघ के इस जिला अधिवेशन में करीब 100 अध्यापकों ने भाग लिया। अधिवेशन में कुलदीप चंदेल को जिला प्रधान चुना गया। वहीं, राजन रनौत को महासचिव, विनय कटोच को वरिष्ठ उप प्रधान, नेहा को सह सचिव, सोमनाथ को कोषाध्यक्ष, अश्वनी सैनी को मीडिया सचिव, मनोज शर्मा को ऑडिटर तथा कमल चंदेल को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिला कार्यकारिणी के साथ-साथ खंड अंब, गगरेट, बंगाणा और हरोली की कार्यकारिणियों का भी गठन किया गया।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि टीजीटी वर्ग की वेतन विसंगतियों को शीघ्र दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पंजाब की तर्ज पर 1 जनवरी 2016 से नए वेतनमान की शर्तों को लागू करते हुए टीजीटी का मूल वेतन 45,400 रुपये निर्धारित किया जाए।
इसके अतिरिक्त स्थानांतरण के लिए सरकार की ओर से तय 30 किलोमीटर की दूरी सीमा को घटाकर 15 से 20 किलोमीटर किया जाए। अनुबंध कर्मचारियों को वर्ष में पहले की तरह दो बार नियमित किया जाए तथा अनुबंध अवधि की सेवाओं को वरिष्ठता और पेंशन लाभों में जोड़ा जाए। 4-9-14 एसीपी की पुनः बहाली की जाए। सीबीएसई स्कूलों के लिए चयनित किए जा रहे अध्यापकों के कैडर को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। वर्तमान स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के भीतर उत्पन्न हो रहे इस भ्रम को सरकार की ओर से जल्द दूर किया जाए। साथ ही डीम्ड रेगुलर जीटीजी की पदोन्नति सूची शीघ्र जारी की जाए।