सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Bengal history Kolkata City of Joy Hooghly river Sutanuti village Govindpur Kalikata East India Company Job

तीन गांव, हुगली नदी और 'सिटी ऑफ जॉय': ऐसे बसा कोलकाता; ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां कैसे बढ़ाया अपना व्यापार?

N Arjun एन अर्जुन
Updated Mon, 18 May 2026 06:45 AM IST
विज्ञापन
सार

हुगली नदी के किनारे बसे तीन गांवों- सुतानुति, गोविंदपुर और कलिकाता से मिलकर आज का कोलकाता शहर बना है। जलमार्ग और व्यापार की सुविधा के कारण 17वीं सदी में यूरोपीय शक्तियों की नजर इस पर पड़ी। 1698 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे विकसित किया और 1772 में यह ब्रिटिश भारत की राजधानी बना। कई ऐतिहासिक चुनौतियों के बावजूद यह शहर आज भी अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए हुए है। आइए, विस्तार से समझते हैं तीन शहरों का सफर...

Bengal history Kolkata City of Joy Hooghly river Sutanuti village Govindpur Kalikata East India Company Job
कैसे बसा कोलकाता? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार

हुगली नदी की धारा आज भी कोलकाता के किनारों को उसी तरह छूती है, जैसे यह सदियों पहले छूती थी। भारत के सबसे ऐतिहासिक, जीवंत और सांस्कृतिक महानगर कोलकाता की शुरुआत बहुत ही छोटे स्तर से हुई थी। आज जिसे हम 'सिटी ऑफ जॉय' कहते हैं, वह पहले केवल तीन छोटे-छोटे गांवों का एक समूह था। तब शायद ही किसी ने यह सोचा होगा कि सुतानुति, गोविंदपुर और कलिकाता नाम के ये तीन गांव आगे चलकर एक विशाल महानगर में बदल जाएंगे। इन गांवों से एक बड़े शहर तक के विकास में हुगली नदी की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रही है।


कोलकाता शहर के विकास और व्यापार को समझना बहुत आसान है। बंगाल की खाड़ी से सीधे जुड़ाव और जलमार्ग की आसान सुविधा ने इस पूरे क्षेत्र को व्यापार के लिए बहुत ही खास बना दिया था। जब 17वीं शताब्दी में यूरोपीय देश भारत में अपना व्यापार बढ़ा रहे थे, तब उनकी नजर हुगली नदी के किनारे बसे इन्हीं तीन गांवों पर पड़ी थी। यहीं से इन गांवों के एक उभरते हुए शहर में बदलने की कहानी शुरू हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- Monsoon Update: अंडमान में मानसून की समय से पहले एंट्री, वहीं दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत में भीषण लू का कहर


शहर की स्थापना में जॉब चार्नाक की क्या भूमिका रही?
जॉब चार्नाक को बहुत लंबे समय तक कोलकाता शहर का संस्थापक माना जाता रहा है। इतिहास के अनुसार, 24 अगस्त 1690 के आसपास वह सुतानुति गांव पहुंचे थे। यहां आकर उन्होंने एक व्यापारिक केंद्र बनाने का काम शुरू किया था। हालांकि, आज के आधुनिक इतिहासकार यह नहीं मानते हैं कि कोलकाता की स्थापना केवल किसी एक व्यक्ति ने की थी। इतिहास की प्रसिद्ध किताब आईन-ए-अकबरी में भी 'कलिकाता' का नाम पहले से ही लिखा हुआ मिलता है, जो इसके पुराने होने का सबूत है।

ईस्ट इंडिया कंपनी ने कैसे बढ़ाया अपना व्यापार?
साल 1698 में अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी ने स्थानीय जमींदार परिवार से इन तीनों गांवों के जमींदारी अधिकार खरीद लिए थे। अधिकार मिलने के बाद कंपनी ने अपना व्यापार और प्रशासनिक ढांचा तेजी से विकसित करना शुरू कर दिया। हुगली नदी के रास्ते पानी के जहाजों से भारी मात्रा में माल ढोने का काम होता था, जिससे व्यापार बहुत तेजी से फैलने लगा। जब नया फोर्ट विलियम बन गया, तो यह इलाका पूरी तरह एक बड़े औपनिवेशिक शहर की शक्ल लेने लगा।

ब्रिटिश भारत की राजधानी से सिटी ऑफ जॉय तक का सफर कैसा रहा?
साल 1772 में वॉरेन हेस्टिंग्स के समय में कोलकाता को ब्रिटिश भारत की राजधानी बना दिया गया था। साल 1911 में अंग्रेजों ने अपनी राजधानी को कोलकाता से हटाकर दिल्ली भेज दिया। राजधानी छिनने के बावजूद कोलकाता देश की बौद्धिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान बना चुका था। यह शहर भारत के साहित्य, शिक्षा और स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र रहा है और इस शहर ने देश को नई दिशा दिखाई है।

रवींद्रनाथ ठाकुर, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसी महान विभूतियों ने इसी कोलकाता शहर की मिट्टी से प्रेरणा ली थी। समय के साथ इस शहर ने बहुत सी मुश्किलें भी देखी हैं। भीषण अकाल, देश का विभाजन, राजनीति में उथल-पुथल और पैसों की कमी जैसी कई बड़ी चुनौतियों का इस शहर ने डटकर सामना किया है। इतनी बड़ी-बड़ी मुश्किलों के बावजूद इस शहर ने अपनी आत्मा को कभी टूटने नहीं दिया है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed