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China-Taiwan Row: ताइवान पर ड्रैगन ने फिर दोहराया दावा, चीनी राजदूत बोले- इतिहास और कानून इसके प्रमाण हैं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 04 Jan 2026 11:36 PM IST
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सार

चीन ने ताइवान को लेकर अपना रुख फिर दोहराया है। भारत में चीनी राजदूत ने ताइवान को प्राचीन काल से चीन का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि ताइवान बहुत पुराने समय से चीन का हिस्सा रहा है। इतिहास और कानून दोनों इस बात को साफ तौर पर साबित करते हैं।

China ambassador to India Xu Feihong Said Taiwan is a part of China it has never been a separate country
चीन ताइवान तनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

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चीन और ताइवान के बीच जारी तनाव बीते कुछ दिनों से एक बार फिर सुर्खियों में है। भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग का ताइवान को लेकर सख्त बयान, ताइवान सीमा पर चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां और अमेरिका की चिंता ने इस पूरे मामले को फिर से गर्मा दिया है। कारण है कि चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को अलग पहचान वाला देश बताता है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर यह विवाद क्या है और क्यों पूरी दुनिया की नजर इस पर टिकी है? आइए जानते हैं।

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आइए पहले जानते हैं कि आखिर इस मामले में भारत में चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने क्या कहा?  बता दें कि फेइहोंग ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में ताइवान को लेकर अपने पुराने दावे को दोहराया। उन्होंने ताइवान को चीन का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने साफ और सख्त अंदाज में कहा कि ताइवान बहुत पुराने समय से चीन का हिस्सा रहा है। इतिहास और कानून दोनों इस बात को साफ तौर पर साबित करते हैं।

ताइवान को लेकर और क्या-क्या बोले फेइहोंग?
फेइहोंग ने कहा कि अक्तूबर 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) की स्थापना हुई थी। इसके बाद से ही उसने रिपब्लिक ऑफ चाइना (आरओसी) की जगह पूरे चीन की एकमात्र वैध सरकार के रूप में काम संभाला। उनके अनुसार, सरकार बदली लेकिन चीन देश के रूप में नहीं बदला। इसलिए पीआरसी को पूरे चीन पर संप्रभुता हासिल है, जिसमें ताइवान भी शामिल है।


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फेइहोंग ने बताया क्यों जारी है चीन ताइवान सीमा पर तनाव?
इसके साथ ही फेइहोंग ने इस बात पर भी जोर दिया कि आखिर ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव का माहौल क्यों है। उन्होंने बताया कि चीन के गृहयुद्ध और बाहरी ताकतों के दखल की वजह से ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों (मुख्य चीन और ताइवान) के बीच लंबे समय से राजनीतिक तनाव बना हुआ है। लेकिन इसके बावजूद चीन की संप्रभुता और क्षेत्र कभी नहीं बंटे हैं और न ही भविष्य में बंटेंगे।

ताइवान कभी भी स्वतंत्र देश नहीं- फेइहोंग
इसके अलावा राजदूत जू फेइहोंग ने यह भी कहा कि ताइवान का दर्जा चीन के हिस्से के रूप में कभी बदला नहीं है और न बदल सकता है। उनके अनुसार, ताइवान कभी भी एक स्वतंत्र देश नहीं रहा न पहले, न अब और न ही भविष्य में। उन्होंने ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बयान या कदम कुछ भी हों, चीन का एकीकरण होना तय है और इसे रोका नहीं जा सकता।

ताइवान के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियां
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में चीन की सेना ने ताइवान के आसपास कई सैन्य अभ्यास (मिलिट्री ड्रिल) किए हैं। खासकर तब, जब ताइवान में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेता की यात्रा होती है। चीन कहता है कि ये अभ्यास ताइवान को लेकर उसकी दृढ़ता दिखाने के लिए हैं। वहीं ताइवान ने इन कदमों को उकसाने वाला और खतरनाक बताया है। इस बात को लेकर अमेरिका और अन्य देशों ने भी चिंता जताई है अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने चीन से ताइवान पर सैन्य दबाव कम करने की अपील की है।

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युद्ध की आशंका?
वहीं अमेरिका के रक्षा विभाग (पेंटागन) से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन 2027 तक ताइवान पर युद्ध जीतने की तैयारी कर रहा है। यह साल चीन की सेना (पीएलए) की एक बड़ी वर्षगांठ से जुड़ा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर चीन अपने तट से 1500 से 2000 नॉटिकल मील दूर तक हमला करने की योजना पर भी विचार कर सकता है।

समुद्र में टकराव की घटनाएं
उधर, हाल ही में चीनी और ताइवानी कोस्ट गार्ड जहाजों के बीच भी आमने-सामने की स्थिति बनी। ताइवान के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर नजर रखते हुए जहाज चलाए और लहरें बनाकर व दिशा बदलकर चीनी जहाजों को रोकने की कोशिश की गई।

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