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जेब पर बढ़ेगा बोझ: थोक महंगाई 10% के पार जाने का खतरा, तेल की कीमतों में और हो सकती है बढ़ोतरी; रिपोर्ट में दावा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 18 May 2026 09:34 AM IST
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सार

सिस्टेमैटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार थोक महंगाई 10 प्रतिशत के पार जा सकती है। पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ सकते है। इससे जीडीपी ग्रोथ कम होने और रुपया कमजोर होने का खतरा है। खेती और उद्योगों पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं।

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फ्यूल की कीमतों में हो सकती है बढ़ोतरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सिस्टेमैटिक्स की एक रिसर्च रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले समय में तेल के दाम और बढ़ेंगे। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में हुई तीन रुपये की बढ़ोतरी तो बस शुरुआत है। रिपोर्ट के मुताबिक, थोक महंगाई दर (WPI) का 10 प्रतिशत के पार जाना अब कोई मामूली खतरा नहीं, बल्कि हकीकत बनने वाला है। अप्रैल 2026 के आंकड़े बताते हैं कि थोक महंगाई 42 महीने के उच्चतम स्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इसमें ईंधन और बिजली क्षेत्र की महंगाई दर 24.71 प्रतिशत तक जा चुकी है।


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फिर से बढ़ सकती हैं तेल की कीमतें 
इस बीच, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रह सकती हैं। तेल कंपनियों को पिछले तीन महीनों में करीब 1.7 से 1.8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अभी जो कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, उससे इस नुकसान की केवल सात से आठ प्रतिशत ही भरपाई हो पाएगी। इसलिए घाटे को पूरा करने के लिए कीमतों में और भी कई दौर की बढ़ोतरी हो जाए सकती है।


बढ़ेगी खुदरा महंगाई 
थोक महंगाई बढ़ने का असर अब खुदरा महंगाई (CPI) पर भी दिखेगा। वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.5 से 6 प्रतिशत कर दिया है। यह रिजर्व बैंक (RBI) के 4.6 प्रतिशत के अनुमान से कहीं ज्यादा है। रिपोर्ट का मानना है कि साल की दूसरी छमाही तक खुदरा महंगाई छह से सात प्रतिशत के बीच पहुंच सकती है।

ये भी पढ़ें: जनता पर महंगाई की मार: जेब पर भारी पड़ेगा एफएमसीजी संकट, साबुन-बिस्कुट और राशन के दाम बढ़ने के आसार

महंगाई बढ़ने से लोगों की खरीदारी कम होगी, जिससे जीडीपी ग्रोथ रिजर्व बैंक के 6.9 प्रतिशत के अनुमान से काफी नीचे गिर सकती है। इसके अलावा, रुपया कमजोर होकर 100 के पार जा सकता है। विदेशी मुद्रा के लेन-देन में घाटा (BoP) बढ़ने से रिजर्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे अर्थव्यवस्था की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

हर क्षेत्रों पर अलग तरह से पड़ेगा असर
इस स्थिति का असर अलग-अलग क्षेत्रों पर अलग तरह से पड़ेगा। खेती में खाद की बढ़ती कीमतों और खराब मानसून का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीण इलाकों में महंगाई शहरों के मुकाबले तेजी से बढ़ रही है। उद्योगों पर बढ़ती ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स लागत का बोझ पड़ेगा, जिससे उनका मुनाफा कम होगा। बैंकिंग क्षेत्र में कर्ज की मांग बढ़ रही है, लेकिन यह व्यापार बढ़ने के कारण नहीं बल्कि कंपनियों की नकदी की तंगी दूर करने के लिए है।
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