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400 days left Naxalites trapped in the maze of FOB; two options left surrender or get shot in an encounter
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Naxal: 400 दिन शेष, 'एफओबी' के चक्रव्यूह में फंसे नक्सली; बचे हैं दो विकल्प- सरेंडर या मुठभेड़ में खाओ गोली
सुरक्षा बलों ने ऐसा जाल बिछाया है कि जिसमें नक्सलियों के पास दो ही विकल्प बचते हैं। एक, वे सरेंडर कर दें और दूसरा, सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में गोली खाने के लिए तैयार रहें। इसी रणनीति के तहत गरियाबंद में 16 नक्सली ढेर किये गये।
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- फोटो : Amar Ujala
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भरोसा दिलाया है कि मार्च 2026 से पहले यानी लगभग 400 दिन में देश के सभी हिस्सों से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा। 'सीआरपीएफ' और इसकी विशेष इकाई 'कोबरा', डीआरजी व राज्यों की पुलिस, केंद्रीय गृह मंत्री के इस भरोसे को पूरा करने में जुटी हैं। आगामी 400 दिनों में नक्सलवाद खत्म हो जाएगा, गृह मंत्री की इस मुहिम का असर दिखने लगा है। घने जंगल में और नक्सलियों के गढ़ में पहुंचकर सीआरपीएफ व दूसरे बलों के जवान 48 घंटे में 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित कर रहे हैं। अब इसी एफओबी के चक्रव्यूह में फंसकर नक्सली मारे जा रहे हैं। सुरक्षा बलों ने ऐसा जाल बिछाया है कि जिसमें नक्सलियों के पास दो ही विकल्प बचते हैं। एक, वे सरेंडर कर दें और दूसरा, सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में गोली खाने के लिए तैयार रहें। इसी रणनीति के तहत गरियाबंद में 16 नक्सली ढेर किये गये।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, नक्सलियों का अंत अब कितना निकट है, यह अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2023 में 50 नक्सली मारे गए थे तो वहीं 2024 में मुठभेड़ के दौरान 290 नक्सलियों को मौत के घाट उतारा गया। 2025 में 21 जनवरी तक 48 नक्सली मारे गए हैं। 2019 से लेकर अभी तक 290 कैंप स्थापित किए गए हैं। 2024 में 58 कैंप स्थापित हुए थे। इस वर्ष 88 कैंप स्थापित किए जाने के प्रस्ताव पर काम शुरु हो चुका है। ये कैंप नक्सल के किले को ढहाने में आखिरी किल साबित हो रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात केंद्रीय बल के एक अधिकारी बताते हैं, जिस तेजी से 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित हो रहे हैं, उससे यह बात साफ है कि तय अवधि में नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाएगा। सुरक्षा बल, नक्सलियों के गढ़ में जाकर उन्हें ललकार रहे हैं।
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मंगलवार को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बॉर्डर क्षेत्र गरियाबंद ऑपरेशन ग्रुप ई30, सीआरपीएफ कोबरा 207, सीआरपीएफ 65 एवं 211 बटालियन और एसओजी (स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप) की संयुक्त पार्टी के साथ हुई बड़ी मुठभेड़ में 14 से अधिक नक्सली मारे गए। गरियाबंद क्षेत्र में अभी तक गोलीबारी जारी है। लगभग दो दर्जन नक्सलियों को नुकसान पहुंचने का अंदेशा है।भारी संख्या में हथियार और गोला बारूद बरामद हुआ है। कुल्हाड़ी घाट पर भालू डिगी जंगल में सर्च ऑपरेशन चल रहा है। इस ऑपरेशन में एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली जयराम चलपती भी ढेर हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुठभेड़ के बाद कहा, नक्सल मुक्त भारत के संकल्प और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद आज अंतिम सांस ले रहा है। पिछले साल और अब जनवरी माह के दौरान अभी तक कई बड़े नक्सली सरेंडर कर चुके हैं।
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अधिकारी के मुताबिक, अब नक्सलियों के सामने दो ही रास्ते बचे हैं। वे सरेंडर कर दें या मरने के लिए तैयार रहें। सुरक्षा बलों ने नक्सलियों का हर वो ठिकाना ढूंढ निकाला है, जो अभी तक एक पहेली बना हुआ था। उनके स्मारक गिराए जा रहे हैं। 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' या कैंप स्थापित होने के कारण एक चक्रव्यूह बनता जा रहा है। इसी में नक्सली फंसते जा रहे हैं।
जंगल में सुरक्षा बल चारों तरफ से घेरा डालकर आगे बढ़ रहे हैं। एक एफओबी को स्थापित करने में दो या तीन दिन लगते हैं। भले ही जवानों को टैंट या कच्चे में रहना पड़े, मगर वे आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। एक माह बाद ही नए कैंप का ले आउट प्लान तैयार हो जाता है। ऐसे में नक्सली, जंगल में कहां तक पीछे भागेंगे। उनकी हर तरह की सप्लाई चेन, मसलन रसद, दवाएं, राशन और मुखबिरी, सब खत्म होती जा रही हैं। उनके ट्रेनिंग कैंप तबाह किए जा रहे हैं। नतीजा, अब नई भर्ती प्रारंभ नहीं हो पा रही है। ट्रेनिंग के लिए न तो जगह बची है और न ही युवक। ईडी और एनआईए जैसी जांच एजेंसियों ने भी अपना शिकंजा कस दिया है।
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कोबरा व सीआरपीएफ के सहयोग से सुरक्षा बलों ने विभिन्न राज्यों के नक्सल प्रभावित इलाकों में 290 नए शिविर खोले हैं। महज दस पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर दो-दो सुरक्षा कैंप या 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित किए जा रहे हैं। इस स्थिति में नक्सलियों की कमर टूट रही है। पहले नक्सलियों द्वारा बटालियन को साथ लेकर सुरक्षा बलों पर हमला बोला जाता था। उसके बाद वे कंपनी पर सिमट गए। अब कंपनी की बजाए नक्सली एक छोटी सी टीम तक सिमटते जा रहे हैं। सीआरपीएफ के सूत्रों का कहना है, जंगल में 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित करना आसान काम नहीं होता। इस काम में आईईडी ब्लास्ट, यूबीजीएल (अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर) अटैक या नक्सली हमले का जोखिम सदैव बना रहता है।
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