सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Una News ›   una khadd village football culture drug free government jobs

Himachal News: चिट्टा-चरस नहीं, फुटबॉल का जुनून: इस गांव के मैदान ने 150 से अधिक युवाओं को दिलाई सरकारी नौकरी

संजीव शर्मा, ऊना। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 22 Jun 2026 01:41 PM IST
विज्ञापन
सार

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले का खड्ड गांव फुटबॉल की अनूठी संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां हर शाम 100 से अधिक बच्चे और युवा मैदान में अभ्यास करते हैं। 1952 से सक्रिय यंग फुटबॉल क्लब की बदौलत 150 से अधिक युवाओं ने सेना, आईटीबीपी, पुलिस और अन्य सरकारी सेवाओं में जगह बनाई है। 

una khadd village football culture drug free government jobs
ऊना जिले के खड्ड गांव के खेल के मैदान में खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार

चिट्टा न चरस...। खड्ड गांव को तो फुटबाल का नशा है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर इस गांव की माटी में रचता-बसता है फुटबाल। यहां हर घर में फुटबाल का एक खिलाड़ी है। मैदान के आसपास शराब या दूसरा नशा तो दूर धूम्रपान तक नहीं कर सकते। हरोली विधानसभा क्षेत्र के इस गांव में मैदान पर शाम का नजारा किसी खेल गांव से कम नहीं होता।



8 वर्ष से लेकर 22 साल आयु वर्ग तक के 100 से ज्यादा बच्चे और युवा रोजाना शाम को यहां 5:00 से 7:00 बजे तक मैदान में दमखम दिखाते हैं। इसी मैदान में पसीना बहाकर कई खिलाड़ी नाम कमा चुके हैं। फुटबाल के दम पर 150 से अधिक युवाओं ने सेना, आईटीबीपी,  पुलिस और अन्य क्षेत्रों में सरकारी नौकरी हासिल की है। यंग फुटबाल क्लब (वाईएफसी) खड्ड बिना सरकारी मदद के चल रहा है। 1952 से चल रहा खेल का यह जुनून अब भी इस गांव में है।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्लब ने कोच दीपक दत्ता को नियुक्त किया है। ग्राउंड का सामान, कोच के वेतन समेत तमाम खर्च को गांव वाले मिलकर वहन करते हैं। इसी ग्राउंड में खेलकर सेना में भर्ती हुए कुछ जवान हर माह क्लब को चलाने के लिए राशि भेजते हैं। अन्य लोग भी क्लब को चलाने के लिए दिल खोलकर मदद करते हैं।
विज्ञापन


फुटबाल खेल में तीन वर्ष की उम्र से दिलचस्पी रखने वाले ईवान ने बताया कि उन्होंने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए मैदान में आना शुरू किया। ़उनके पिता  फुटबाल खेलते हैं। वह इसी खेल में भविष्य बनाने के इच्छुक हैं।

खेल इकलौता ऐसा माध्यम है, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इसके साथ युवाओं की एनर्जी का सदुपयोग भी होता है। फुटबाल खेल हमारे गांव के लिए वरदान है। यहां से कई बड़े खिलाड़ी निकले हैं। पंजाब से सटा सीमावर्ती गांव होने के बावजूद यहां के युवा अगर नशे से बचे हुए हैं, तो इसका एकमात्र कारण फुटबाल है। - दीपक दत्ता, कोच, वाईएफसी खड्ड 

फुटबाल खेल विरासत में मिला है। वह इसे आगे बढ़ा रहे हैं। हर वर्ष एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता करवाते हैं, जिसमें पूरे क्षेत्र का भरपूर सहयोग मिलता है। -अश्वनी दत्ता, अध्यक्ष वाईएफसी खड्ड 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed